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    लखनऊ में 6.85 करोड़ से बना फिटनेस सेंटर, 1.40 करोड़ रुपये न मिलने पर हुआ बंद

    Updated: Sat, 08 Aug 2026 04:27 AM (IST)

    लखनऊ का ट्रांसपोर्ट नगर इंस्पेक्शन एंड सर्टिफिकेशन सेंटर (I&C), जो 6.85 करोड़ रुपये से बना था, 1.40 करोड़ रुपये न मिलने के कारण बंद हो गया है। इससे व् ...और पढ़ें

    प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

    प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

    HighLights

    1. लखनऊ का 6.85 करोड़ का I&C सेंटर 1.40 करोड़ न मिलने से बंद।

    2. निजी ATS केंद्रों पर वाहनों की फिटनेस में धांधली के गंभीर आरोप।

    3. विधान परिषद में व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस पर लूट का मुद्दा उठा।

    धर्मेश अवस्थी, लखनऊ। ट्रांसपोर्ट नगर लखनऊ का इंस्पेक्शन एंड सर्टिफिकेशन सेंटर (आइ एंड सी) केंद्र सरकार की पहल पर 2019 में बनाया गया था, ताकि कमर्शियल वाहनों की फिटनेस दुरुस्त रहे और सड़क दुर्घटनाओं में कमी आए।

    स्पेन की कंपनी से करार करके अत्याधुनिक मशीनें लगाया गया, केंद्र व प्रदेश सरकार ने सड़क सुरक्षा के तहत 6.85 करोड़ रुपये भी खर्च किए लेकिन, केंद्रीय सड़क व परिवहन मंत्रालय ने इस केंद्र को नवंबर 2025 में बंद कर दिया।

    आई एंड सी को अपग्रेड करने का सर्वे हो चुका है लेकिन 10 महीन में 1.40 करोड़ रुपये नहीं मिल पा रहे। प्रतिदिन सैकड़ों वाहनों को एटीएस सेंटर बख्शी का तालाब की दौड़ लगानी पड़ रही है।

    लखनऊ में ही दो लाख से अधिक व्यावसायिक वाहन पंजीकृत हैं और प्रतिदिन बड़ी संख्या में वाहनों को फिटनेस कराना पड़ता हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने अप्रैल 2022 में एटीएस (ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन) के नियम तय किए थे।

    मंशा यह थी कि वाहनों की बढ़िया टेस्टिंग होने से सड़क सुरक्षा होगी व भ्रष्टाचार पर अंकुश लग सकेगा। इसके उलट एकेआरएस एटीएस प्राइवेट लिमिटेड बख्शी का तालाब में वाहनों का बिना भाैतिक परीक्षण किए फिटनेस प्रमाणपत्र जारी हो रहे हैं, फीस का कई गुणा धनराशि वसूली जा रही है। वाहनों की फिटनेस के नाम पर वसूली का प्रकरण मानसून सत्र में भी प्रमुखता से उठा।

    विधान परिषद में बुधवार को सपा के आशुतोष सिन्हा ने कहा, स्कूल बसें काफी कम चलती हैं इसलिए उनकी फिटनेस वर्ष की बजाय किलोमीटर के आधार पर होनी चाहिए। वाहनों का फिटनेस अब सही से नहीं हो रहा। इसका भाजपा के उमेश द्विवेदी, डा. हरि सिंह ढिल्लो, ध्रुव कुमार त्रिपाठी आदि ने समर्थन किया।

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    भाजपा के देवेंद्र प्रताप सिंह ने यहां तक कहा कि वाहनों की फिटनेस का काम जब से प्राइवेट सेक्टर को दिया गया है लूट मची है। पहले की व्यवस्था ही बेहतर थी। उधर, परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने बताया, ट्रांसपोर्ट नगर में बने आइ एंड सी को चलाने पर अभी कोई निर्णय नहीं हो सका है।

    आई एंड सी व एटीएस में यह अंतर

    इंस्पेक्शन एंड सर्टिफिकेशन (आई एंड सी) सेंटर वाहनों की समग्र जांच के लिए का सरकारी ढांचा है, जबकि आटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) एक आधुनिक व पूरी तरह से मशीन-आधारित और कंप्यूटरीकृत सुविधा है जो बिना मानवीय हस्तक्षेप के वाहनों की फिटनेस करता है। आइ एंड सी में पारंपरिक या अर्ध-स्वचालित तरीके से मैनुअल निरीक्षण होता है, इसमें इंस्पेक्टर के व्यक्तिगत आकलन और विवेक की भूमिका अधिक होती है। रिकॉर्ड कई बार कागजी या सीमित डिजिटल होते हैं।

    वहीं एटीएस में ब्रेक, सस्पेंशन, स्टीयरिंग की जांच पूरी तरह से स्वचालित मशीनों और सेंसरों द्वारा होती है। इसमें इंसानों का दखल नहीं होता है, जिससे रिपोर्ट पूरी तरह निष्पक्ष और सॉफ्टवेयर-जनरेटेड होती है। हर जांच की डिजिटल और वीडियो रिकार्डिंग सीधे केंद्रीय वाहन पोर्टल पर सुरक्षित होती है।

    एटीएस की कार्यशैली पर उठे सवाल

    प्रदेश के बिजनौर, लखनऊ, कानपुर, गाजियाबाद व झांसी आदि के एटीएस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठा चुके हैं। बिना वाहनाें के पहुंचे ही फिटनेस प्रमाणपत्र जारी कर दिए गए।

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