कासगंज में गंगा का रौद्र रूप: खतरे के निशान से ऊपर जलस्तर, तटवर्ती गांवों में बाढ़ का खतरा
कासगंज में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 14 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है, जिससे तटवर्ती इलाकों में कटान और खेतों में पानी भर गया है। कई गांवों में बा ...और पढ़ें

गंगा का बढ़ रहा है जलस्तर। जागरण
HighLights
गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 14 सेंटीमीटर ऊपर
तटवर्ती इलाकों में तेज कटान, खेतों में घुसा पानी
प्रशासन बचाव कार्य में जुटा, बाढ़ चौकियां अलर्ट पर
जागरण संवाददाता, कासगंज। गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। इससे तटवर्ती इलाकों में कटान तेज हो गया है। नगला नरिपत और मूंजखेड़ा के बाहरी हिस्से में बने मकानों तक पानी पहुंच गया है। ऐसे में बाढ़ का खतरा मंड़राने लगा है। खतरे का निशान 162 मीटर पर है, जिससे 14 सेंटीमीटर ऊपर पानी बह रहा है।
नरौरा, बिजनौर, हरिद्वार के बांधों से निरंतर पानी छोड़े जाने से गंगा में जलस्तर निरंतर बढ़ रहा है। सिंचाई विभाग के मुताबिक रात में 14 सेंटीमीटर पानी बढ़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर और बढ़ने पर हालात गंभीर हो सकते हैं। नगला नरपति, नगला दुर्जन, नगला हंसी, मूजखेड़ा और नगला जयकिशन समेत जनपद के अंतिम गांवों के सामने बाढ़ के हालात बनते जा रहे हैं हालांकि पानी अभी खेतों तक ही है।

खेतों के पास पहुंचा गंगा का पानी।
रौद्र रूप की ओर गंगा, खतरे का निशान पार कर 14 सेंटीमीटर ऊपर जलस्तर
वर्षा के सीजन में हर साल बाढ़ का खतरा मंडराने लगता है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी रोकने के लिए सिर्फ एक बांध है मगर उसका लाभ कुछ हिस्से को ही मिल पाता है। जहां बांध समाप्त होता है, वहां से आगे खेतों के रास्ते गंगा का पानी सीधे गांवों की ओर बढ़ने लगता है।
तटवर्ती इलाकों में तेजी से हो रहा कटान
ग्रामीणों के अनुसार नगला हंसी से लेकर जनपद के अंतिम गांवों तक गंगा किनारे कोई सुरक्षात्मक बांध नहीं है। ऐसे में जलस्तर में मामूली वृद्धि होते ही नदी का पानी खेतों में फैल जाता है और धीरे-धीरे आबादी तक पहुंचने लगता है। इस समय भी गंगा का पानी खेतों तक पहुंच चुका है, जिससे किसानों की फसलें डूब रही हैं।
खबरें और भी
ग्रामीणों ने बताया कि पिछले वर्ष भी इसी समस्या के कारण गांवों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। खेत जलमग्न हो गए थे और कई स्थानों पर पानी आबादी तक पहुंच गया था। इसके बावजूद इस वर्ष अब तक प्रशासन की ओर से कोई स्थायी सुरक्षा व्यवस्था या बचाव के इंतजाम नहीं किए गए हैं।
यह भी पढ़ें- राजघाट में मंदिरों तक पहुंचा पानी: नरौरा बैराज पर गंगा खतरे के निशान से 39 सेमी नीचे, तटीय क्षेत्रों में अलर्ट
कई खेतों में घुसा पानी, बाढ़ का खतरा
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते तटबंध का निर्माण या अन्य सुरक्षात्मक कार्य नहीं कराए गए तो जलस्तर और बढ़ने पर हालात गंभीर हो सकते हैं।
एडीएम प्रशासन दिग्विजय सिंह ने बताया कि बाढ़ से बचाव के इंतजाम किए जा रहे हैं। ग्रामीणों से निरंतर बातचीत की जा रही है। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा गया है। बाढ़ चौकियां अलर्ट हैं।