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    बेटी की दहेज प्रताड़ना की शिकायत को हल्के में न लें, समझौते की सलाह पड़ सकती भारी: लखनऊ हाई कोर्ट

    Updated: Tue, 04 Aug 2026 08:37 AM (IST)

    इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने दहेज हत्या मामले में टिप्पणी की कि मायके आने वाली बेटी की दहेज प्रताड़ना की शिकायत को सामान्य विवाद मानकर नजरअंदा ...और पढ़ें

    प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

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    HighLights

    1. दहेज उत्पीड़न की शिकायत को हल्के में न लें परिवार।

    2. बेटी की शिकायत मदद और सुरक्षा की पुकार हो सकती है।

    3. समय पर हस्तक्षेप से महिला की जान बचाई जा सकती है।

    जागरण संवाददाता, लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने दहेज हत्या के एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि दहेज प्रताड़ना की शिकायत लेकर बार-बार मायके आने वाली बेटी की बात को सामान्य वैवाहिक विवाद मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

    कोर्ट ने ये भी कहा कि उसकी शिकायत मदद, सुरक्षा और समय रहते हस्तक्षेप की वास्तविक पुकार हो सकती है। परिवार की नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी है कि वह बेटी की बात पर विश्वास करे और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने को कदम उठाए।

    पीठ ने श्रावस्ती के वर्ष 2011 के दहेज हत्या मामले में दोषियों की आपराधिक अपील पर फैसला सुनाते हुए यह टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि अक्सर दहेज उत्पीड़न झेल रही महिलाओं को परिवार की ओर से ‘समझौता कर लो’ या ‘घर बचा लो’ जैसी सलाह दी जाती है।

    कई बार ऐसी सलाह अनजाने में उत्पीड़न करने वालों का मनोबल बढ़ा देती है। यदि समय रहते प्रभावी हस्तक्षेप किया जाए तो महिला की जान बचाई जा सकती है। पीठ ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से दोषियों को सजा दिलाना आवश्यक है, लेकिन यह उस समय किए जाने वाले हस्तक्षेप का विकल्प नहीं हो सकता, जिससे किसी महिला की जान बचाई जा सकती थी।

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