कौशांबी का चायल विधानसभा : विकास की राह पर अग्रसर पर मंजिल अभी बहुत दूर; क्या कहता है विधायक का रिपोर्ट कार्ड?
कौशांबी के चायल विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्य हुए हैं, लेकिन बाढ़ जैसी कई बुनियादी समस्याएं अभी भी समाधान का इंतजार कर रही हैं। विधायक पूजा पाल के ...और पढ़ें

कौशांबी के चायल विधानसभा क्षेत्र में विधायक निधि से बनी इंटरलाकिंग रोड। सौजन्य : प्रतिनिधि
HighLights
जिले में चायल विधानसभा क्षेत्र की सपा विधायक पूजा पाल का रिपोर्ट कार्ड
जलप्लावित आधा दर्जन से अधिक गांवों की समस्या का हुआ निराकरण
प्रयागराज सीमा पर स्थित गांवों में समान रूप से विकास कार्य होना चुनौती
जागरण संवाददाता, कौशांबी। सपा के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचीं पूजा पाल अब भाजपा का चेहरा हैं, लेकिन राजनीतिक पारी बदलने से चायल की जमीनी तस्वीर नहीं बदली। कार्यकाल में रेलवे ओवरब्रिज, महिला महाविद्यालय, फोरलेन सड़क समेत कई विकास परियोजनाएं आगे बढ़ीं, मगर हर साल बाढ़ का दंश झेलने वाले गांव आज भी स्थायी समाधान का इंतजार कर रहे हैं। प्रयागराज-कौशांबी की प्रशासनिक विसंगतियों में उलझे कई गांव विकास की मुख्यधारा से अब भी कटे हैं।
बिजली-पानी सड़क जैसी बुनियादी समस्याएं
सड़क, जलनिकासी, पेयजल और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं अनेक इलाकों में चुनौती बनी हुई हैं। ससुर खदेरी नदी किनारे बढ़ता अतिक्रमण और अवैध प्लाटिंग भी प्रशासनिक दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। विकास की रफ्तार दिखती जरूर है, लेकिन उसका लाभ पूरे विधानसभा क्षेत्र तक समान रूप से नहीं पहुंच पाया। चायल में सबसे बड़ी चुनौती अब अधूरे विकास को पूरा कर आखिरी गांव तक उसका लाभ पहुंचाने की है।
चायल विधानसभा एक नजर में
कुल मतदाता: 401611
पुरुष मतदाता: 213380
महिला मतदाता: 188230
अन्य मतदाता: 01
काम हुए, बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं
चायल विधानसभा में बीते चार वर्षों के दौरान विकास कार्यों की गति बढ़ी है, लेकिन क्षेत्र की कई बुनियादी समस्याएं अब भी समाधान की प्रतीक्षा में हैं। सैयदसरावां में रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण, मोहिद्दीनपुर गौस में 13.40 करोड़ रुपये की लागत से राजकीय महिला महाविद्यालय का निर्माण, प्रयागराज सिविल एयरपोर्ट से कौशांबी ब्लाक स्थित उत्खनन क्षेत्र तक फोरलेन सड़क, आलमचंद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का पूर्ण संचालन, विद्यालयों में 14 नए भवनों का निर्माण, नीवी शाना में बुद्ध विहार तथा उमरपुर नीवां में नर्मदेश्वर शिव मंदिर का जीर्णोद्धार प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हैं।
सड़कों के लिए 16.93 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए
इसके अलावा डेढ़ दर्जन से अधिक संपर्क मार्ग बनाए गए हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 58 सड़कों के निर्माण एवं मरम्मत के लिए लगभग 16.93 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। इसके बावजूद विधानसभा का एक बड़ा हिस्सा अब भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है।
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कई गांव सीमा विसंगति का भुगत रहे खामियाजा
चायल और नेवादा ब्लाक के कई गांव प्रशासनिक सीमाओं की विसंगतियों का खामियाजा भुगत रहे हैं। जलालपुर भारती, पंसारा, तारापुर, बसंतपुर, बिलासपुर, भोपतपुर, उमरपुर नीवां, यादवपुर, झपिया और छबीलेपुर जैसे गांव अलग-अलग थाना, ब्लाक और विधानसभा सीमाओं में बंटे होने के कारण विकास योजनाओं का पूरा लाभ नहीं पा सके हैं। उमरपुर नीवां प्रयागराज के शहर पश्चिमी विधानसभा में हैं, जबकि राजस्व गांव चायल ब्लाक में आता है। ऐसी स्थिति ने विकास कार्यों को प्रभावित किया है।
कई प्रमुख समस्याओं के समाधान की प्रतीक्षा
दूसरी ओर पिपरहटा, बेनपुर, श्यामपुर उर्फ मल्हीपुर, डेरा और कटैया सहित आधा दर्जन से अधिक गांव हर वर्ष बाढ़ और जलप्लावन की समस्या झेलते हैं, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल सका है। कई क्षेत्रों में जलनिकासी, पेयजल, सड़क और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं आज भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। ससुर खदेरी नदी किनारे बढ़ता अवैध अतिक्रमण और प्लाटिंग भी चिंता का विषय है। विधायक पूजा पाल की विधानसभा में उपस्थिति लगभग 75 प्रतिशत रही है। उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, बिजली, जीरो टॉलरेंस और बालू माफिया जैसे मुद्दों को सदन में प्रमुखता से उठाया, लेकिन क्षेत्र की कई प्रमुख समस्याएं अब भी समाधान की प्रतीक्षा में हैं।

