लखनऊ कोर्ट में अधिवक्ताओं और वादी से मारपीट पर HC सख्त, कहा- न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं
लखनऊ जिला न्यायालय में अधिवक्ताओं और मुवक्किल से मारपीट के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाया है। ...और पढ़ें

लखनऊ कोर्ट में अधिवक्ताओं व वादी से मारपीट पर HC सख्त।

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विधि संवाददाता, लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने लखनऊ जिला न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं और उनके मुवक्किल के साथ मारपीट, धमकी और न्यायिक कार्य में बाधा डालने के मामले को बेहद गंभीर मानते हुए कड़ा रुख अपनाया है।
मंगलवार शाम मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर गठित विशेष पीठ ने तत्काल सुनवाई करते हुए जिला जज, लखनऊ और पुलिस आयुक्त से बुधवार सुबह 10:15 बजे तक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि यदि आरोप सही पाए गए तो यह केवल आपराधिक घटना नहीं, बल्कि न्याय वितरण व्यवस्था में हस्तक्षेप का गंभीर मामला होगा, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।
न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ के समक्ष दिल्ली की अधिवक्ता अभिप्सा मोहंती, कोमल अग्रवाल और आशुतोष श्रीवास्तव ने अंतरिम प्रार्थना पत्र दाखिल कर आरोप लगाया कि वे अपने मुवक्किल मोहम्मद शाकिर की ओर से एक दीवानी वाद में वकालतनामा दाखिल करने लखनऊ जिला अदालत पहुंचे थे। संबंधित अदालत खाली होने पर मामला दूसरे न्यायालय में भेजा गया।
आरोप है कि वहां अधिवक्ता सौरभ कुमार वर्मा और उनके कुछ सहयोगियों ने उन्हें अदालत में पेश होने से रोका। विरोध करने पर उनके साथ धक्का-मुक्की, गाली-गलौज और मारपीट की गई। मुवक्किल को भी पीटा गया। उन्हें यह कहकर धमकाया गया कि किसी अधिवक्ता के खिलाफ मुकदमा लड़ने का परिणाम भुगतना पड़ेगा। जान बचाने के लिए उन्हें न्यायाधीश के कक्ष और फिर सीढ़ियों के रास्ते बाहर निकलना पड़ा।
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याचिका में बताया गया कि विवाद की पृष्ठभूमि एक संपत्ति संबंधी मुकदमे से जुड़ी है। पहले वादी और रियाजुद्दीन के बीच मामला चल रहा था, जिसमें सौरभ कुमार वर्मा प्रतिवादी की ओर से अधिवक्ता थे। बाद में विवादित संपत्ति उनके नाम स्थानांतरित होने के बाद उन्हें भी पक्षकार बनाते हुए नया मुकदमा दायर किया गया।
स्थानीय स्तर पर कोई अधिवक्ता मुकदमा लेने को तैयार नहीं हुआ, इसलिए दिल्ली के अधिवक्ताओं को नियुक्त किया गया। याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि 30 अप्रैल को भी दूसरे वादी आसिफ के साथ इसी तरह की मारपीट हुई थी, लेकिन शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने घटना का वीडियो अदालत में प्रस्तुत किया। वीडियो देखने के बाद पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया वादी के साथ मारपीट होती दिखाई दे रही है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि लखनऊ जिला न्यायालय में इस तरह की घटनाएं पहली बार नहीं हुई हैं।
पहले भी न्यायिक कार्य में बाधा, भू-माफिया की गतिविधियों और कुछ अधिवक्ताओं अथवा अधिवक्ता के रूप में कार्य करने वाले लोगों द्वारा न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित करने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। इन्हीं मामलों की निगरानी के लिए पुलिस आयुक्त कार्यालय में संयुक्त पुलिस आयुक्त की अध्यक्षता में विशेष सेल गठित किया गया था।
सुनवाई के दौरान पुलिस आयुक्त अमरेंद्र कुमार सेंगर वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत से जुड़े। उन्होंने बताया कि घायल मोहम्मद शाकिर का चिकित्सीय परीक्षण कराया जा रहा है और दूसरे पक्ष की ओर से भी शिकायत मिली है।
वहीं जिला जज ने अदालत को बताया कि सीसीटीवी फुटेज में कुछ अधिवक्ताओं की पहचान की गई है।हाई कोर्ट ने जिला जज को सीसीटीवी फुटेज सहित विस्तृत रिपोर्ट और पुलिस आयुक्त को घटना, आरोपितों के आपराधिक इतिहास तथा अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
साथ ही संबंधित डीसीपी, वजीरगंज थाना प्रभारी और घायल वादी मोहम्मद शाकिर को भी अदालत में उपस्थित रहने के आदेश दिए गए हैं। अदालत ने दिल्ली से आए अधिवक्ताओं को मुकदमे और न्यायालयी कार्यवाही के दौरान पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को सुबह होगी।