कानपुर चिड़ियाघर में सांपों की रहस्यमयी दुनिया, जानें 'विषैली' रसेल वाइपर और विशाल पाइथन के बारे में
कानपुर चिड़ियाघर में विश्व सांप दिवस पर विभिन्न विषैले और विषहीन सांपों की जानकारी दी गई, जिसमें मादा रसेल वाइपर 'विषैली' और विशाल रेटिकुलेटेड पाइथन प ...और पढ़ें

HighLights
कानपुर चिड़ियाघर में 50 से अधिक सांपों की प्रजातियां मौजूद।
मादा रसेल वाइपर 'विषैली' और विशाल रेटिकुलेटेड पाइथन आकर्षण।
सांप के काटने पर झाड़-फूंक नहीं, एंटी-वेनम ही एकमात्र इलाज।
जागरण संवाददाता, कानपुर। मादा रसेल वाइपर का विष इतना खतरनाक था कि उसके काटने से माली को खून की उल्टियां होने लगी। वह मरने की कगार पर पहुंच गया। वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंच कर रसेल वाइपर को पकड़ लिया। माली को अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में विषरोधी दवा की 47 खुराक के बाद उसकी जान बच सकी। मादा रसेल वाइपर को चिड़ियाघर भेज दिया गया। यहां उसका नाम विषैली रखा गया। वह अब सांप घर के बाड़े में है।
पर्यटक उसको देखने आते है। सिर्फ मादा रसेल वाइपर ही क्यों यहां पर कई अन्य प्रजातियों के भी सांप हैं। इनमें दुनिया के सबसे विशाल सांपों में दूसरे नंबर पर गिना जाने वाला रेटिकुलेटेड पाइथन भी है। यह इतना विशाल होता है कि इंसान तक को निगल सकता है। आइये विश्व सांप दिवस के मौके पर हम चिड़ियाघर में सापों के विषय में आपको बताते हैं।
चिड़ियाघर के सांप घर में रेटिकुलेटेड पाइथन। जागरण
चिड़ियाघर में सांपघर का निर्माण वर्ष 2014 मे किया गया था। तब यहां सबसे पहले कोबरा व रसेल वाइपर प्रजाति के सांप लाए गए। धीरे धीरे इनकी संख्या बढ़ती गई। यहां पर वर्तमान समय में रसेल वाइपर, करैत, धामन, सैंड बोआ, इंडियन राक पाइथन, रेटिकुलेटेड पाइथन, कोबरा, काम ट्रिंकेट प्रजाति के सांप हैं। यहां आने वाले पर्यटकों को सांपों के विषय में बताने के लिए उनके बाडो़ं के बाहर बोर्ड भी लगाए गए हैं। इनपर सांपों से संबंधित जानकारियां अंकित की गई है।
चिड़ियाघर के वन्यजीव चिकित्साधिकारी डा. नासिर बताते हैं कि बाड़े में रखी गई मादा रसेल वाइपस को वर्ष 2017 में गजनेर से पकड़ कर यहां लाया गया था। इसने वहां गांव में माली राम सजीवन को काट लिया था। इसका विष इतना घातक था कि राम सजीवन को खून की उल्टियां शुरू हो गईं। वन विभाग की टीम ने मादा सांप को पकड़ लिया। माली को अस्पताल ले जाया गया, जहां 47 विषरोधी दवा दी गई।
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उन्होंने बताया कि चिड़ियघर में चेन्नई से लाया गया रेटिकुलेटेड पाइथन अनाकोंडा के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सांप होता है। इसकी लंबाई अभी 12 फीट है, जबकि इस प्रजाति के सांप 30 फीट तक लंबे हो सकते हैं। यह सांप नेपाल व म्यांमार के जंगलों मे पाया जाता है। चिड़ियाघर में इस सांप के बच्चे को वर्ष 2023 में लाया गया था। उन्होंने बताया कि चिड़ियाघर में सांपों के विषय में जानकारी देने के साथ उनसी जुड़ी भ्रांतियों को भी दूर कराया जा रहा है।
चिड़ियाघर के सांप घर में ब्लैक कोबरा। जागरण
विश्व का सबसे जहरीला सांप है इनलैंड ताइपन
लोग यही समझते है कि किंग कोबरा का जहर सबसे घातक होता है। विश्व का सबसे जहरीला सांप कोबरा नहीं बल्कि इनलैंड ताइपन है। यह सांप आस्ट्रेलिया में पाया जाता है। इसका जहर बहुत घातक होता है। एक बार काटने पर जितना जहर निकलता है, उससे 100 लोगों की जान जा सकती है। वहीं किंग कोबरा के जहर से हाथी तक मर सकता है।
सबसे अधिक मृत्यु करैत के काटने से
चिड़ियाघर के वन्यजीव चिकित्सकों के अनुसार भारत में सबसे अधिक मृत्यु करैत के काटने से होती है। इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है। यह अकसर रात को सोते समय लोगों को काटता है। इसके काटने से मच्छर के काटने जैसा अहसास होता है। लोग समझ नहीं पाते है। उनका तांत्रिका तंत्र काम करना बंद कर देता है।
झांड़-फूंक से नहीं उतरता विष, विषरोधी दवा ही विकल्प
डा. नासिर बताते हैं कि सांप के काटने पर झांड़-फूंक से विष नहीं उतरता है। जो लोग यह दावा करते हैं वह गलतफहमी हैं। झांड़-फूंक से विष उतरने की भ्रांति के पीछे यह कारण है कि काटने वाला सांप जहरीला नहीं होगा। दूसरा कारण यह भी होता है कि सांप काटता है लेकिन विष नहीं छोड़ता है। ऐसे में लोग ओझा के पास जाते ने से बच जाते हैं तो मान लेते हैं कि वे झाड़-फूंक से सही हुए हैं।
दो तरह का होता है सांप का विष
सांप का विष दो तरह का होता है। करैत व कोबरा में न्यूरो टाक्सिक जहर होता है। इनके काटने पर तांत्रिका तंत्र का करना बंद कर देता है। शरीर लकवाग्रस्त हो जाता है। इनके काटने से मृत्यु तक हो जाती है। रसेल व वाइपर में हीमो टाक्सिक जहर होता है। यह रक्त वाहिनियों को नष्ट कर देता है। इस जहर से हृदय की गति रुक जाती है। मुंह व नाक से खून आने लगता है।