HBTU दीक्षा समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने जताई नाराजगी, मंच से एक-एक कर खोलीं यूनिवर्सिटी इंफ्रास्ट्रक्चर की पोल
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने एचबीटीयू के दीक्षा समारोह में विश्वविद्यालय के इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन् ...और पढ़ें

एचबीटीयू में कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल। जागरण
HighLights
राज्यपाल ने एचबीटीयू के इंफ्रास्ट्रक्चर पर गंभीर सवाल उठाए।
ब्लैकबोर्ड ऊंचाई, छात्रा सुरक्षा, लाइब्रेरी स्थान पर जताई नाराजगी।
अधिकारियों को बजट दुरुपयोग, संवेदनहीनता पर कड़ी फटकार लगाई।
जागरण संवाददाता कानपुर। हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एचबीटीयू) के दीक्षा समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालय परिसर के इंफ्रास्ट्रक्चर, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और बजट के उपयोग को लेकर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने अपने संबोधन में तकनीकी संस्थानों और प्रशासनिक अधिकारियों को व्यावहारिक और जनोपयोगी डिजाइन तैयार करने की कड़ी हिदायत दी।
इंफ्रास्ट्रक्चर की अव्यावहारिक डिजाइनिंग पर उठाए गंभीर सवाल
कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने मंच से विश्वविद्यालयों में हो रहे निर्माण कार्यों में कई तकनीकी और व्यावहारिक खामियों को उजागर किया।
ब्लैकबोर्ड की गलत ऊंचाई
उन्होंने एक घटना का संदर्भ देते हुए बताया कि क्लासरूम में ब्लैकबोर्ड इतनी ऊंचाई पर लगा दिया जाता है कि उसका आधा हिस्सा बेकार चला जाता है। उन्होंने स्वयं एक डिजाइनर से इस पर लिखने को कहा, तो वह एक फुट भी ऊपर नहीं लिख सका। इसके बाद ही उन्होंने शिक्षकों के लिए क्लासरूम में प्लेटफार्म बनाने के निर्देश दिए।
असुरक्षित छात्राओं का छात्रावास
उन्होंने परिसर का निरीक्षण करने के बाद नाराजगी जताते हुए कहा कि लड़कियों के हास्टल के पीछे किसानों के खेत हैं, लेकिन वहां सुरक्षा के नाम पर केवल 3 फुट ऊंची दीवार बनाई जा रही थी, जो सुरक्षा के लिहाज से बेहद गंभीर लापरवाही है।
गलत जगह पर लाइब्रेरी की प्लानिंग
तीन मंजिला नए एडमिन ब्लाक का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि शीर्ष मंजिल पर लाइब्रेरी बनाई जा रही थी। उन्होंने आपत्ति जताते हुए कहा कि लाइब्रेरी वहां होनी चाहिए जहां छात्र पढ़ते और रिसर्च करते हैं, न कि प्रशासनिक ब्लाक में।
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हास्टल में वेंटिलेशन की कमी
उन्होंने इंटरनेशनल हॉस्टल का जिक्र करते हुए कहा कि वहां 6 फुट की ऊंचाई पर खिड़कियां दी गईं, जहां स्टापर खोलने के लिए टेबल पर चढ़ना पड़ता है। साथ ही, क्रॉस-वेंटिलेशन के नियमों को ताक पर रखकर खिड़कियां बेड के ठीक ऊपर बना दी गईं, जो पूरी तरह दोषपूर्ण है।
बजट के दुरुपयोग और संवेदनहीन अधिकारियों को फटकार
राज्यपाल ने अधिकारियों की कार्यशैली और बजट खपाने की प्रवृत्ति पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा, कुछ अधिकारी 'जाड़ी चामड़ी' (मोटी चमड़ी) के होते हैं, जिन पर डांट या समझाने का भी कोई असर नहीं होता। पूरी बिल्डिंग बन जाने के बाद फायर सेफ्टी वाले आते हैं, तो स्टेज तोड़ना पड़ता है। एसी लगाने के लिए बाद में दीवारें काटी जाती हैं और अंडरग्राउंड वायरिंग न होने से बाद में ऊपर से बदसूरत केबल दौड़ानी पड़ती है।
बिना सोचे समझे खर्च कर रहे बजट
उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी का उदाहरण देते हुए कहा कि बजट मिलने पर उसे शत-प्रतिशत बिना सोचे-समझे खर्च कर देना बहादुरी नहीं है, बल्कि शुरुआत में ही पूरी प्लानिंग के साथ व्यावहारिक डिजाइनिंग की जानी चाहिए ताकि जनता के पैसे की बर्बादी रुके।
भावी अधिकारियों और छात्रों को दिया गुरुमंत्र
समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावियों को बधाई देते हुए कुलाधिपति ने उन्हें भविष्य की जिम्मेदारियों का अहसास कराया। उन्होंने कहा कि आज के छात्र कल के आईएएस , आइपीएस या आइआरएस अधिकारी बनेंगे। उन्हें अभी से संकल्प लेना चाहिए कि वे जहां भी काम करेंगे, पूरी पारदर्शिता, तय समय सीमा के भीतर और मजबूती के साथ काम करेंगे। अधिकारियों की सोच हमेशा इस बात पर केंद्रित होनी चाहिए कि आम जनता को किस प्रकार सबसे बेहतर सुविधा मिल सके।
माता-पिता के खून-पसीने की कमाई का सम्मान करने की सीख
भाषण के अत्यंत भावुक हिस्से में राज्यपाल ने छात्रों के माता-पिता के संघर्ष को याद किया। उन्होंने कहा कि कई माता-पिता खेतों में काम करके और कंस्ट्रक्शन साइट्स पर ईंटें ढोकर अपने बच्चों को पढ़ा रहे हैं। उनके खून-पसीने के एक-एक रुपये का मोल समझा जाना चाहिए और प्रशासनिक या व्यक्तिगत स्तर पर इसका बिल्कुल भी दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। माता-पिता इस उम्मीद में जीते हैं कि बच्चा पढ़ेगा तो घर की इज्जत बढ़ेगी और वे दो वक्त का अच्छा खाना खा सकेंगे। उनकी इस उम्मीद और सम्मान की रक्षा करना हर छात्र और अधिकारी का पहला कर्तव्य है।