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    लखनऊ में आग के मुहाने पर कई और बस्तियां, जिम्मेदार मौन

    Updated: Thu, 30 Apr 2026 09:00 AM (IST)

    लखनऊ के विकास नगर में भीषण अग्निकांड के 15 दिन बाद भी अन्य झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों में आग का खतरा बरकरार है। अवैध बिजली कनेक्शन, एलपीजी सिलेंडर और ज्वल ...और पढ़ें

    लवकुश नगर के निकट बसी झुग्गी-झोपड़ी l जागरण

    लवकुश नगर के निकट बसी झुग्गी-झोपड़ी l जागरण

    HighLights

    1. विकास नगर अग्निकांड के बाद भी खतरा बरकरार।

    2. अवैध बिजली कनेक्शन, एलपीजी सिलेंडर का उपयोग।

    3. हजारों जिंदगियां आग के मुहाने पर खड़ी।

    जागरण संवाददाता, लखनऊ। विकास नगर में आग की चपेट में आने से 300 से अधिक झुग्गी-झोपड़ियां जलकर रखा हो गईं थी, जबकि दो बच्चों की जान चली गई थी। इस अग्निकांड के पीड़ितों के जख्म अब भी ताजा हैं, लेकिन सरकारी महकमा इसे भूल चुका है। इस हादसे के 15 दिन बाद जब जागरण टीम ने विकास नगर के आसपास, इंदिरा नगर के सुगामऊ व कुकरैल बंधा समेत कई इलाकों में बसी झुग्गी-झोपड़ियों की पड़ताल की तो वहां बांस-बल्लियों के सहारे बिजली के तार खींचे दिखाई पड़े।

    इसके साथ ही एलपीजी सिलिंडरों का इस्तेमाल और कबाड़ का कारोबार होता दिखा। असल बात तो है कि इन सबसे जिम्मेदार अनजान हैं। यहां फैली अव्यवस्था से ये बस्तियां आग के मुहाने पर खड़ी हैं। इन इलाकों में करीब 500 के करीब झुग्गी-झोपड़ियां बनीं हुईं हैं, जिसमें दो हजार से अधिक लोग रह रहे हैं। विकासनगर के आसपास और भी झुग्गी-झोपडियां बसी हैं, जहां बिजली के तारों का मकड़जाल है।

    अग्निशमन विभाग की रिपोर्ट के बावजूद जिम्मेदार इन बस्तियों को हटाने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। इसी तरह कुकरैल बंधा स्थित लवकुश नगर के पास खाली प्लाट में लगभग सौ झोपड़ियां बनीं हुईं हैं। यहां रहने वाले बांस और बल्लियों के सहारे तार दौड़ाकर बिजली जला रहे हैं। कई झोपड़ियों में बिजली के उपकरण व एलपीजी सिलिंडरों का भी इस्तेमाल हो रहा है।

    तिरपाल, बांस व पन्नियों से बनी झोपड़ियों में एक चिंगारी भी हादसे का कारण बन सकती है। सुगामऊ में मानस सिटी के पास एक खाली प्लाट में कई झोपड़ियां बनी हुईं हैं। इनमें रहने वालों को बिजली विभाग ने बकायदे खंभे से कनेक्शन तक दे दिया है। यहां एक साथ कई मीटर लगे हुए हैं।

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    यही हाल इंदिरा नगर में गंगा एन्क्लेव, पाम पैराडाइज के पास का भी है। इनके आसपास पड़े खाली प्लाटों पर भी लोगों ने झोपड़ियां बनाकर बसेरा बना लिया है। अगर हादसा हुआ तो खामियाजा इनके पास बनी कालोनियों में रहने वाले लोगों को भुगतना पड़ेगा।

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    कई टन प्लास्टिक सामग्री मौजूद
    टीम गंगा एन्क्लेव के पास बनी झोपड़ियों में पहुंची तो इनमें सैकड़ों टन प्लास्टिक की बोतल, डिब्बे और अन्य सामान भरा मिला। इसके अलावा अन्य ज्वलनशील सामान भी रखा दिखाई दिया, जिससे थोड़ी सी आग भी विकराल रूप धारण कर सकती है।

    फिर से बन गई झोपड़ियां
    विकास नगर में 15 अप्रैल को जिस जगह आग लगी थी उसी जगह फिर से झोपड़ियां बनकर तैयार हो गईं हैं और यहां बड़ी संख्या में लोग रहने लगे। लोगों का कहना है कि अज्ञात व्यक्ति यहां पर झोपड़ियों में नंबर के हिसाब से जगह उपलब्ध करा रहा है। जिस जगह अग्निकांड हुआ वहां जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं।

    सभी फायर स्टेशन अफसरों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वह अपने क्षेत्र में उन इलाकों को चिन्हित करें जहां पर अवैध रूप से झुग्गी-झोपड़ियां बनी हैं। इलाके चिन्हित होने के बाद संबंधित विभागों को दमकल विभाग की तरफ से पत्र लिखकर कार्रवाई के लिए अवगत कराया जाएगा। -अंकुश मित्तल, मुख्य अग्निशमन अधिकारी

    जो आप क्षेत्र बता रहे हैं अगर वहां कनेक्शन दिए गए हैं और केबल बांस-बल्लियों के सहारे ले जाए गए हैं तो वह गलत है। मौके पर टीम भेजकर जांच करा ली जाएगी, भविष्य में इसे योजना में शामिल करते हुए खंभे लगवाएं जाएंगे। -सुशील गर्ग, मुख्य अभियंता, गोमती नगर जोन