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    सप्लायर का GST रजिस्ट्रेशन रद होने पर भी नहीं रुकेगी ITC, व्यापारियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत

    Updated: Wed, 29 Jul 2026 10:49 AM (IST)

    सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि व्यापारी ने वास्तविक खरीद और बैंकिंग भुगतान किया है, तो सप्लायर का जीएसटी पंजीकरण रद्द होने पर भी इनपुट टैक्स क ...और पढ़ें

    सप्लायर का GST रजिस्ट्रेशन रद होने पर भी नहीं रुकेगी ITC। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

    सप्लायर का GST रजिस्ट्रेशन रद होने पर भी नहीं रुकेगी ITC। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

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    जागरण संवाददाता, कानपुर। देशभर के व्यापारियों और उद्योगों के लिए राहत भरे एक महत्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई व्यापारी वास्तविक रूप से माल खरीदता है, उसका भुगतान बैंकिंग माध्यम से करता है और सभी वैध जीएसटी दस्तावेज उपलब्ध हैं, तो केवल इस आधार पर उसकी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) नहीं रोकी जा सकती कि संबंधित सप्लायर का जीएसटी पंजीकरण बाद में रद हो गया।

    सुप्रीम कोर्ट ने एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-2 एवं अन्य बनाम मेसर्स सेफकान लाइफ साइंस के मामले में 17 जुलाई 2026 को विभाग की विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी जिसके साथ ही इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला प्रभावी हो गया।

    जीएसटी विभाग ने सेफकान लाइफसाइंस प्राइवेट लिमिटेड की आइटीसी इस आधार पर अस्वीकार कर दी थी कि जिस यूनीमैक्स फार्मा केम से माल खरीदा गया था, उसका जीएसटी पंजीकरण बाद में निरस्त कर दिया गया। विभाग ने सप्लायर को फर्जी बताते हुए खरीदार की आइटीसी भी रोक दी थी।

    मामले की सुनवाई में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पाया कि माल की वास्तविक आपूर्ति ई-वे बिल और परिवहन दस्तावेज से प्रमाणित थी। भुगतान बैंकिंग चैनल के माध्यम से किया गया और सप्लायर ने जीएसटी रिटर्न भी दाखिल कर टैक्स भी जमा किया था।

    खरीदार की किसी प्रकार की धोखाधड़ी या मिलीभगत का कोई प्रमाण भी विभाग प्रस्तुत नहीं कर सका। इन तथ्यों के आधार पर हाई कोर्ट ने करदाता के पक्ष में फैसला दिया था।

    कर विशेषज्ञ एडवोकेट संतोष कुमार गुप्ता ने बताया कि हाई कोर्ट के निर्णय को राज्यकर विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी लेकिन शीर्ष अदालत ने एसएलपी खारिज कर दी।

    यह भी पढ़ें- डिमांड शून्य होने पर भी विभाग वापस नहीं दे रहा आइटीसी का लाभ, व्यापारियों ने राज्य कर विभाग की बताई खामियां

    इससे यह सिद्धांत और मजबूत हो गया कि केवल सप्लायर का पंजीकरण रद हो जाना, खरीदार का आइटीसी अस्वीकार करने का पर्याप्त आधार नहीं है। अब विभाग को आइटीसी अस्वीकार करने के लिए साबित करना होगा कि खरीदार भी फर्जी लेन-देन या कर चोरी की साजिश में शामिल था।

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    इन परिस्थितियों में मिलेगी आइटीसी

    • माल की वास्तविक आपूर्ति के पर्याप्त साक्ष्य हों।
    • भुगतान बैंकिंग माध्यम से किया गया हो।
    • वैध टैक्स इनवाइस और जीएसटी रिटर्न उपलब्ध हों।
    • खरीदार की किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या मिलीभगत का प्रमाण न हो।