क्या है साइलेंट किलर बन रही पल्मोनरी एम्बोलिज्मनोट? प्रतीक यादव की मौत के बाद चर्चा में आई बीमारी, हार्ट अटैक जितनी घातक
समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के पुत्र प्रतीक यादव की असामयिक मृत्यु के बाद 'मैसिव पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज्म' बीमारी चर्चा में है। इस ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, लखनऊ। समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के पुत्र प्रतीक यादव की असामयिक मृत्यु के बाद ‘मैसिव पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज्म’ नामक बीमारी चर्चा में आ गई है।
चिकित्सा विशेषज्ञ इसे ‘साइलेंट किलर’ मानते हैं। यह बीमारी तब होती है, जब शरीर के किसी हिस्से (अक्सर पैरों) में बना खून का थक्का फेफड़ों की रक्त वाहिकाओं में जाकर फंस जाता है। इससे हृदय और फेफड़ों का संपर्क कट जाता है और आक्सीजन न मिलने के कारण व्यक्ति की तत्काल मृत्यु हो सकती है।
प्रतीक यादव की मौत के बाद चर्चा में बीमारी, हार्ट अटैक के बराबर है इसकी घातकता
शरीर सौष्ठव के शौकीन प्रतीक अपनी फिटनेस को लेकर बहुत सजग रहते थे। उनको इसी वर्ष अप्रैल माह में पल्मोनरी एम्बोलिज्म का पहला गंभीर अटैक आया था। उस समय एक निजी अस्पताल में उपचार के 24 घंटे बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बीमारी में दवाओं का नियमित सेवन और डॉक्टर की निगरानी अनिवार्य है। डाक्टर की सलाह पर उन्होंने जिम और एक्सरसाइज भी बंद कर दी थी, जिससे जोखिम कई गुना बढ़ गया। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने एंटीकोआगुलेंट (खून पतला करने वाली) दवाएं लेना भी बंद कर दिया था, जो उनके लिए जानलेवा साबित हुआ।
क्या है यह बीमारी
डॉ .राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष प्रो. अजय वर्मा के अनुसार, पल्मोनरी एम्बोलिज्म कोई बहुत प्रचलित बीमारी नहीं है। इसकी घातकता हार्ट अटैक के बराबर है। इसमें मृत्युदर 50 प्रतिशत से अधिक है। जब पैरों की गहरी नसों में खून का थक्का बनता है, तो इसे डीप वेन थ्रोम्बोसिस (डीवीटी) कहते हैं।
खबरें और भी
यदि यह थक्का टूटकर फेफड़ों तक पहुंच जाए तो रक्त प्रवाह बाधित हो जाता है और शरीर को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। इससे अचानक कार्डियक अरेस्ट या हार्ट फेल्योर हो सकता है। मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, धूमपान, सर्जरी और लंबे समय तक शारीरिक निष्क्रियता इसके मुख्य कारण हैं।
चेतावनी
बिना डॉक्टरी सलाह के प्रोटीन पाउडर और सप्लीमेंट लेना खतरनाक हो सकता है। इससे न केवल किडनी पर दबाव बढ़ता है, बल्कि खून के थक्के जमने और हार्ट अटैक का खतरा भी कई गुना बढ़ता है। बाजार में मौजूद कई सप्लीमेंट में भारी धातुएं और स्टेरायड पाए जाते हैं, जो शरीर की प्राकृतिक कार्यप्रणाली को बिगाड़ देते हैं।
विशेषज्ञों की सलाह है कि सप्लीमेंट की बजाय दाल, दूध, चने, राजमा, सोयाबीन और अंडे जैसे प्राकृतिक प्रोटीन स्रोतों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
इसका रखें ध्यान
- यदि पैर के किसी एक हिस्से में सूजन, दर्द या लाली दिखे, तो उसे नजरअंदाज न करें।
- लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठकर काम करने वाले लोगों हर एक घंटे में जरूर टहलें।
- पर्याप्त पानी पीना और वजन नियंत्रित रखना इस जानलेवा थक्के को रोकने के सबसे सरल उपाय है।-
ये है मुख्य लक्षण
पल्मोनरी एम्बोलिज्म के लक्षणों में अचानक सांस फूलना, सीने में तेज दर्द और बेहोशी शामिल है, ऐसी स्थिति में बिना देर किए विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए, ताकि मरीज की जान बचाई जा सके।