भारत-ईयू FTA से यूपी के चमड़ा और हस्तशिल्प उत्पादों के लिए खुला यूरोपीय बाजार, युवाओं को मिलेंगे रोजगार के अवसर
भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता उत्तर प्रदेश के निर्यातकों के लिए बड़े अवसर खोलेगा। विशेषकर चमड़ा, हस्तशिल्प, कृषि और इलेक्ट्रॉनिक्स उ ...और पढ़ें

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राज्य ब्यूरो, जागरण लखनऊ। भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) से उत्तर प्रदेश के निर्यातकों को बड़ा अवसर मिलेगा। खास तौर पर चमड़ा, हस्तशिल्प, कृषि व इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के निर्यातकों के लिए यह समझौता नई दिशा देने वाला साबित होगा।
27 यूरोपीय देशों के लगभग 45 करोड़ उपभोक्ताओं वाले बड़े बाजार तक पहुंच बनाने में यह समझौता काफी मददगार साबित होगा।
उत्तर प्रदेश में चमड़ा, फुटवियर, वस्त्र, हस्तशिल्प, कालीन, पीतल उद्योग, फूड प्रोसेसिंग और एमएसएमई आधारित उत्पादन इकाइयां प्रमुख हैं। शून्य टैरिफ से इनके उत्पाद यूरोपीय बाजार में कम कीमत पर उपलब्ध हो सकेंगे, जिससे निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और उत्पादन क्षमता का विस्तार होगा।
निर्यात विशेषज्ञों के अनुसार, चमड़ा उत्पादों के लिए प्रसिद्ध कानपुर और आगरा के जूते व अन्य चमड़ा उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने में यह समझौता असरदायक होगा। नोएडा व ग्रेटर नोएडा के इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा। इस समझौते से इंजीनियरिंग उत्पाद और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को मजबूती मिलेगी।
वहीं, एक्सप्रेस-वे नेटवर्क, डिफेंस और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरिडोर, औद्योगिक पार्क और मेडिकल डिवाइस जैसे क्षेत्रों में यूरोपियन कंपनियों के निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी।
सहारनपुर, मुरादाबाद और भदोही की कारीगरी को मिलेगी पहचान
सहारनपुर का लकड़ी आधारित हस्तशिल्प और फर्नीचर, मुरादाबाद का पीतल उद्योग और भदोही का कालीन उद्योग पहले से ही निर्यात उन्मुख हैं। इंडिया-ईयू एफटीए के बाद इन उत्पादों को यूरोप में बाजार तक पहुंच मिलेगी। इससे कारीगरों को स्थिर आर्डर, बेहतर आय और वैश्विक ब्रांड वैल्यू मिलने की संभावना है। ओडीओपी योजना के तहत चिह्नित इन जिलों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है।
एमएसएमई, महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर
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निर्यात आधारित उत्पादन बढ़ने से महिलाओं की भागीदारी, घरेलू कारीगरों की आय, युवाओं के लिए नौकरियां भी बढ़ने की संभावना है। लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग, डिजाइन, गुणवत्ता प्रमाणन और ई-कामर्स जैसे सहायक क्षेत्रों में भी रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।