Sawan 2026: कानपुर का सोमनाथ महादेव मंदिर, स्वप्न में दिए दर्शन, टीले की खोदाई में प्रकट हुए 5 शिवलिंग; जानें पूरी कहानी
Sawan 2026: कानपुर के कल्याणपुर बाजार स्थित सोमनाथ महादेव मंदिर में स्वप्न के बाद खुदाई में 5 शिवलिंग प्रकट हुए, जिसकी मान्यता हजार वर्ष पुरानी है। यह ...और पढ़ें

कल्याणपुर स्थित सोमनाथ महादेव मंदिर । जागरण
HighLights
मान्यता है कि भगवान शिव ने स्वप्न में टीले पर अपने होने का संकेत दिया।
खोदाई के दौरान पांच शिवलिंग मिलने की स्थानीय मान्यता मंदिर को खास बनाती है।
सावन में सोमनाथ महादेव मंदिर में दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ती है।
जागरण संवाददाता, कानपुर। Sawan 2026:''बाबा सबकी सुनते हैं...'' इसी विश्वास के साथ श्रद्धालु कल्याणपुर बाजार में स्थित सोमनाथ महादेव मंदिर पहुंचते हैं। कोई पहली संतान की कामना लेकर जल चढ़ाता है तो कोई जीवन की बाधाएं दूर करने की प्रार्थना करता है। मंदिर परिसर का शांत वातावरण भक्तों को महादेव से और भी निकट लाता है। गंगा तट पर स्थित न होने के बावजूद यह प्राचीन शिव मंदिर अपनी अद्वितीय मान्यता और महिमा के लिए अन्य प्रसिद्ध शिवालयों के समकक्ष स्थान रखता है।
मंदिर का इतिहास
भक्तों का कहना है कि सोमनाथ मंदिर हजार वर्ष पुराना है, हालांकि इसकी प्राचीनता के ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। मान्यता है कि यहां पहले एक टीला था, जहां चरवाहे गाय चराते थे। स्वप्न में भगवान शिव ने उसी स्थान पर अपने शिवलिंग के होने का संकेत दिया। खुदाई में शिवलिंग प्रकट हुआ, जिसे बाबा सोमनाथ के रूप में स्थापित किया गया। परिसर में खुदाई से मिले चार अन्य शिवलिंग भी मिले जिन्हें ''बाबा त्रिलोकीनाथ'', ''जय बाबा शिव शंकर'', ''श्री बाबा सोमनाथ दरबार'' और ''जय बाबा भोलेनाथ'' नाम से स्थापित किया गया। मंदिर में रखी खंडित मूर्तियों को स्थानीय लोग मुगलकालीन हमलों से जोड़ते हैं।
मंदिर की विशेषता
सोमनाथ मंदिर की मान्यता है कि जो महिलाएं लगातार 21 सोमवार मंदिर में जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करती हैं, उन्हें संतान सुख का आशीर्वाद प्राप्त होता है। मंदिर की एक विशेष परंपरा शिवलिंग पर अबीर और गुलाल अर्पित करने की भी है। मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान शिव भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। यहां कालसर्प दोष निवारण के लिए भी विशेष पूजा होती है, जिसमें श्रद्धालु सात प्रकार के अनाज के आटे से बने नाग-नागिन अर्पित करते हैं।
''मैं पिछले कई वर्षों से श्रावण में यहां हर दिन जलाभिषेक करता हूं। यहां की 21 सोमवार की मान्यता और शिवलिंग पर अबीर-गुलाल अर्पित करने की परंपरा में लोगों की गहरी आस्था है। बाबा के दरबार से भक्त खाली हाथ नहीं लौटता।''
- रामचंद्र यादव, भक्त
''श्रावण मास में प्रतिदिन सुबह से देर रात तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। मंदिर में जलाभिषेक, अबीर-गुलाल अर्पण और कालसर्प दोष निवारण की पूजा विधि-विधान से कराई जाती है। भक्तों की सुविधा और व्यवस्था के लिए सेवादार लगातार सेवा में जुटे रहते हैं।''
- राकेश शुक्ला, सेवादार, सोमनाथ महादेव मंदिर
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