क्या कहती हैं चायल विधायक पूजा पाल?
शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, सड़क, पेयजल, जलनिकासी समेत विकास के कार्य पूरे विधानसभा क्षेत्र में कराए गए हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सड़कों के निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग को 276 करोड़ रुपये की कार्ययोजना भेजी जा चुकी है। मुख्यमंत्री के अनुमोदन पर पुरखास से नंदा का पुरवा मार्ग पर यमुना नदी पर पुल निर्माण के लिए प्रस्ताव जा चुका है। इस पुल के बन जाने से जलप्लावन प्रभावित गांवों के लोगों को आवागमन में बहुत सुविधा होगी। मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से असाध्य व गंभीर रोग से पीड़ितों के इलाज के लिए 10 करोड़ 33 लाख 34 हजार रुपये मुहैया कराया गया। जो कार्य अधूरे रह गए हैं, उसे भी प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जा रहा है।
- पूजा पाल, विधायक चायल।

उप विजेता कांग्रेस के तलत अजीम ने गिनाईं कमियां
विधानसभा चुनाव के बाद चार साल तक चायल विधायक ने किसी गांव में अपना चेहरा तक नहीं दिखाया था। अब भाजपा में शामिल होने के बाद लोगों के बीच आने लगी हैं। विकास की बात करें तो नाली खड़ंजा के अलावा विधानसभा में शिक्षा अथवा युवाओं के भविष्य और उनके रोजगार को लेकर कोई कार्य इन चार सालों में नहीं हुए हैं।
- तलत अजीम, उप विजेता, पूर्व जिलाध्यक्ष कांग्रेस।
लोग क्या कहते हैं?

चायल विधायक द्वारा विकास संबंधी बहुत सारे कार्य कराए गए हैं। भारतीय जनता पार्टी में अब नया पद मिलने के बाद उन्हें मजबूती मिली है। इससे उम्मीद जगी है कि चायल में विकास तेजी के साथ होगा।
- अंकित सोनी।

चायल विधायक ने विकास तो क्या है, लेकिन अब उन्हें भाजपा में प्रदेश उपाध्यक्ष का पद मिल गया है। कई कार्य अधूरे हैं। उसे पूरा कराने की जिम्मेदारी है। प्रयागराज-कौशांबी फोरलेन से बल्हेपुर मार्ग तक करीब दो सौ मीटर रोड बनवाने की मांग कसेंदा गांव के लिए की गई थी, जो अभी तक पूरा नहीं हुआ है।
- जैश यादव।
चायल विधायक सिर्फ चुनाव प्रचार के समय गांव आईं थीं। उसके बाद से गांव नहीं आई हैं। गांव में विधायक निधि से कार्य नहीं हुए। जवई गांव का निरीक्षण कर लिया जाए तो यहां की बदहाली के बारे में पता चल जाएगा। इस गांव विकास की बेहद जरूरत है।
- अमीर बहादुर।
विधायक का कार्य औसत रहा है। कुछ बड़े विकास कार्य नहीं हुए। शिक्षा समेत जलप्लावन प्रभावित क्षेत्रों के विकास को लेकर कुछ बड़े कदम उठाए जाने की आस अधिकांश लोगों को है।
- सुधीर कुमार।
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