कुशीनगर: सिधरिया ड्रेन में डूबीं तीन मासूम बहनें, 12 घंटे बाद मिले शव; गांव में मचा कोहराम
कुशीनगर के दुबौली गांव में सिधरिया ड्रेन में डूबने से एक ही परिवार की तीन मासूम बच्चियों की मौत हो गई। करीब 12 घंटे के तलाशी अभियान के बाद ग्रामीणों न ...और पढ़ें

बाएं से सपना, छोटी उर्फ शिवानी और कुंजन की फाइल फोटो। जागरण
HighLights
कुशीनगर में सिधरिया ड्रेन में तीन बच्चियां डूबीं।
12 घंटे के तलाशी अभियान के बाद शव बरामद हुए।
हादसे से दुबौली गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
जागरण संवाददाता, कुशीनगर। हुआ वही जिसकी आशंका थी। जिंदा बचने की शुक्रवार को रात भर पानी की लहरों संग स्वजन व ग्रामीणों की तैरती उम्मीदों ने दर्द भरा विराम लिया और शुक्रवार की शाम घास काट कर लौट रहीं पानी में डूबी तीनों बहनों का शव मिला।
घटना नेबुआ नौरंगिया थाना के दुबौली गांव की थी, लेकिन गम के इस बोझ से पूरा जवार ही मातम डूब गया। लगातार 12 घंटे चली तलाश के दौरान गम का जो बादल छाया रहा वह भयानक दर्द भरी चीख-पुकार के साथ फटा तो लोग सिहर उठे।
यह है पूरी घटना
हर रोज़ की तरह बीते शुक्रवार की शाम भी तीन मासूम बच्चियां हंसती-खिलखिलाती, खेतों से घास का गट्ठर सिर पर उठाए अपने घर की ओर लौट रही थीं। उनकी आंखों में शाम का नाश्ता और छोटी-छोटी खुशियां थीं।
किसे मालूम था कि सिधरिया ड्रेन की वह छोटी सी पुलिया उनके जीवन का आखिरी पड़ाव बन जाएगी। एक पल का संतुलन बिगड़ा, और पलक झपकते ही तीन घर के चिराग एक साथ बुझ गए।
हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि शंभू का दस साल का बेटा कलुआ अपनी आंखों के सामने अपनी बहनों दस वर्षीय सपना, आठ वर्षीय छोटी और चचेरी बहन 12 वर्षीय कुंचन को पानी के तेज बहाव में समाते देखता रह गया। बेबस चीखता रहा, रोता रहा। पानी का बहाव इतना तेज था कि वह कुछ न कर सका।
खबरें और भी
कांपते पैरों से जब वह दौड़कर गांव पहुंचा और हांफते हुए बोला, दीदी पानी में गिर गईं, बह गईं...तो पूरे दुबौली गांव का दिल दहल उठा। खबर मिलते ही पूरा गांव सिधरिया ड्रेन के किनारे उमड़ पड़ा। शुक्रवार की पूरी रात गांव के किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला।
पानी का शोर बहुत तेज़ था, लेकिन उससे भी तेज़ स्वजन का रोना और उनकी चीखें थीं, जो रातभर पूरे इलाके में गूंजती रहीं। प्रशासनिक अधिकारी, एनडीआरएफ की टीमें देर रात तक ड्रेन के उफान मारते पानी में उतरीं, लेकिन रात एक बजे तक निराशा ही हाथ लगी।
हर गुजरते मिनट के साथ उम्मीद की लौ मद्धिम पड़ती जा रही थी, लेकिन स्वजन की आंखें ड्रेन के काले पानी को निहारती रहीं। शनिवार की सुबह जब सरकारी टीमें पहुंचने में देर कर रही थीं, तब ग्रामीणों का सब्र टूट गया। बेटियों के प्रति गांव के गहरे लगाव और गम ने उन्हें ड्रेन के गहरे और खतरनाक पानी में उतरने का हौसला दिया।
दर्जनों ग्रामीण बिना किसी सुरक्षा उपकरण के, सिर्फ अपनों को ढूंढ निकालने की तड़प में ड्रेन में उतर गए। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद, एक-एक करके जब तीनों बहनों के बेजान शरीर पानी से बाहर निकाले गए, तो वहां मौजूद हर शख्स का कलेजा मुंह को आ गया।
शंभू और रंजीत के आंगन में छा गया सन्नाटा
शंभू की दो बेटियां (सपना व छोटी) और उनके भाई रंजीत की इकलौती लाडली कुंचन के शव जब एक साथ गांव पहुंचे, तो कोहराम मच गया। मां-बाप पछाड़ खाकर गिर रहे थे। जिस आंगन में कल शाम तक बेटियों की पायलों की छनक और हंसी गूंजती थी, वहां अब सिर्फ सन्नाटा और चीत्कार था।
एक साथ तीन बेटियों को खोने का यह दर्द सिर्फ शंभू या रंजीत के परिवार का नहीं, बल्कि पूरे इलाके का बन चुका है। सिधरिया ड्रेन की पुलिया पर आज भी घास का वह बिखरा हुआ गट्ठर और मासूमों की चप्पलें पड़ी हैं, जो चीख-चीखकर उस मंजर की गवाही दे रही हैं, जिसने एक पूरे हंसते-खेलते गांव की खुशियां हमेशा के लिए निगल लीं।
पीड़ित परिवारों को दी जाएगी अहेतुक सहायता राशि। इसको लेकर रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। शीघ्र ही मदद देने का कार्य किया जाएगा। अन्य अनुमन्य लाभ भी दिए जाएंगे। बहुत बड़ी व दुखद घटना है।
-महेंद्र सिंह तंवर, डीएम
जब कुआं में गिरने से हुई 13 मौतें
बीते 17 फरवरी 2022 को नेबुआ नौरंगिया थाना के गांव नौरंगिया के स्कूल टोला में हुए एक हादसे में कुआं में गिरने से दस बालिकाओं व तीन महिलाओं की डूबने से मौत हो गई।हादसा तब हुआ थ जब हल्दी कार्यक्रम पूजन के दौरान कुआं पर रखा जर्जर स्लैब टूट गया था। तीन बहनों के डूबने से हुई मौत की घटना ने इस पुराने हादसे की यादें ताजा कर दी हैं।
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