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    ISIS समर्थक राकिब इमाम अंसारी को पांच साल की जेल, लखनऊ कोर्ट ने सुनाया फैसला

    Updated: Thu, 16 Jul 2026 07:28 AM (IST)

    पाकिस्तानी आतंकी संगठन आइएसआइएस का सहयोग करने के आरोप में राकिब इमाम अंसारी को लखनऊ में पांच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई है। उस पर छह हजार रुपये क ...और पढ़ें

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    HighLights

    1. राकिब इमाम अंसारी को पांच साल की जेल।

    2. आइएसआइएस का सहयोग करने का दोषी पाया गया।

    3. लखनऊ कोर्ट ने छह हजार का जुर्माना भी लगाया।

    विधि संवाददाता, जागरण, लखनऊ। पाकिस्तानी आतंकी संगठन आइएसआइएस का सहयोग करने के आरोपित राकिब इमाम अंसारी को एनआइए के विशेष न्यायाधीश उमाकांत जिंदल ने पांच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। दोषी पर छह हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

    अभियोजन ने बताया कि इस मामले में एटीएस अलीगढ़ के दारोगा मोहम्मद अकरम ने तीन नवंबर 2023 को गोमतीनगर के एटीएस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया गया कि मुंबई के काला चौकी थाने में एक रिपोर्ट दर्ज हुई थी।

    विवेचना के दौरान आरोपी शाहनवाज और रिजवान अली के बारे में सूचना इकट्ठी की जा रही थी, तभी पता चला कि दोनों आरोपित आइएसआइएस के सक्रिय सदस्य हैं और दोनों के अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के संगठन स्टूडेंट आफ अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के कुछ छात्रों से गहरे संबंध हैं।

    रिजवान अशरफ यूनिवर्सिटी का छात्र नहीं था, परंतु आइएसआइएस से जुड़ा होने के चलते यूनिवर्सिटी के संगठन से जुड़कर आइएसआइएस की विचारधारा का प्रचार और प्रसार कर रहा है। एटीएस ने पाया कि दोषी राकिब इमाम अंसारी भी अन्य आरोपितों के संपर्क में था। साथ ही शाहनवाज और रिजवान अली के संपर्क में रहकर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से जुड़े कुछ लोगों के माध्यम से प्रतिबंधित आतंकी संगठन की विचारधारा का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं।

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    अभियोजन ने 17 गवाह पेश किए, जिन्होंने बताया कि सभी लोग प्रतिबंधित आतंकी संगठन के लिए नए लोगों को जोड़ने, जिहादी गतिविधियों को प्रेरित करने व भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध छेड़कर भारत में सरिया कानून स्थापित करने की साजिश रच रहे थे, जिसमें दोषी राशिब इमाम अंसारी भी सक्रिय भूमिका निभा रहा था। मुकदमे के विचारण के दौरान दोषी राकिब इमाम ने न्यायालय के समक्ष अर्जी देकर अपना जुर्म स्वीकार कर लिया।

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