IAS से इस्तीफा देने वाल रिंकू सिंह राही मुख्य धारा में लौटे, अब जालौन के ज्वाइंट मजिस्ट्रेट, उत्तर प्रदेश में 38 Officers Transferred
IAS Officer Rinku Singh Rahi: रिंकू सिंह राही को जालौन जिले में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के पद पर तैनाती दी गई है। ...और पढ़ें

यूपी कैडर के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही
HighLights
नौ महीने बाद रिंकू सिंह राही को मिली फील्ड की पोस्टिंग
‘बिना काम वेतन नहीं' के सिद्धांत पर दिया था आईएएस से इस्तीफा
डिजिटल डेस्क, लखनऊ। बिना काम के वेतन को नैतिक रूप से गलत बताकर भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) से इस्तीफा देने वाले अधिकारी रिंकू सिंह राही को योगी आदित्यनाथ सरकार ने मुख्यधारा में लौटा दिया है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने रविवार देर रात 38 आईएएस अफसरों का ट्रांसफर किया, इस ट्रांसफर लिस्ट में खुद्दार अफसर रिंकू सिंह राही का भी नाम है। रिंकू सिंह राही को जालौन जिले में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के पद पर तैनाती दी गई है।
शर्तों पर राष्ट्रपति के पास अपना इस्तीफा भेजने वाले 2022-23 बैच के यूपी कैडर के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही को नौ महीने बाद फील्ड में तैनाती मिली है। शाहजहांपुर में वकीलों के समक्ष कान पकड़कर उठक-बैठक करने के प्रकरण के बाद रिंकू सिंह राही को उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद में सदस्य रूप में तैनात किया गया था।
यहां पर कोई काम न मिलने पर का तर्क देकर बिना काम के वेतन को नैतिक रूप से गलत बताकर रिंकू सिंह राही ने सशर्त राष्ट्रपति के पास अपना इस्तीफा भेजा था। बताया जा रहा है कि उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देकर पीसीएस के अधिकारी के रूप में काम करने का शर्त रखी थी। उनकी इच्छा समाज कल्याण अधिकारी के रूप में कार्य करने की थी।
रिंकू सिंह राही को अब जालौन जिले में तैनाती मिली है। सदस्य राजस्व परिषद, उत्तर प्रदेश लखनऊ के पद से उनको ज्वाइंट मजिस्ट्रेट जालौन के पद पर भेजा गया है। ‘बिना काम वेतन नहीं' के सिद्धांत पर इस्तीफा देने और फिर वापसी के बाद मिली यह नई जिम्मेदारी, उनकी ईमानदारी और अटूट साहस की जीत मानी जा रही है।
खबरें और भी
अलीगढ़ निवासी 44 वर्षीय रिंकू सिंह पहले प्रांतीय सिविल सेवा (पीसीएस) अधिकारी थे। 2008-09 में मुजफ्फरनगर में जिला समाज कल्याण अधिकारी के पह पर तैनाती के दौरान स्कॉलरशिप और पेंशन घोटाले (लगभग 83-100 करोड़ रुपये) का खुलासा किया। इसके बाद माफिया ने उनके ऊपर हमला करवाया।
मार्च 2009 में हुए हमले में उनको सात गोली मारी गई, जिसके बाद उनकी एक आंख की रोशनी चली गई और वो लंबे समय अस्पताल में रहे। इसके बाद उन्होंने विकलांगता कोटा के अंतर्गत भारतीय प्रशासनिक सेवा की परीक्षा पास की और आईएएस अधिकारी बने। जुलाई 2025 में शाहजहांपुर के पुवायां में एसडीएम रूप में तैनाती मिली।
पहले दिन ही तहसील में सफाई और शौचालय की समस्या पर क्लर्क को उठक-बैठक कराई, वकीलों के विरोध पर खुद कान पकड़कर 5 उठक-बैठक कीं। उनका यह वीडियो वायरल हो गया। इसके बाद उन्हें राजस्व परिषद लखनऊ में अटैच कर दिया गया। लंबे समय तक कोई फील्ड पोस्टिंग या जिम्मेदारी नहीं मिली।
यह भी पढ़ें- खुद्दार IAS Officer रिंकू सिंह राही के इस्तीफा देने के बाद अगले कदम पर टिकीं लोगों की निगाहें
आईफोन कांड के बाद हटाए गए रमेश रंजन
फिरोजाबाद डीएम के पद पर तैनात रहे रमेश रंजन का भी तबादला किया गया है। रमेश रंजन को राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश, लखनऊ में अपर भूमि व्यवस्था आयुक्त, के पद पर भेजा गया है। रमेश रंजन का कार्यकाल विवादों के कारण भी सुर्खियों में रहा। हाल ही में तत्कालीन टूंडला तहसीलदार राखी शर्मा के आईफोन मांगने के गंभीर आरोपों ने रमेश रंजन को प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना दिया था।
यह भी पढ़ें- आईएएस की नौकरी से इस्तीफा देने वाले रिंकू सिंह के पिता सौदान सिंह राही बोले- हमारे पास बैंक बैलेंस नहीं, ईमान है
तहसीलदार ने शासन स्तर तक भेजी शिकायत में जमीन संबंधी मामलों, प्रशासनिक दबाव और कथित भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। इसी प्रकरण में महंगे आईफोन को लेकर भी चर्चाएं तेज थीं और मामला मीडिया की सुर्खियों में छाया रहा। इस दौरान जिले में स्मार्ट मीटर को लेकर जनता का जबरदस्त विरोध भी प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ था।