कानपुर एक्सप्रेसवे के आउटर रिंग रोड निर्माण में भी बरती गई थी अनदेखी, पीएनसी को मिला था नोटिस
एनएचएआई ने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे बनाने वाली पीएनसी इन्फ्राटेक को नान-परफार्मर श्रेणी में डालने की सिफारिश की है, जबकि कंपनी पर पहले भी खामियों के बा ...और पढ़ें

कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, लखनऊ। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे बनाने वाली कंपनी पीएनसी इन्फ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड को भले ही नान परफार्मर की श्रेणी में डालने को लेकर एनएचएआइ ने मोर्थ को संस्तुति भेज दी है, लेकिन बीते दो वर्षों पर नजर डालें तो एनएचएआइ इस कंपनी की करतूतों पर लगातार मेहरबान दिखाई देता है।
आउटर रिंग रोड की ही बात करें तो अगस्त 2024 में इस लखनऊ आउटर रिंग रोड को बनाते वक्त भी एनएचएआइ ने पीएनसी को नोटिस थमाया था। उस समय कंपनी ने बेहटा गांव से सीतापुर रोड तक (31.74 किमी.) तक फोर लेन सड़क बनाने का काम किया था, जिसमें कई खामियां मिली थी।
तब भी मामला नोटिस तक ही सीमित रह गया और एनएचएआइ ने कार्रवाई को लेकर कुछ भी जानकारी सार्वजनिक नहीं की। हालांकि सूत्र बताते हैं कि यह नोटिस ऊंचाहार से आने वाली फ्लाई ऐश को लाने में पीएनसी के ट्रकों से सड़क खराब होने को लेकर दिया गया था।
अब एक बार फिर स्थिति उसी मोड़ पर आ गई है जब कानपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण में भी पीएनसी इन्फ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए हैं।
सूत्र बताते हैं कि यह कार्रवाई एक सप्ताह पहले ही हो चुकी है, जिसे एनएचएआइ लखनऊ परिक्षेत्र के क्षेत्रीय अधिकारी गौतम विशाल ने बुधवार को पत्रकार वार्ता में बताया। उधर पीएनसी ने जवाब देने के लिए समय सीमा बढ़ाने के लिए एनएचएआइ को पत्र लिखा है।
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एनएचएआइ का खराब सड़क बनाने वाली कंपनियों से पुराना नाता रहा है। इसमें 105 किमी. आउटर रिंग रोड को बनाने वाली डीआर अग्रवाल इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड सबसे आगे है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के ड्रीम प्रोजेक्टों में शामिल रहे आउटर रिंग रोड को दो साल में बनाना था और डीआर अग्रवाल कंपनी ने साढ़े चार साल लगा दिए थे।
एनएचएआइ के तत्कालीन परियोजना निदेशक सौरभ चौरसिया ने विलंब व गुणवत्ता की अनदेखी करने पर डीआर अग्रवाल इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड पर 25 करोड़ का जुर्माना (एलडी यानी लिक्विडिटी डैमेज) लगाया था।
इसमें सड़क के निरीक्षण में खामियां मिली थी, इस पर 1.22 करोड़ का अलग से जुर्माना लगाया था। यही नहीं परियोजना निदेशक को निरीक्षण के दौरान सीतापुर रोड से कुर्सी रोड के बीच कई स्थानों पर गड्ढे मिले थे। इसमें तीसरी कंपनी सद्भावना इंजीनियर्स लि.को भी नोटिस दी गई थी। अब इन सभी कंपनियों के खिलाफ क्या कार्रवाई चल रही है, इस पर एनएचएआइ चुप्पी साधे हुए है?
वहीं पीएनसी को एक तरफ नान परफार्मर का नोटिस दिया गया है तो दूसरी तरफ पीएनसी कंपनी अपनी वेबसाइट पर दावा करती है कि उसने मध्यप्रदेश में जावरा-नयागांव का 127 किमी. का फोर लेन, ग्वालियर-भिंड एनएच 92, यूपी में गाजियाबाद-अलीगंज सेक्शन, कानपुर-कबराई सेक्शन, आगरा- ग्वालियर सेक्शन, पंजाब में पानीपत-जालांधर सेक्शन सहित हरियाणा और कर्नाटक जैसे राज्यों में राष्ट्रीय राजमार्ग व एक्सप्रेसवे बनाने का अनुभव है। यही नहीं एयरपोर्ट रनवे, ब्रिज निर्माण, पावर सेक्टर में भी कंपनी अभी काम कर रही है। इस संबंध में जब पीएनसी के प्रोजेक्ट मैनेजर वी कुंडू से बात करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।