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    क्या प्रोटेस्ट में जाने से रोकना नागरिकों की स्वतंत्रता का हनन नहीं : हाई कोर्ट

    Updated: Wed, 22 Jul 2026 09:13 AM (IST)

    उत्तराखंड हाई कोर्ट ने उपपा अध्यक्ष प्रभात ध्यानी को ऋषिकेश से हिरासत में लेने पर सरकार से जवाब मांगा है, पूछा कि क्या यह नागरिकों की स्वतंत्रता का हन ...और पढ़ें

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    HighLights

    1. हाई कोर्ट ने प्रभात ध्यानी की हिरासत पर सरकार से जवाब मांगा।

    2. पूछा, क्या विरोध प्रदर्शन में जाने से रोकना स्वतंत्रता का हनन नहीं।

    3. सरकार को चार सप्ताह में जवाब देने का निर्देश, अगली सुनवाई 16 सितंबर।

    विधि संवाददाता, नैनीताल। दिल्ली जा रहे उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी (उपपा) के केंद्रीय अध्यक्ष प्रभात ध्यानी को ऋषिकेश रेलवे स्टेशन से 19 जुलाई की शाम हिरासत में लिए जाने के मामले में हाई कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए सरकार से जवाब मांगा है।

    कोर्ट ने सरकार से पूछा कि किस अपराध के लिए किस नियम के तहत उन्हें ट्रेन से उठा लिया गया। पुलिस को कैसे पता कि वे प्रोटेस्ट में शामिल होने जा रहे थे? क्या यह नागरिकों कि स्वतंत्रता का हनन नहीं है, कि वे कहीं आ-जा नहीं सकते?

    मंगलवार को न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी व न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि प्रभात ध्यानी के विरुद्ध पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 172 (संज्ञेय अपराध रोकने के लिए हिरासत में लेना) के तहत कार्रवाई की है। वह दिल्ली में छात्रों और कांकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध-प्रदर्शन में प्रतिभाग करने जा रहे थे।

    दिल्ली पुलिस ने सभी राज्यों को एक नोटिस जारी कर कहा था कि जो भी व्यक्ति इस प्रोटेस्ट में शामिल होने आ रहे हैं, उन्हें राज्य अपने ही बार्डर एरिया पर रोक दें। इस पर कोर्ट ने सरकार से सवाल किए। पूछा कि क्या कहीं आने-जाने से रोकना नागरिकों की स्वतंत्रता का हनन नहीं है? कोर्ट ने राज्य सरकार सहित पक्षकारों को चार सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश के साथ अगली सुनवाई तिथि 16 सितंबर नियत कर दी।

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    पार्टी के सचिव ने दायर की याचिका
    उपपा के केंद्रीय सचिव लालमणि ने 20 जुलाई को दायर याचिका में कहा कि पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष ध्यानी शिक्षाविद सोनम वांगचुक के आह्वान पर विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के लिए ऋषिकेश से दिल्ली जा रहे थे। उन्होंने इंटरनेट मीडिया में पोस्ट भी डाली थी। तभी उन्हें ऋषिकेश रेलवे स्टेशन से उत्तराखंड पुलिस ने हिरासत में ले लिया। तबसे कुछ पता नहीं चल सका कि पुलिस उन्हें कहां लेकर गई है।

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    उनका मोबाइल भी जब्त कर लिया गया। इस तरह से एक वयस्क व्यक्ति को बिना अपराध रेलवे स्टेशन से हिरासत में लिया जाना मौलिक अधिकारों का हनन है। इसके लिए पुलिस की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। यद्यपि सोमवार को चली सुनवाई के दौरान उत्तराखंड पुलिस की ओर से कोर्ट को बताया गया कि ध्यानी को छोड़ दिया गया है।