यूपी चुनाव से पहले सपा ने खत्म किया I-PAC के साथ करार, अखिलेश यादव बोले- हमारे पास फंड नहीं
Samajwadi Party: प्रशांत किशोर ने 2011 में संयुक्त राष्ट्र से इस्तीफा देकर I-PAC बनाई। उन्होंने कई बड़े चुनावी अभियानों को सफलता दिलाई। ...और पढ़ें

सपा मुख्यालय में संवाददाताओं को संबोधित करते सपा प्रमुख अखिलेश यादव
HighLights
पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के परिणाम के बाद सपा मुखिया का फैसला
सपा ने 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिए कंपनी से किया था करार
प्रशांत किशोर ने शुरू की थी पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म आई-पैक
डिजिटल डेस्क, लखनऊ। लोकसभा और विधानसभा चुनाव में 12 वर्ष में भाजपा सहित पांच राजनीतिक दलों के लिए छह राज्यों में चुनावी रणनीति तैयार करने वाली कंपनी आई-पैक के साथ समाजवादी पार्टी ने करार समाप्त कर लिया है। विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु की पराजय के सपा मुखिया अखिलेश यादव ने यह फैसला किया है।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मीडिया के समझ कहा कि समाजवादी पार्टी के पास धन की कमी है। इसी कारण हमने पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म आई-पैक के साथ करार समाप्त करने का फैसला किया है। उन्होंने उन अटकलों को खारिज कर दिया कि कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने की वजह हाल के चुनावी नतीजे थे।
अखिलेश यादव ने कहा कि पार्टी ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले थोड़े समय के लिए I-PAC को काम पर रखा था, लेकिन इस व्यवस्था को जारी नहीं रख सके। उन्होंने कहा कि हां, हमारा इस कंपनी के साथ करार हुआ था। उन्होंने हमारे साथ कुछ महीनों तक काम किया, लेकिन हम इसे जारी नहीं रख पा रहे हैं। हमारे पास उस तरह का फंड नहीं है, कि हम चुनाव की योजना बनाने पर खर्च कर सकें।
सपा प्रमुख ने पॉलिटिकल कंसल्टेंसी के इकोसिस्टम पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि हमने सोचा था कि अगर हमें किसी 'जीत दिलाने वाली एजेंसी' के साथ काम करना है, तो ऐसी कई बड़ी कंपनियां हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने सर्वे कराने, दूसरी फर्म को हायर करने, सोशल मीडिया कंपनी रखने और यहां तक कि दूसरी पार्टियों के खिलाफ नेगेटिव कैंपेनिंग के लिए एजेंसियों को काम पर रखने का सुझाव दिया था। एक-दो और कंपनियां भी हैं, जिनके नाम अभी तक सामने नहीं आए हैं।
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यादव ने इस बात को खारिज किया कि उनका आई-पैक के साथ डील खत्म करने का फैसला पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में हाल के चुनावी नतीजों से प्रभावित था। ऐसी कोई बात नहीं है। बेबुनियाद रिपोर्टों के आधार पर सवाल न पूछें। यह सच नहीं है। उन्होंने कहा कि समझौता खत्म करने की वजह, हमारे पास पर्याप्त फंड नहीं है। अगर आप (मीडिया) हमें फंड दें, तो हम दूसरी कंपनी हायर कर सकते हैं।
उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने कहा कि कुछ लोगों ने हमें चुनाव जितवाने वाली कंपनी के बारे में बताया है। सलाह दी है कि सी-वोटर्स से सर्वे कराइए। एक AVM कंपनी है, उसको साथ रखिए। सोशल मीडिया पर किसी के खिलाफ नकारात्मक प्रचार करना हो तो 360 डिग्री कंपनी से जुड़िए। उसको फंडिंग करिए। सपा मुखिया ने भाजपा सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि सोच रहे हैं कि नेशन विथ नमो, जेविस जैसी कंपनियों से बात कर ली जाए। हम लोग बैठकर डील बनाएंगे। उनसे कहेंगे कि अगर हमारी सरकार बनवा देंगे तो सूचना विभाग का 90 फीसदी बजट आप को दिलवा देंगे।
अखिलेश ने दिसंबर, 2025 में कंपनी के पदाधिकारियों के साथ दिल्ली में पहली मीटिंग की। जनवरी में जब बंगाल गए तो दोबारा मुलाकात हुई। इसके बाद सपा ने I-PAC को हायर किया। I-PAC को चुनावी अभियान के साथ-साथ बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने, वोटर टर्नआउट बढ़ाने के लिए एप-बेस्ड टूल्स का इस्तेमाल करने और विपक्षी पार्टियों की कमजोरियों पर फोकस करने का काम दिया गया था। खिलेश के लिए डेटा एनालिसिस के आधार पर रणनीति बनाने का काम मुंबई की कंपनी शो टाइम कंसल्टिंग कर रही है, जबकि सर्वे का काम कर्नाटक की एक कंपनी के पास है।
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चुनावी अभियानों को मैनेज करती है कंपनी
I-PAC एक पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म है जो पूरे देश में बड़े चुनावी अभियानों को मैनेज करती है। चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर भी इस संगठन से जुड़े थे, उन्होंने वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए काम किया था।
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कांग्रेस ने 2017 के पंजाब व उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव, जेडीयू ने 2015 के विधानसभा चुनाव, वाईएसआर कांग्रेस ने 2019 व 2024 के आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव, आम आदमी पार्टी ने 2020 व 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव, डीएमके ने 2021 व 2026 के विधानसभा चुनाव और तृणमूल कांग्रेस ने 2024 के लोकसभा व 2026 के विधानसभा चुनाव के लिए आई-पैक के साथ करार किया था।