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    लखनऊ के KGMU में प्रदेश का पहला बोन एवं टिश्यू बैंक शुरू, अब जटिल सर्जरी होंगी आसान

    Updated: Tue, 04 Aug 2026 11:46 AM (IST)

    केजीएमयू लखनऊ ने उत्तर प्रदेश का पहला बोन एवं टिश्यू बैंक शुरू किया है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं, कैंसर और हड्डी संबंधी विकारों के मरीजों को उच्चस्तरीय इ ...और पढ़ें

    केजीएमयू में प्रदेश का पहला बोन एवं टिश्यू बैंक शुरू।

    केजीएमयू में प्रदेश का पहला बोन एवं टिश्यू बैंक शुरू।

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    जागरण संवाददाता, लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) ने उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में एक नया अध्याय जोड़ते हुए प्रदेश का पहला बोन एवं टिश्यू बैंक शुरू कर दिया है।

    इस अत्याधुनिक सुविधा के शुरू होने से सड़क दुर्घटनाओं, कैंसर, गंभीर संक्रमण, जन्मजात हड्डी संबंधी विकारों और जटिल आर्थोपेडिक्स के मरीजों को समय पर और उच्चस्तरीय इलाज मिल सकेगा।

    अब मरीजों को हड्डी और अन्य टिश्यू की उपलब्धता के लिए दूसरे राज्यों या कारपोरेट अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। हड्डी रोग विभाग में सोमवार को कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने बोन एवं टिश्यू बैंक का शुभारंभ किया।

    एक करोड़ रुपये आया खर्च

    प्रो. सोनिया नित्यानंद के मुताबिक, बोन एवं टिश्यू बैंक में दानदाताओं से प्राप्त हड्डियों और अन्य आवश्यक टिश्यू को वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत सुरक्षित रखा जाएगा। जरूरत पड़ने पर इन्हें विभिन्न प्रकार की सर्जरी में प्रत्यारोपित किया जाएगा। इससे मरीजों की रिकवरी बेहतर होगी और कई मामलों में बार-बार सर्जरी की आवश्यकता भी कम हो सकेगी।

    अब तक बड़ी हड्डी की क्षति या ट्यूमर के कारण हड्डी निकालने के बाद मरीजों के इलाज में कई तरह की चुनौतियां आती थीं। कई बार रोगी के शरीर के दूसरे हिस्से से हड्डी निकालकर प्रत्यारोपण करना पड़ता था, जिससे अतिरिक्त आपरेशन और जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता था।

    बोन एवं टिश्यू बैंक शुरू होने से ऐसी परिस्थितियों में सुरक्षित संरक्षित बोन ग्राफ्ट उपलब्ध हो सकेंगे। यह सुविधा विशेष रूप से सड़क दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल मरीजों, कैंसर के कारण हड्डी निकालने वाले मरीजों, रीढ़ की हड्डी की सर्जरी, ज्वाइंट रिकंस्ट्रक्शन, जटिल फ्रैक्चर और जन्मजात हड्डी विकृतियों के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    समय पर उपयुक्त बोन ग्राफ्ट मिलने से आपरेशन की सफलता की संभावना बढ़ेगी और मरीजों को बेहतर परिणाम मिलेंगे। बोन एवं टिश्यू बैंक को तैयार करने में कुल करीब एक करोड़ रुपये खर्च आया है।

    प्रदेश के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि

    बोन बैंक के प्रभारी डॉ. कुमार शांतनु ने कहा, यह सुविधा प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। इससे मरीजों को सुरक्षित बोन एवं टिश्यू ग्राफ्ट उपलब्ध होंगे। चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान तथा टिश्यू डोनेशन को नई दिशा मिलेगी।

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    वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित एलोग्राफ्ट उपलब्ध होने से कई मरीजों में शरीर से अतिरिक्त हड्डी निकालने की जरूरत कम होगी। इससे अतिरिक्त चीरा, दर्द, रक्तस्राव और डोनर साइट से जुड़ी जटिलताएं भी घटेंगी। बोन एवं टिश्यू बैंक में ऊतकों के संग्रह, स्क्रीनिंग, प्रोसेसिंग, स्टरलाइजेशन और संरक्षण की पूरी प्रक्रिया राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप की जाएगी।

    प्रत्येक बोन ग्राफ्ट का संक्रमण और गुणवत्ता संबंधी परीक्षण किया जाएगा, ताकि मरीजों को पूरी तरह सुरक्षित ऊतक उपलब्ध कराए जा सकें। आर्थोपेडिक्स विभाग के अध्यक्ष प्रो. आशीष कुमार के मुताबिक, यह सुविधा न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि आसपास के राज्यों के मरीजों के लिए भी वरदान साबित होगी। बोन एवं टिश्यू बैंक चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और आधुनिक आर्थोपेडिक उपचार को भी नई दिशा देगा।

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