लखनऊ: बीमा पूरा होने के बाद आई याद, LIC का पैसा मिलते ही मां को घर ले गया परिवार; 5 साल से आश्रय में तड़प रही थी महिला
लखनऊ में एक मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला को परिवार ने पांच साल तक आश्रय में छोड़ दिया था, लेकिन एलआईसी बीमा राशि पूरी होने पर उसे घर ले गए। यह घटना रिश ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
मानसिक रूप से अस्वस्थ लल्ली देवी पांच साल आश्रय में रहीं।
एलआईसी बीमा राशि पूरी होने पर परिवार लेने पहुंचा।
यह घटना रिश्तों की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल उठाती है।
विनय तिवारी, लखनऊ। रिश्ते कभी खून से जुड़ते हैं तो कभी जिम्मेदारी से निभाए जाते हैं, लेकिन बदलते दौर में रिश्तों की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करने वाली घटनाएं भी सामने आ रही हैं। वृंदावन कालोनी सेक्टर-9 स्थित पाली मर्सी होम में रह रही लल्ली देवी की कहानी भी कुछ ऐसे ही सवाल छोड़ गई। वर्ष 2014 में घर से बिछुड़कर लखनऊ पहुंचीं लल्ली देवी को परिवार ने पांच वर्ष पहले ही पहचान लिया था।
संस्था ने परिवारजन को उनके सुरक्षित होने की जानकारी भी दी थी, लेकिन उन्हें लेने कोई नहीं आया। अब एलआईसी की बीमा राशि (एक लाख रुपये) मिलने का समय आया तो बेटा और बहन मां से हस्ताक्षर करवाने के लिए आश्रय लेने पहुंच गए।
लल्ली देवी मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं। वर्ष 2014 में वह आगरा स्थित अपने घर से भटककर लखनऊ पहुंच गई थीं। पीजीआई पुलिस ने उन्हें वृंदावन कालोनी सेक्टर-9 स्थित पाल मर्सी होम में पहुंचाया। संस्था लंबे समय से ऐसे मानसिक रूप से अस्वस्थ, बेसहारा और घर से बिछड़े लोगों को आश्रय देती है। यहां लल्ली देवी की देखभाल होती रही और परिवार की तलाश भी जारी रही।
पाल मर्सी होम के संचालक ओवी पाल के मुताबिक, वर्ष 2021 में काफी प्रयास के बाद लल्ली देवी के आगरा के सैनिक नगर, भगवत बाग स्थित घर का पता चला। उनकी बड़ी बहन राजवती से संपर्क कर लल्ली के लखनऊ में सुरक्षित होने की जानकारी दी गई। परिवारजन को उन्हें घर ले जाने के लिए भी कहा गया। परिवारजन वीडियो कॉल के जरिए उनकी जानकारी लेते रहे, लेकिन अगले पांच वर्ष तक उन्हें लेने कोई नहीं पहुंचा। संस्था के मुताबिक, लल्ली के बेटे को भी मां के सुरक्षित होने की जानकारी थी।
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हाल में लल्ली देवी की एलआईसी बीमा पालिसी पूरी होने और उसकी राशि मिलने की स्थिति बनी। इसके बाद करीब एक सप्ताह पहले उनकी बड़ी बहन राजवती और बेटा शीलू पीजीआई थाने पहुंचे। आधार समेत अन्य दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया। पुलिस ने जांच के बाद परिवार की पुष्टि की और लल्ली देवी को उनकी बहन व बेटे के सुपुर्द कर दिया।
लल्ली देवी के पति का पहले ही निधन हो चुका है। उनके तीन बेटे विनोद, शिवा और शीलू हैं। परिवार में एक बेटे की शादी भी हो चुकी है। ऐसे में वर्षों तक मां का आश्रय में रहना और अब बीमा राशि पूरी होने के बाद उन्हें लेने पहुंचना रिश्तों की प्राथमिकता पर सवाल खड़े करता है। पाल मर्सी होम वर्ष 2010 से मानसिक रूप से अस्वस्थ और घर से बिछड़े लोगों की मदद कर रहा है। संस्था के मुताबिक अब तक 245 लोगों को उनके घर तक पहुंचाया जा चुका है।