सीएजी रिपोर्ट: यूपी में सड़क निर्माण में 1.44 करोड़ का अतिरिक्त खर्च, 6.83 करोड़ की स्टांप शुल्क चोरी उजागर
सीएजी की रिपोर्ट में चंदौली में सड़क निर्माण में यातायात भार की गलत गणना से 1.44 करोड़ रुपये का अनावश्यक खर्च सामने आया है। ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
चंदौली सड़क निर्माण में 1.44 करोड़ का अनावश्यक खर्च।
यातायात भार की गलत गणना से बढ़ी लागत।
जमीन खरीद-बिक्री में 6.83 करोड़ की स्टांप चोरी।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। सीएजी ने चंदौली जिले में सड़क निर्माण की एक परियोजना के लिए यातायात भार की गलत गणना किए जाने से लोक निर्माण विभाग द्वारा 1.44 करोड़ रुपये अनावश्यक खर्च किए जाने का मामला उजागर किया है।
गलत गणना की वजह से डामर-कंक्रीट की पांच मिमी अधिक मोटी लेयर डाली गई थी। जिससे सड़क के निर्माण में 1.44 करोड़ रुपये अधिक खर्च हुए। पीडब्ल्यूडी की दलीलों को खारिज करते हुए सीएजी ने इस गैर जरूरी खर्च माना है।
वर्ष 2016 में चंदौली जिले में चहनिया-धानापुुर-महुजी-जमानिया मार्ग के चौड़ीकरण के लिए 75.59 करोड़ रुपये की प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति दी गई थी।
अधीक्षण अभियंता वाराणसी वृत्त ने इस सड़क के लिए विभागीय दर से 4.25 प्रतिशत अधिक दर पर काम करने के लिए ठेकेदार से अनुबंध किया गया। सिंतबर 2016 में शुरू होकर जून 2018 में इस सड़क काम शुरू हुआ। इस काम का भुगतान 2019 में किया गया।
इस सड़क के निर्माण के लिए औसतन 330 वाहनों की प्रारंभिक यातायात गणना की गई थी। बाद में इसे 614 कर दिया गया, जो कि इंडियन रोड कांग्रेस के प्रविधानों के अनुसार नहीं है। ऑडिट में पाया गया कि यातायात भार सर्वे में तय मानकों का पालन नहीं किया गया। जिसकी वजह से पांच मिली अधिक मोटी डामर-कंक्रीट की लेयर डाली गई। जिसकी वजह से इस सड़क के निर्माण की लागत बढ़ी।
जमीन का गलत विवरण देकर 6.83 करोड़ स्टांप शुल्क की चोरी
सीएजी जांच में जमीनों के क्रय-विक्रय में 6.83 करोड़ रुपये की स्टांप शुल्क की चोरी भी उजागर हुई है। 36 उप-निबंधक कार्यालयों की जांच में सीएजी ने पाया कि कई जमीनों को सड़क एवं आबादी के 200 मीटर के दायरे में होने के बावजूद कृषि कार्य का उद्देश्य बताकर खरीदा गया।
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नियमानुसार भूमि संपत्ति के मूल्यांकन के लिए इसे प्रभावित करने वाले कारकों जैसे जमीन की प्रकृति, निर्माण एवं सड़क से दूरी की सही रिपोर्ट देनी चाहिए। एक ही गाटा संख्या में अलग-अलग दर यानी आवासीय एवं कृषि दर पर शुल्क लगाकर अनियमितता बरती गई।
संपत्ति का बाजार मूल्य तय करने का अधिकार जिलाधिकारी के पास होता है लेकिन सीएजी रिपोर्ट बताती है कि जमीनों की खरीद फरोख्त में नियम विरुद्ध तरीके से स्टांप शुल्क की चोरी की गई।
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