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    बैन के बावजूद ऑनलाइन बिक रहा है चाइनीज मांझा? हाई कोर्ट ने यूपी सरकार को दिए जांच के निर्देश

    Updated: Thu, 16 Jul 2026 05:00 AM (IST)

    इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राज्य सरकार को प्रतिबंधित मांझे की ऑनलाइन बिक्री की जांच करने का निर्देश दिया है। ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. हाई कोर्ट ने प्रतिबंधित मांझे की ऑनलाइन बिक्री की जांच का निर्देश दिया।

    2. सरकार नया कानून बना रही है, जिसमें मुआवजे का भी प्रावधान होगा।

    3. याचिकाकर्ताओं ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मांझे की उपलब्धता का दावा किया।

    विधि संवाददाता, लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह जांच करे कि प्रतिबंधित मांझा कहीं आनलाइन प्लेटफार्म के माध्यम से तो नहीं बेचा जा रहा है।

    अदालत ने कहा कि यदि प्रतिबंध के बावजूद इसकी ऑनलाइन बिक्री हो रही है तो इस पहलू की गंभीरता से जांच कर रिपोर्ट पेश की जाए। न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ वर्ष 2018 से लंबित जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

    यह याचिका एमएल यादव ने दाखिल की है। इसके साथ रज्जन खान की दो अन्य जनहित याचिकाएं भी संबद्ध हैं, जिनमें प्रदेश में प्रतिबंधित मांझा के आयात, निर्माण, बिक्री और उपयोग पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि प्रतिबंध के बावजूद प्रतिबंधित मांझा कई आनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है।

    इस संबंध में एक समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया। इस पर अदालत ने राज्य सरकार के अधिवक्ता को निर्देश दिया कि इस दावे की जांच कर अगली सुनवाई में अदालत को जानकारी दें। सुनवाई के दौरान सरकार ने अदालत को बताया कि प्रतिबंधित मांझा पर प्रभावी रोक लगाने के लिए नया कानून तैयार किया जा रहा है।

    प्रस्तावित कानून का नाम उत्तर प्रदेश घातक मांझा (निर्माण, विक्रय एवं उपयोग का प्रतिषेध) अधिनियम रखा गया है। सरकार के अनुसार, इस कानून में प्रतिबंधित मांझा से घायल होने या जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को मुआवजा देने का भी प्रविधान प्रस्तावित है।

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    अदालत ने विपक्षी पक्ष की ओर से दाखिल संक्षिप्त प्रति-शपथपत्र और अन्य पक्षों के पूरक शपथपत्रों को अभिलेख पर लेते हुए राज्य सरकार को सभी पक्षों को उनकी प्रतियां उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। साथ ही याचिकाकर्ताओं को जवाब दाखिल करने की अनुमति भी दी गई।

    पूर्व आदेश के अनुपालन में सुनवाई के दौरान पुलिस महानिदेशक, अपर मुख्य सचिव (गृह), प्रमुख सचिव (राज्य कर), प्रमुख सचिव (पर्यावरण) तथा अपर मुख्य सचिव (अवसंरचना एवं औद्योगिक विकास) सहित कई वरिष्ठ अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहे।

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