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    'करुणा होती तो बेटियों का दुष्कर्म नहीं होता', राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने महिला अपराधों पर जताई चिंता

    Updated: Thu, 09 Jul 2026 10:20 AM (IST)

    राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने बेटियों के खिलाफ अपराधों पर चिंता व्यक्त की और भाषा विश्वविद्यालय के दीक्षा समारोह में शिक्षा के वास्तविक उद्देश्य पर जोर दि ...और पढ़ें

    ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के दीक्षा समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल।

    ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के दीक्षा समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल।

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    जागरण संवाददाता, लखनऊ। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने समाज में बेटियों के विरुद्ध हो रहे अपराधों पर चिंता जताई। राजस्थान का जिक्र किए बिना हाल ही में वहां हुई 13 साल की बच्ची से दुष्कर्म की घटना याद दिलाई।

    कहा कि समाज में यदि करुणा होती तो बेटियों से दुष्कर्म नहीं होता। 13 वर्ष की बेटी से लोग चार दिनों तक दुष्कर्म करते रहे, लेकिन होटल मालिक ने अपना दायित्व नहीं निभाया। समाज ऐसी घटनाओं को रोकने का प्रयास नहीं करेगा तो कौन करेगा? इस उम्र की बच्चियों से अधिक बात कीजिए ताकि वे किसी गलत संगत में न फंसें।

    भाषा विश्वविद्यालय के दीक्षा समारोह में राज्यपाल ने कहा कि एक परिवार ने नवजात को झाड़ियों में फेंक दिया था। उसे सब्जी बेचने वाले ने अपनाया और पढ़ाया-लिखाया। आज वही बेटी आइएएस अधिकारी है।

    एक समाज वह (राजस्थान) है और एक समाज यह है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि ऐसे उत्तरदायी, संवेदनशील और संस्कारित नागरिक तैयार करना है जो समाज, राष्ट्र और मानवता के कल्याण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाए।

    आनंदीबेन ने कहा कि विगत एक वर्ष में विश्वविद्यालय द्वारा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न संस्थानों के साथ 71 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए हैं, लेकिन इनमें से कितने एमओयू की गतिविधियां हो रहीं, विद्यार्थी या शोधार्थी काम कर रहे, इन सबका विवरण दें।

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    समारोह के बाद राज्यपाल मां-बेटी सम्मेलन में शामिल हुईं। कहा कि आज के बदलते सामाजिक परिवेश में मां-बेटी के बीच खुला संवाद अत्यंत आवश्यक है। यह सम्मेलन इसी संवाद को प्रोत्साहित करता है, जिससे परिवार में विश्वास और अपनापन बढ़ता है और बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित होती हैं।

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    राज्यपाल ने तीन संकल्प लेने का किया आग्रह

    • अपनी भाषा और भारतीय भाषाओं का सम्मान एवं संवर्धन करें।
    • ज्ञान का उपयोग केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए करें।
    • जीवन में सत्य, संवेदना, करुणा और नैतिकता को सर्वोच्च स्थान दें।

    शिक्षा के बाद भी व्यक्ति बन सकता है याकूब मेमन : डॉ. सुधांशु

    मुख्य अतिथि भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं राज्यसभा सदस्य डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि शिक्षा प्राप्त करने के लिए विश्वविद्यालय की आवश्यकता होती है, जबकि दीक्षा संस्कारों से मिलती है और उसके लिए गुरु का मार्गदर्शन जरूरी होता है। शिक्षा के बाद भी व्यक्ति याकूब मेमन (मुंबई सीरियल बम धमाकों का मुख्य दोषी) बन सकता है। इसलिए शिक्षा ही नहीं, दीक्षा भी आवश्यक है।

    डॉ. सुधांशु ने युवाओं को आगाह करते हुए कहा कि प्रेम में ब्रेकअप नहीं होता। जहां ब्रेकअप होता है, वहां प्रेम नहीं होता। बेटियां इस संसार में संभल कर चलें, क्योंकि न जाने किस मोड़ पर रावण मिल जाए। बेटों को भी संभल कर चलना चाहिए, क्योंकि न जाने किस मोड़ पर शूर्पणखा मिल जाए।

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    उन्होंने कहा कि यह भी एक संयोग है कि भाषा विश्वविद्यालय उस नगर में स्थित है, जहां भाषा, तहजीब और अदब की परंपरा सबसे अधिक समृद्ध रही है। लखनऊ वह शहर है, जहां की रवायतें और नजाकतें केवल जीवनशैली नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक विरासत हैं।

    उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि डिग्री और पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों ने अधिक मेहनत की है, लेकिन अब उन्हें समाज के लिए रोल माडल बनना चाहिए। यह दीक्षांत है, शिक्षांत नहीं। सीखने की प्रक्रिया जीवनभर चलती रहती है। केवल भाषणों से नहीं, बल्कि आचरण से भी शिक्षा मिलती है।

    ...जब राज्यपाल बोलीं, बैठ जाओ नहीं तो कार्यक्रम कर दूंगी समाप्त

    समारोह में जब उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय भाषण दे रहे थे, तभी कुछ विद्यार्थियों ने राज्यपाल से पदक न दिलाने पर विरोध शुरू कर दिया। विद्यार्थियों व उनके अभिभावकों ने कहा कि राज्यपाल से पदक नहीं दिलाना था तो क्या हमें दीर्घा में बैठने के लिए बुलाया गया है?

    विरोध बढ़ा तो उच्च शिक्षा मंत्री को अपना भाषण रोकना पड़ा। इस बीच राज्यपाल ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने मंच से माइक लेकर कहा, सभी बैठ जाओ नहीं तो मैं कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा कर दूंगी। इसके बाद पुलिस और विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने सभी को शांत कराया। तब मंत्री ने भाषण दोबारा शुरू किया।

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