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    लखनऊ में तीन साल बाद भी सामने नहीं आ सकी लेवाना होटल अग्निकांड की जांच रिपोर्ट

    Updated: Sat, 06 Jun 2026 09:57 AM (IST)

    लखनऊ के लेवाना होटल अग्निकांड की जांच रिपोर्ट तीन साल बाद भी सार्वजनिक नहीं हुई है, जिससे पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पाया है। यह घटना शहर में पहले हुए ...और पढ़ें

    बाएं से लेवाना होटल में वर्ष 2022 में लगी थी आग व विराट होटल में 19 जून 2018 को लगी थी आग। - जागरण आर्काइव

    बाएं से लेवाना होटल में वर्ष 2022 में लगी थी आग व विराट होटल में 19 जून 2018 को लगी थी आग। - जागरण आर्काइव

    HighLights

    1. लेवाना होटल अग्निकांड की जांच रिपोर्ट तीन साल बाद भी लंबित।

    2. अवैध निर्माण और अधिकारियों-बिल्डरों की मिलीभगत से सुरक्षा अनदेखी।

    3. एसएसजे होटल अग्निकांड में भी दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई।

    जागरण संवाददाता, लखनऊ। दिल्ली के मालवीय नगर में लेमन ट्री रेस्तरां और होटल में लापरवाही की वजह से जो दर्दनाक हादसा हुआ था, ऐसी घटनाएं लखनऊ में कई बार हो चुकी हैं। बीते कुछ वर्षों में शहर के रेस्तरां और होटल में अग्निकांडों में कई लोगों की मौत के बाद कहीं पर तो कार्रवाई हुई लेकिन अधिकांश मामलों में जांच अब तक फाइलों में ही दौड़ रही है। गोखले मार्ग स्थित होटल लेवाना में हुए अग्निकांड की जांच में तीन साल बाद भी सामने नहीं आ सकी है। भयानक हादसे में मारे गए परिवारों को अब तक न्याय नहीं मिल पाया है।

    होटल लेवाना सुइट्स में पांच सितंबर 2022 की सुबह शार्ट सर्किट से आग लग गई थी इसमें चार लोगों की मौत और 24 लोगों को बचाया गया था। एलडीए ने इंजीनियरिंग सेवा के 22 अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्रवाई करने के लिए शासन को रिपोर्ट भेजा था। शासन ने एलडीए से पूछा था कि केवल इंजीनियरिंग सेवा के अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई की संस्तुति क्यों की गई?

    यह भी पूछा गया था कि क्या इस होटल के निर्माण और संचालन के मामले में अन्य अधिकारी और कर्मचारी दोषी नहीं हैं? एलडीए के तत्कालीन उपाध्यक्ष इंद्रमणि त्रिपाठी ने मामले की जांच के लिए सचिव पवन कुमार गंगवार की अध्यक्षता में गठित की कमेटी की थी, इसमें मुख्य अभियंता अवधेश तिवारी, वित्त नियंत्रक दीपक सिंह और मुख्य नगर नियोजक नितिन मित्तल शामिल थे।

    कमेटी ने दो जुलाई 2017 से तैनात रहे अधिकारियों व कर्मचारियों की बिल्डर के साथ मिलीभगत के चलते अवैध निर्माण के विरुद्ध कार्रवाई न करने का जिम्मेदार पाया था। तत्कालीन मंडलायुक्त डा. रोशन जैकब ने कहा था कि प्रथम दृष्टया, अग्नि सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली की कमी और अग्रभाग पर लोहे की ग्रिल न होने के बावजूद, अग्नि सुरक्षा के लिए एनओसी कैसे दी गई, यह जांच का विषय है।

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    26 मई को जोनल अधिकारी द्वारा एक नोटिस जारी किया गया था, और कोई जवाब न मिलने पर 28 अगस्त को दूसरा नोटिस जारी किया गया। होटल को तत्काल सील करके ध्वस्त कर दिया जाए। यह कार्रवाई अब तक नहीं हो सकी है, क्योंकि इसकी जांच कानपुर के मंडलायुक्त को सौँपी गई थी। एलडीए के अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा ने बताया, लेवाना की जांच पूरी होने की सूचना है, कार्रवाई रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है।

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    19 जून 2018 को एसएसजे होटल में एयर कंडीशनर में शार्ट सर्किट के कारण भीषण आग लग गई थी, जो बाद में बगल के विराट होटल तक फैल गई थी। अग्निकांड में सात लोगों की मौत हो गई थी और छह लोग झुलस गए थे। जांच में होटल में आग से बचाव के पर्याप्त साधन नहीं मिले थे, अभियंताओं व होटल मालिकों की साठगांठ रही इसीलिए एलडीए ने किसी अधिकारी या कर्मचारी को दोषी नहीं पाया था।

    एलडीए ने 23 दिसंबर 2010 को एसएसजे इंटरनेशनल को गिराने का नोटिस जारी किया और 26 अगस्त 2020 को होटल का शमन मानचित्र स्वीकृत किया गया था। इसके बगल में होटल विराट मानचित्र को दरकिनार करके बनाया गया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती के बाद तत्कालीन आवास आयुक्त रणवीर प्रसाद को जांच सौँपी गई थी।

    2010 से 2017 तक प्रवर्तन विभाग में तैनात रहे अभियंताओं की सूची मांगी थी। पूर्व आवास आयुक्त ने एलडीए के दो अधिशासी अभियंताओं सहित 21 अधिकारियों व कर्मचारियों को दोषी पाकर सभी पर दंड लगाया उन लोगों की पेंशन से कटौती करके वसूली की गई थी।