पिता करते हैं कपड़ों में प्रेस, बेटी बनी सब इंस्पेक्टर; कानपुर में 8 माह पहले एक दिन की थानेदार शैलजा अब UP Police में
कानपुर के नर्वल की शैलजा दिवाकर जिन्हें मिशन शक्ति अभियान के तहत एक दिन के लिए थानेदार बनाया गया था, अब यूपी पुलिस में सब इंस्पेक्टर चुनी गई हैं। ...और पढ़ें

चयन की जानकारी मिलते ही शैलजा को सम्मानित करते नर्वल थाना प्रभारी व आठ माह पहले नर्वल थाने में एक दिन के लिए थानेदार बनने के दौरान बुके देते। जागरण
HighLights
मिशन शक्ति अभियान में एक दिन की थानेदार बनी छात्रा अब यूपी पुलिस में सब-इंस्पेक्टर चुनी गई
शैलजा दिवाकर साधारण परिवार से हैं, उनके पिता कपड़ों में इस्त्री करने का काम करते हैं
अब शैलजा पीसीएस की तैयारी कर प्रशासनिक सेवा में जाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही हैं
शैलेंद्र त्रिपाठी, कानपुर। सपनों की उड़ान के लिए बड़ी शुरुआत नहीं, बड़ा हौसला चाहिए। कानपुर के नर्वल की एक साधारण परिवार की बेटी शैलजा दिवाकर ने इसे सच साबित कर दिखाया। शैलजा की ये सफलता मेहनत और संकल्प की मिसाल है। उन्होंने यूपी पुलिस में सब-इंस्पेक्टर बनने का सपना पूरा कर दिखाया।
आठ महीने पहले मिशन शक्ति अभियान के तहत उन्हें एक दिन के लिए थानेदार बनने का मौका मिला। उस एक दिन ने उनकी सोच, लक्ष्य और जिंदगी की दिशा बदल दी। पिता कपड़ों पर प्रेस कर परिवार का गुजारा करते हैं, लेकिन बेटी ने मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के दम पर यूपी पुलिस में सब-इंस्पेक्टर बनकर यह साबित कर दिया कि बुलंद इरादों के आगे परिस्थितियां कभी दीवार नहीं बनतीं।

मिशन शक्ति कार्यक्रम के दौरान एक दिन की थानेदार बनी थी शैलजा। जागरण अर्काइव
आठ महीने पहले ही बदल गई थी जिंदगी
शैलजा दिवाकर नर्वल की एक साधारण घर की बेटी है। एक घटनाक्रम ने छात्रा शैलजा की जिंदगी बदल दी।आठ माह पहले मिशन शक्ति अभियान के तहत होनहार छात्रा को एक दिन के लिए नर्वल थाने का थानेदार बनाया गया था। उस घटनाक्रम से वह इतना प्रभावित हुई कि उसने पुलिस अधिकारी बनने की ठान ली और यूपी पुलिस में दारोगा बनकर अपने निर्णय को सही साबित कर दिया। सब इंस्पेक्टर पद पर चयन होने के बाद घर में सभी खुशी मनाने लगे।नर्वल थाना प्रभारी अनिल कुमार सिंह व समाजसेवियों ने शैलजा को मिठाई खिलाकर सम्मानित किया और बधाई दी।
कभी-कभी स्कूल की फीस तक समय से नहीं जमा हो पाती थी
बेटी की कामयाबी को बताते हुए पिता के खुशी के आंसू छलक पड़े। पिता शिव स्वरूप दिवाकर बोले दोनो बेटियों को मेहनत - मजदूरी कर पढ़ाया। ताकि इनका भविष्य उज्ज्वल बन सके। पढ़ाई में कभी- भी स्कूल की फीस तक समय से नहीं जमा हो पाती थी। स्वयं कष्ट सहा, अपनी जरूरतों को नजरअंदाज किया। लेकिन बेटी के सपनों व उम्मीदों को कमजोर होने नहीं दिया।
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बेटियों से काम के लिए नहीं पढ़ाई को कहा
मां संगीता ने बताया हमारी दोनो बेटियां बेटों से कमतर नहीं उनसे बेहतर हैं। घर का काम बेटियों से नहीं कराया। उनको केवल मन लगाकर पढ़ाई के लिए कहा। ताकि उनकी सफलता से घर का नाम हो और हम सभी का मान बढ़ सके।
सीमित संसाधनों के बीच सफलता पाई
शैलजा ने सीमित संसाधनों के बीच भी मेहनत से सफलता की नई इबारत लिखी जा सकती है। नर्वल कस्बा स्थित आश्रम रोड निवासी शिव स्वरूप दिवाकर जाजमऊ में कपड़ों में इस्त्री करने का काम करते हैं। वो प्रतिदिन गांव से शहर आते-जाते हैं। उनके दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी 21 वर्षीय शैलजा व छोटी रिया।
पुलिसिंग कार्यप्रणाली से थी प्रभावित
शैलजा का चयन यूपी पुलिस में सब इंस्पेक्टर पद पर हुआ है। शैलजा ने बताया कि 28 सितंबर 2025 को जब वो बीए की छात्रा थी तो उसको मिशन शक्ति अभियान के तहत एक दिन के लिए नर्वल थाने का थाना प्रभारी बनाया गया था। उस दिन वो पुलिसिंग से बहुत प्रभावित हुई और पुलिस अधिकारी बनने की ठान ली।
घर पर ही तैयारी कर रही थी पुलिस की
यूपी पुलिस में सब इंस्पेक्टर पद पर भर्ती आई तो उसने आवेदन कर घर पर ही तैयारी शुरू कर दी। मंगलवार रात जब परिणाम जारी हुआ तो शैलजा का चयन सूची में नाम था। शैलजा की मां घरेलू महिला हैं। परिवार की आर्थिक स्थित बहुत साधारण है।
सरकारी स्कूल से शिक्षा ग्रहण करके पाया मुकाम
शैलजा ने गांव स्थित प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूल से शिक्षा ग्रहण करने के बाद 10वीं व 12वीं नर्वल स्थित एसडी मेमोरियल इंटर कालेज से किया। बीए नर्वल के सेमरझाल स्थित गणेश शंकर महाविद्यालय से किया। हाईस्कूल में उसके 82 व इंटरमीडिएट में 81 प्रतिशत नंबर थे। शैलजा ने बताया कि वो अभी घर पर ही पीसीएस की तैयारी कर रही है। आगे प्रशासनिक सेवा में जाकर सेवा करने का मन है। शैलजा की सफलता से माता - पिता के साथ गांव के लोग गदगद हैं।
नर्वल थाने की दारोगा से मिली प्रेरणा व मार्गदर्शन
शैलजा ने बताया कि एक दिन का थानेदार बनने के बाद वो नर्वल थाने में तैनात सब इंस्पेक्टर दीपा के संपर्क में आई। उनके साथ कई अन्य कार्यक्रमों में प्रतिभाग किया। उनको खाकी वर्दी में देख प्रेरित हुई। उसके बाद उनसे जुड़कर तैयारी के लिए मार्गदर्शन लेती रही।