Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    शेयर बाजार में निवेश के नाम पर व्यवसायी समेत दो लोगों से ऐंठी रकम, साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज

    Updated: Tue, 07 Apr 2026 09:57 PM (IST)

    लखनऊ में शेयर बाजार में निवेश के नाम पर दो व्यक्तियों से 23.46 लाख रुपये की धोखाधड़ी हुई है। जालसाजों ने व्हाट्सएप ग्रुप और फर्जी डीमैट अकाउंट के माध् ...और पढ़ें

    सांकेत‍िक तस्‍वीर।

    सांकेत‍िक तस्‍वीर।

    HighLights

    1. शेयर बाजार में निवेश के नाम पर 23.46 लाख की ठगी।

    2. व्हाट्सएप ग्रुप और फर्जी डीमैट अकाउंट का इस्तेमाल किया गया।

    3. लखनऊ साइबर क्राइम थाने में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज।

    जागरण संवाददाता, लखनऊ। शेयर बाजार में निवेश के नाम पर जालसाजों ने व्यवसायी समेत दो लोगों से 23.46 लाख रुपये ऐंठ लिए। साइबर ठगों ने वाट्सएप ग्रुप पर जोड़कर डीमैट अकाउंट खोला और निवेश कराया। मुनाफा न मिलने पर पीड़ितों ने छानबीन की तो ठगी का पता चला। मंगलवार को पीड़ितों ने साइबर क्राइम थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। इंस्पेक्टर बृजेश कुमार यादव ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।


    चिनहट के मटियारी निवासी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी राकेश मिश्र ने बताया कि 30 जनवरी को उन्हें एक वाट्सएप ग्रुप वीआइपी 25 स्टाक शेयरिंग ग्रुप पर जोड़ा गया। उसपर पहले शेयर मार्केट के बारे में पढ़ाया जाता था। उसके बाद निवेश पर मुनाफे का झांसा दिया गया।

    जाल में फंसे पीड़ित ने 23 फरवरी से 12 मार्च के बीच दिए गए खातों में दस बार में 11.50 लाख रुपये ट्रांसफर किए थे। मुनाफा होने पर पीड़ित ने विड्राल का प्रयास किया तो उन्हें रोक दिया गया। शक होने पर पीड़ित राकेश ने बेंगलुरु में आइटी कंपनी में नौकरी कर रहे बेटे से बात की तो पता चला कि उनके साथ ठगी हुई है।

    वहीं, अलीगंज के इंदिरानगरी निवासी रविंद्र कुमार तिवारी ने बताया कि कुछ दिन पहले उनका नंबर जय ब्रोकिंग आनलाइन ट्रेडिंग ग्रुप में जोड़ा गया। ग्रुप पर शेयर ट्रेडिंग में निवेश पर मुनाफे का झांसा दिया गया। जाल में फंसाकर लिंक भेजकर एक ट्रेडिंग एप डाउनलोड करायी गयी।

    खबरें और भी

    पीड़ित ने छोटी रकम निवेश की तो डीमैट अकाउंट में मुनाफा दिखा, जिसके बाद पीड़ित से एक्सिस बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, यस बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडसइंड बैंक और करूर वैश्य बैंक में कई बार में 11.96 लाख रुपये जमा करा लिए गए। इसके बाद उन्हें 16 जनवरी को ग्रुप से बाहर कर दिया गया। ठगी का एहसास होने पर पीड़ित रविंद्र कुमार तिवारी ने साइबर थाने में रिपोर्ट दर्ज करायी है।

    यह भी पढ़ें- योगी कैब‍िनेट का बड़ा फैसला, ट्रैफ‍िक नियम तोड़ने पर वाहन चालकों के केस अब नहीं होंगे निरस्त