कौशांबी में ऑनलाइन गेमिंग को लेकर परिजनों ने किशोर को डांट लगाई, क्षुब्ध होकर फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली
कौशांबी में ऑनलाइन गेम की लत के कारण आठवीं के छात्र ने परिजनों की डांट के बाद फांसी लगाकर आत्महत्या ...और पढ़ें

कौशांबी में परिजनों की डांट से क्षुब्ध होकर किशोर फंदे पर झूल गया।
HighLights
नगर पालिका मंझनपुर क्षेत्र की घटना, ऑनलाइन गेम में रुपये हार चुका था
ऑनलाइन गेम खेलने की ऐसी लत लगी कि पढ़ाई प्रभावित होने लगी थी
जागरण संवाददाता, कौशांबी। मोबाइल पर आनलाइन गेम खेलने की लत एक परिवार की खुशियां निगल गई। गेम में रुपये हारने और पढ़ाई से लगातार दूरी बढ़ने के बीच आठवीं के छात्र ने फंदे से लटककर जिंदगी खत्म कर ली। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
नगर पालिका परिषद मंझनपुर क्षेत्र के एक व्यक्ति के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी पत्नी पर आ गई थी। पत्नी, छोटी बेटी, दामाद और 14 वर्षीय इकलौता बेटा घर के एक हिस्से में रहती हैं। बाकी पूरे घर में किराएदार हैं।
परिवार के लोगों के मुताबिक किशोर कक्षा आठ में पढ़ता था। पिछले कुछ समय से उसे मोबाइल पर ऑनलाइन गेम खेलने की ऐसी लत लगी कि उसकी पढ़ाई प्रभावित होने लगी थी। गेम में रुपये हारने की बात भी सामने आई है। इसे लेकर स्वजन उसे अक्सर समझाते थे।
शनिवार शाम मोबाइल पर गेम खेलने को लेकर परिवारवालों ने किशोर को डांट दिया। इसके बाद वह अपने कमरे में चला गया। कुछ देर तक कमरे से बाहर नहीं आया तो स्वजन उसे देखने पहुंचे। कमरे की स्थिति देखकर उनकी चीख निकल गई। आसपास के लोग भी मौके पर पहुंचे। कमरे में उसका शव फंदे से लटका था। पुलिस ने छानबीन के बाद शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
मंझनपुर कोतवाली इंस्पेक्टर विनीत सिंह ने बताया कि प्रारंभिक पूछताछ में ऑनलाइन गेम खेलने की बात सामने आई है। गेम में रुपये हारने को लेकर परिवार में विवाद होने की जानकारी भी मिली है। फिलहाल स्वजन की ओर से किसी पर कोई आरोप नहीं लगाया गया है। मामले की जांच की जा रही है।
रामेश्वर की घटना ने बच्चों में बढ़ती ऑनलाइन गेमिंग की लत को लेकर परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। मोबाइल पर घंटों गेम खेलने से न केवल बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, बल्कि कई मामलों में वह आर्थिक नुकसान और मानसिक दबाव का भी सामना कर रहे हैं। अभिभावकों को बच्चों की आनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने और समय रहते उनसे संवाद करने की जरूरत है।
- डॉ. मालविका पांडेय, मनोरोग विशेषज्ञ मेडिकल कॉलेज।
