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    महंगाई ने बिगाड़ा रसोई का बजट, एक सप्ताह में 15 रुपये लीटर तक बढ़ी खाद्य तेलों की कीमत

    Updated: Fri, 29 May 2026 03:21 PM (GMT+05:30)

    वैश्विक तनाव और बढ़ते परिवहन भाड़े के चलते कुशीनगर में खाद्य तेलों की कीमतों में उछाल आया है। एक सप्ताह में सरसों तेल सहित अन्य खाद्य तेलों के दाम 15 ...और पढ़ें

    प्रतीकात्मक तस्वीर

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    ‎जागरण संवाददाता, कुशीनगर। वैश्विक तनाव का असर अब खाद्य तेलों की कीमतों पर भी दिखाई देने लगा है। डीजल-पेट्रोल के बाद सरसों तेल समेत अन्य खाद्य तेलों के दाम बढ़ गए हैं। बढ़ती कीमतों से गृहणियों की रसोई का बजट प्रभावित हो रहा है तथा लोगों को खर्च में कटौती करनी पड़ रही है।

    ‎बाजार में अभी तक 175 रुपये प्रति लीटर बिकने वाला कंपनी पैक्ड सरसों तेल 185 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। पिछले सप्ताह की तुलना में खाद्य तेलों की कीमतों में 15 रुपये प्रति लीटर तक की वृद्धि दर्ज की गई है। तेल के दाम बढ़ने से आम परिवारों की मासिक रसोई लागत बढ़ गई है।

    ‎व्यापारियों के अनुसार परिवहन भाड़े में वृद्धि का असर खाद्य तेलों के दाम पर पड़ा है। व्यापारी संदेश गुप्ता ने बताया कि रिफाइंड तेल 130 रुपये से बढ़कर 140 रुपये प्रति लीटर तथा तिल का तेल 150 रुपये से बढ़कर 165 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। उनका कहना है कि लागत बढ़ने के कारण बाजार में कीमतों पर दबाव बना हुआ है।

    ‎खाद्य तेल महंगे होने के बाद गृहणियां अब तेल के उपयोग में किफायत बरतने लगी हैं। लोगों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो अन्य खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।

    बोलीं गृहणियां

    • उषा सिंह ने कहा कि खाद्य तेलों की महंगाई का सीधा असर रसोई पर पड़ा है। तेल महंगा होने से मध्यम व गरीब वर्ग के परिवारों की भोजन थाली महंगी हो गई है।
    • मंजू पटेल ने बताया कि रसोई का बजट संतुलित रखने के लिए कम तेल का उपयोग करना पड़ रहा है। सूखी सब्जियां व उबले भोजन का प्रयोग बढ़ गया है। आगे अन्य वस्तुओं के महंगे होने की भी आशंका है।
    • सुमित्रा देवी ने कहा कि गैस की समस्या के बीच अब खाद्य तेलों की बढ़ी कीमतों ने परेशानी और बढ़ा दी है। इसका असर परिवार की दैनिक दिनचर्या पर पड़ रहा है।
    • पुष्पा देवी ने कहा कि वैश्विक संघर्ष के कारण पहले पेट्रोलियम पदार्थ महंगे हुए, अब सरसों तेल समेत अन्य खाद्य तेलों की कीमतें बढ़ने से रसोई चलाना कठिन होता जा रहा है।

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