UP में हरी सब्जियों के दाम बढ़े, महंगाई की मार से थाली हुई खाली
उत्तर प्रदेश में हरी सब्जियों के दाम में 40-50% की वृद्धि हुई है, जिससे मध्यम वर्गीय परिवारों की थाली से हरी सब्जियां दूर हो रही हैं। बारिश के कारण खे ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
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हरी सब्जियों के दाम में 40-50% की वृद्धि।
बारिश के कारण खेतों में पानी, आवक हुई कम।
मध्यम वर्गीय परिवारों की रसोई का बजट बिगड़ा।
जागरण संवाददाता, कसया (कुशीनगर)। हरी सब्जी के दाम में वृद्धि हुई है। इससे लोगों की थाली से हरी सब्जियां दूर होती जा रही हैं। एक सप्ताह में कई सब्जियों के दामों में 40 से 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। सबसे अधिक असर हरी सब्जियों पर पड़ा है। सब्जी विक्रेता महंगाई का कारण बारिश के चलते खेतों में लगे पानी के चलते कम आवक बता रहे हैं।
इसका थोक के साथ ही खुदरा बाजार पर भी असर पड़ा है। बढ़ती महंगाई में मध्यम वर्गीय लोग अब एक-एक किलो सब्जी खरीदने के बजाय 250 से 500 से ही काम चलाने को मजबूर हैं। खरीदारी से पहले जेब टटोलनी पड़ रही है। बातचीत में इसको लेकर लोगों ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अपनी परेशानी बताई।

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पिछले दस दिनों में सब्जियों के दाम दो से तीन गुना तक पहुंच गया है। इससे आमजन की थाली से हरी सब्जियां दूर हो गई हैं। रसोई की बजट पर भी असर पड़ा है। एक तो पहले से ही महंगाई की मार गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार झेल रहा है। महंगाई पर रोक लगनी चाहिए। -स्मृति सिंह, गृहिणी
महंगाई की वजह से हरी सब्जी की खरीदारी सीमित करनी पड़ रही है। जितने पैसे में पहले दो से तीन सब्जियां मिल जाती थीं अब एक खरीदने के लिए सोचना पड़ रहा है। आलू को छोड़ दें तो कोई सब्जी 40 रुपये प्रति किग्रा से कम है ही नहीं। सरकार को बढ़ती महंगाई पर रोक लगानी चाहिए। -प्रियंका देवी, गृहिणी
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बरसात के चलते खेतों में पानी लगने के कारण बाजार में हरी सब्जियों की आवक कम हो गई है। बढ़ती महंगाई का यह मुख्य कारण है। जो सब्जियां 15 से 20 रुपये प्रति किग्रा तक पहुंच गई हैं। इससे बिक्री पर भी प्रभाव पड़ा है। -मनोज गुप्ता, दुकानदार
हरी सब्जियों के दामों में 40 से 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। जब तक बाहर से सब्जियां नहीं आएंगी तब तक महंगाई कम नहीं होगी। थोक से लेकर खुदरा विक्रेता महंगाई के चलते परेशान हैं। सीमित मात्रा में ही सब्जियों को मंगाया जा रहा है। -रामप्रवेश मद्धेशिया, दुकानदार