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सीएम युवा उद्यमी योजना: पांच लाख से कारोबार शुरू कर आत्मनिर्भर बने सार्थक, दो युवाओं को दिया रोजगार

Published: Wed, 02 Sep 2026 10:33 PM (IST)

लखीमपुर खीरी के सार्थक अरोड़ा ने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत 5 लाख रुपये की मदद से अपना व्यवसाय शुरू किया।

आइस पाप्स की बिक्री करता युवक। जागरण

आइस पाप्स की बिक्री करता युवक। जागरण

HighLights

  1. सार्थक अरोड़ा ने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना से व्यवसाय शुरू किया।

  2. पांच लाख की परियोजना से 'बिजनेस ऑन व्हील्स' मॉडल अपनाया।

  3. स्वरोजगार के साथ दो अन्य लोगों को भी रोजगार प्रदान किया।

जागरण संवाददाता, लखीमपुर। नौकरी की तलाश के बजाय अपना कारोबार खड़ा करने का सपना हो और पूंजी की कमी आड़े आए तो सरकारी योजनाएं युवाओं के लिए नई राह खोल सकती हैं। बाजपेई कालोनी निवासी सार्थक अरोड़ा की कहानी इसका उदाहरण है।

मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत पांच लाख रुपये की परियोजना से उन्होंने आइस पॉप्स- बचपन की चुस्की की फ्रेंचाइजी लेकर अपना व्यवसाय शुरू किया।

खास बात यह है कि सार्थक का कारोबार किसी दुकान तक सीमित नहीं है। उन्होंने बिजनेस ऑन व्हील्स मॉडल अपनाकर आइसक्रीम और अन्य खाद्य उत्पादों को पहियों पर ग्राहकों तक पहुंचाने का काम शुरू किया है।

राजीव अरोड़ा के पुत्र सार्थक अरोड़ा कारोबार शुरू करने के लिए पूंजी जुटाने में असमर्थ थे। ऐसे में मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान उनके लिए मददगार बना।

जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र ने योजना के तहत उद्यम स्थापित करने में जरूरी मार्गदर्शन दिया। वहीं इंडियन बैंक, लखीमपुर ने वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराया। विभाग और बैंक के समन्वय से सार्थक के कारोबारी विचार को धरातल पर उतारने का रास्ता साफ हुआ।

सार्थक ने परंपरागत दुकान खोलने के बजाय चलायमान वाहन को कारोबार का माध्यम बनाया। ‘बचपन की चुस्की’ नाम से तैयार यह वाहन शहर और आसपास के अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचकर ग्राहकों को आइसक्रीम समेत अन्य खाद्य उत्पाद उपलब्ध करा रहा है। इससे कारोबार को एक स्थान तक सीमित रखने के बजाय मांग के अनुसार अलग-अलग स्थानों तक पहुंचने की सुविधा मिल रही है।

सार्थक की पहल की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि सरकारी मदद से शुरू हुआ उनका उद्यम केवल उनके स्वरोजगार तक सीमित नहीं रहा। उनके ‘बिजनेस आन व्हील्स’ से दो अन्य लोगों को भी रोजगार मिला है। यानी पांच लाख रुपये की परियोजना ने एक युवा को आत्मनिर्भर बनाने के साथ दो और परिवारों के लिए रोजगार का जरिया तैयार कर दिया।

सार्थक की पहल यह संदेश देती है कि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग कर युवा नौकरी मांगने के बजाय रोजगार देने वाले बन सकते हैं। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान से मिला सहयोग उनके लिए कारोबार की शुरुआत भर नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ता कदम साबित हो रहा है।

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