पर्वतारोही पद्मश्री अरुणिमा सिन्हा को बड़ी राहत, लखनऊ कोर्ट ने धोखाधड़ी का वाद किया खारिज
पर्वतारोही पद्मश्री अरुणिमा सिन्हा के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला लखनऊ कोर्ट ने खारिज कर दिया है। ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ।

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विधि संवाददाता, लखनऊ। पर्वतारोही व पद्मश्री अरुणिमा सिन्हा के विरुद्ध धोखाधड़ी के आरोपों में दायर परिवाद को न्यायिक मजिस्ट्रेट शैलेश कुमार सिंह ने निरस्त कर दिया।
न्यायालय ने परिवाद को निरस्त करते हुए बताया कि परिवादी ओम प्रकाश द्वारा प्रस्तुत किए गए तथ्यों और पत्रावली पर उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर आरोपित महिला के विरुद्ध कार्यवाही करने का पर्याप्त आधार नहीं है।
मामले में परिवादी ओम प्रकाश ने न्यायालय के समक्ष रिपोर्ट दर्ज करने की मांग को लेकर प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया था कि वर्ष 2015 में उसने विपक्षी अरुणिमा के साथ मिलकर साझेदारी में एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का गठन किया था।
शर्तों के अनुसार कंपनी के बैंक खाते के संचालन का अधिकार अरुणिमा सिन्हा को दिया गया था। आरोप था कि उन्होंने बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से बिना परिवादी की जानकारी के उसके फर्जी हस्ताक्षर बनाकर कंपनी के खाते से 75 लाख रुपये निकाल लिए।
न्यायालय ने रिपोर्ट दर्ज करने की मांग वाली इस अर्जी को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश देते हुए वादी को अपना बयान दर्ज कराने का आदेश दिया था। न्यायालय के आदेश के बाद परिवादी ने अपना बयान दर्ज कराया तथा अन्य सबूत कोर्ट में दाखिल किए।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने वाद को खारिज करते हुए कहा कि परिवादी के ही बयान और अभिलेखों से स्पष्ट है कि कंपनी के बोर्ड के निर्णय के बाद खाते के संचालन के लिए अरुणिमा सिन्हा को एकल हस्ताक्षर का अधिकार दिया गया था।
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ऐसे में खाते से धन निकासी का अधिकार भी उनके ही पास था। परिवादी के आरोप प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्यों से पुष्ट नहीं होते, इसलिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 203 के तहत परिवाद निरस्त किया जाता है।
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