हीट वेव से हाई बीपी और डायबिटीज के मरीजों में हाइपोटेंशन का खतरा, ऐसे करें पहचान और बचाव
भीषण गर्मी और हीटवेव के कारण हाई बीपी और डायबिटीज के मरीजों में लो ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ गया है। विशेषज्ञों ने डिहाइड्रेशन से बचने और उचित सावधानी ब ...और पढ़ें
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HighLights
तापमान में वृद्धि के साथ ओपीडी में बढ़ी लो ब्लड प्रेशर रोगियों की संख्या
ओपीडी में प्रत्येक 100 में से 30-35 मरीज हाइपोटेंशन के पहुंच रहे
जागरण संवाददाता, लखनऊ। उत्तर भारत समेत पूरे प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से भीषण गर्मी एवं हीट वेव का दौर जारी है। लखनऊ के साथ कई जिलों में दिन का तापमान 42 से 47 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। आसमान से बरसती आग ने गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खासतौर पर हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) और डायबिटीज के रोगियों में इन दिनों हाइपोटेंशन (लो ब्लड प्रेशर) की परेशानी देखी जा रही है।
लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में कार्डियोलाजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. भुवन चंद्र तिवारी के अनुसार, हाइपरटेंशन के मरीजों, विशेषकर डाययूरेटिक (पेशाब बढ़ाने वाली) दवाएं लेने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधान रहने की जरूरत है। दरअसल, गर्मी में शरीर से अत्यधिक पानी और नमक की कमी (डिहाइड्रेशन) हो जाती है, जिससे ब्लड प्रेशर अचानक कम (हाइपोटेंशन) हो सकता है और गंभीर स्थिति में हीट स्ट्रोक और हार्ट अटैक का खतरा कई गुणा बढ़ता है।
प्रो. भुवन चंद्र तिवारी का कहना है कि डाययूरेटिक दवाएं शरीर से अतिरिक्त पानी और सोडियम को बाहर निकालती हैं। अधिक तापमान बढ़ने पर पसीने के कारण पहले ही शरीर से पानी की कमी हो जाती है। ऐसे में डिहाइड्रेशन दवा के प्रभाव से बीपी तेजी से गिर सकती है। हाई ब्लड प्रेशर के ऐसे मरीज जो डाययूरेटिक दवाएं ले रहे हैं उन्हें एक बार अपने डाक्टर से जरूर सलाह लेनी चाहिए।
इन्हें है हाइपोटेंशन का अधिक जोखिम
प्रो. भुवन चद्र तिवारी ने बताया कि हाइपोटेंशन का खतरा मुख्य रूप से 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, मधुमेह, हृदय रोग या पार्किंसन जैसी न्यूरो संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को अधिक होता है। इसके अलावा, डिहाइड्रेशन, भारी खून की कमी या बीपी कम करने वाली दवाओं का सेवन करने वालों में भी इसका जोखिम ज्यादा है। ऐसे में जो लोग लंबे समय से बीपी, शुगर की दवा ले रहे हैं, उन्हें एक बार अपने डाक्टर से जरूर मिलना चाहिए।
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हीट वेव में क्यों होता है हाइपोटेंशन का खतरा?
प्रो. भुवन चंद्र तिवारी के मुताबिक, तेज गर्मी में शरीर को ठंडा रखने के लिए रक्त वाहिकाएं फैल जाती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर गिर सकता है। साथ ही अत्यधिक पसीना आने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है, जो हाइपोटेंशन का मुख्य कारण बनती है। अत्यधिक गर्मी शरीर के कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम पर दबाव डालती है और डिहाइड्रेशन, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन तथा रक्तचाप में उतार-चढ़ाव पैदा करती है। चक्कर, कमजोरी और बेहोशी जैसे लक्षण तेजी से उभरते हैं। यह बात कई शोध में सामने आ चुकी है कि हीट वेव के दौरान रक्तचाप में असामान्य उतार-चढ़ाव देखा जाता है, जिससे बुजुर्ग और क्रानिक मरीज अधिक प्रभावित होते हैं।
डायबिटीज मरीजों के लिए क्यों खतरनाक है लू?
लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में जनरल मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष एवं सीएमएस प्रो. विक्रम सिंह का कहना है कि डायबिटीज मरीजों के लिए लू बहुत खतरनाक है क्योंकि यह शरीर को तेजी से डिहाइड्रेट करती है, जिससे ब्लड शुगर का स्तर अनियंत्रित हो सकता है। डायबिटीज में हाई ब्लड शुगर के कारण पेशाब ज्यादा होती है, जिससे शरीर में पानी की कमी हो सकती है। गर्मी इसे और गंभीर बना देती है। गर्मी के कारण इंसुलिन की आवश्यकता बदल सकती है। नसों और पसीने की ग्रंथियों को नुकसान पहुंचने से शरीर को ठंडा रखने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे हीट स्ट्रोक और हार्ट फेल्योर का जोखिम बढ़ता है। ऐसे मौसम में सुबह धूप निकलने से पहले टहलने जाएं और मौसमी फल एवं हरी सब्जियों का खूब सेवन करें।
हाइपोटेंशन के प्रमुख लक्षण
बार-बार चक्कर आना या सिर हल्का लगना
कमजोरी और थकान महसूस होना
धुंधला या काला-काला दिखना
मतली (उल्टी जैसा महसूस होना)
ठंडी, चिपचिपी त्वचा
तेज या कमजोर नाड़ी
अचानक बेहोशी
ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई
सांस लेने में परेशानी
सीने में दर्द
बचाव के उपाय
पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ लें
नमक का संतुलित सेवन
देर तक बैठने पर अचानक खड़े होने से बचें
दोपहर 12 से चार बजे तक धूप में निकलने से परहेज करें
हल्का और संतुलित भोजन
ब्लड प्रेशर की नियमित जांच
पर्याप्त नींद लें और योग-प्रणायाम करें
अधिक शराब और कैफीन से बचें, क्योंकि ये शरीर को डिहाइड्रेट कर सकते हैं