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    जिसे समझा जा रहा था टीबी, वो निकला 2.5 किलो का ट्यूमर; KJMU के डॉक्टरों ने जटिल सर्जरी कर बचाई मरीज की जान

    Updated: Sun, 03 May 2026 06:00 AM (GMT+05:30)

    किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के डॉक्टरों ने एक मरीज के सीने से 2.5 किलोग्राम का ट्यूमर सफलतापूर्वक निकाला। ...और पढ़ें

    मरीज के साथ सर्जरी करने वाली डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की टीम, केजीएमयू और सीटी स्कैन की रिपोर्ट में ट्यूमर

    मरीज के साथ सर्जरी करने वाली डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की टीम, केजीएमयू और सीटी स्कैन की रिपोर्ट में ट्यूमर

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    जागरण संवाददाता, लखनऊ। किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के डॉक्टरों ने एक बेहद जटिल और चौंकाने वाले मामले में मरीज के सीने से लगभग 2.5 किलोग्राम का बड़ा ट्यूमर सफलतापूर्वक निकालकर उसकी जान बचा ली।

    खास बात यह है कि मरीजा का लंबे समय तक टीबी (ट्यूबरकुलोसिस) का इलाज चलता रहा, जबकि असल समस्या एक बड़ा ट्यूमर था। यह मामला दर्शाता है कि गलत या अधूरी जांच कितनी खतरनाक साबित हो सकती है। ट्यूमर का आकार इतना बढ़ गया था कि रोगी का दायां फेफड़ा पूरी तरह सिकुड़ गया था, जिसकी वजह से दिल और मुख्य धमनी (एओर्टा) पर भारी दबाव डाल रहा था।

    रोग गंभीर होने के चलते मरीज का पल्स भी सामान्य से काफी अधिक हो गई थी। केजीएमयू के प्रवक्ता प्रो. डॉ. केके सिंह के अनुसार, लखनऊ निवासी 25 वर्षीय शगुन को पिछले साल जून में सीने में दर्द, भारीपन, सांस फूलने और दिल की धड़कन अनियमित होने की शिकायत पर परिवारजन ने एक निजी क्लीनिक में दिखाया।

    डॉक्टर ने पल्स को सामान्य करने के लिए एक माह की दवा दी। दवा से पल्स की समस्या तो काफी हद तक ठीक हुई, लेकिन सीने में दर्द और अन्य दिक्कतें बरकरार रहीं। इस साल जनवरी में इन समस्याओं के साथ महिला की बुखार भी आने लगा। पुराने डॉक्टर को फिर से दिखाया तो एक्स-रे की सलाह दी गई।

    रिपोर्ट में फेफड़े में पानी भरने की आशंका पर डॉक्टर ने आईटी कॉलेज के एक निजी अस्पताल रेफर कर दिया। डॉक्टरों ने भर्ती कर लिया और छाती से पानी निकालकर जांच कराई। रिपोर्ट में टीबी होने की बात कहकर इलाज शुरू कर दिया।

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    महिला की सेहत में करीब 25 प्रतिशत सुधार हुआ, दो-तीन सप्ताह बाद ही उसे पेट में दर्द और उल्टियां होने लगीं। तबीयत गंभीर होने पर सीटी स्कैन और बायोप्सी की, जिसके बाद पल्मोनरी हैमार्टोमा की आशंका जताकर संक्रमित फेफड़े को निकालने की सलाह दी, लेकिन परिवारजन सहमत नहीं हुए और मरीज को छह अप्रैल को केजीएमयू लेकर पहुंचे।

    पांच घंटे चली जटिल सर्जरी

    चिकित्सा अधीक्षक एवं जनरल सर्जरी विभाग में प्रो. डॉ. सुरेश कुमार ने बताया कि लक्षण के आधार पर जर्म सेल ट्यूमर लग रहा था। ऐसे में अपने यहां दोबारा सीटी स्कैन और बायोप्सी कराई तो रिपोर्ट में जर्म सेल ट्यूमर की पुष्टि हुई। यह सीने के एंटीरियर मेडियास्टिनम में बड़ा ट्यूमर होता है।

    यह ट्यूमर आम तौर पर जननांगों में होते हैं, लेकिन छाती, पेट, व मस्तिष्क में भी हो सकते हैं। यह बीमारी दो लाख में सिर्फ एक को होती है। 21 अप्रैल को सर्जरी का निर्णय लिया गया। इस जटिल ऑपरेशन में लगभग पांच घंटे घंटे का समय लगा।

    महिला के फेफड़े से 2.5 किलो का बड़ा ट्यूमर सफलतापूर्वक निकाला गया। ट्यूमर निकालते ही महिला का सिकुड़ा हुआ फेफड़ा फिर से सामान्य आकार में आ गया। सर्जरी के बाद मरीज को नौ दिनों तक वेंटिलेटर पर रखना पड़ा।

    स्थिति सामान्य होने के बाद शनिवार को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। सर्जरी करने वाली टीम में डॉ. मिथिलेश वर्मा, डॉ. संजीव पूर्ति, डॉ. वैभव अग्रवाल ने भी अहम भूमिका निभाई।

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