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    संभल हिंसा मामले में जांच आयोग ने पेश की रिपोर्ट, सपा सांसद समेत कई बड़े नाम आए सामने

    Updated: Wed, 05 Aug 2026 09:06 PM (IST)

    न्यायिक आयोग की रिपोर्ट में संभल जामा मस्जिद सर्वेक्षण हिंसा को पूर्व नियोजित साजिश बताया गया है। रिपोर्ट में सपा सांसद जिया-उर-रहमान बर्क सहित कई लोग ...और पढ़ें

    हिंसा का फाइल फोटो

    हिंसा का फाइल फोटो

    HighLights

    1. संभल हिंसा पूर्व नियोजित साजिश, न्यायिक रिपोर्ट में खुलासा।

    2. सपा सांसद जिया-उर-रहमान बर्क सहित कई नाम शामिल।

    3. पुलिस पर पथराव, गोलीबारी, 28 पुलिसकर्मी घायल हुए।

    राज्य ब्यूरो, लखनऊ। संभल के जामा मस्जिद के सर्वेक्षण के दौरान हुई हिंसा के लिए गठित न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट बुधवार को विधानमंडल के पटल पर रख दी गई। रिपोर्ट में 24 नवंबर वर्ष 2024 को हुई हिंसा को पूर्व नियोजित साजिश का परिणाम बताया गया है। साथ ही आयोग ने स्पष्ट किया है कि सर्वेक्षण को लेकर मुस्लिम समुदाय के बीच भ्रामक जानकारी फैलाई गई, जिसके बाद बड़ी संख्या में लोग मस्जिद के बाहर इकट्ठा हो गए और हिंसा भड़क गई।

    रिपोर्ट में आयोग ने समाजवादी पार्टी के सांसद जिया-उर-रहमान बर्क, विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहेल इकबाल, एडवोकेट जफर अली, जामा मस्जिद के सचिव मशहूद अली फारुकी व मस्जिद प्रबंधन समिति के अन्य सदस्यों सहित कई लोगों की भूमिका का भी उल्लेख किया है।

    संभल हिंसा की जांच के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश देवेंद्र कुमार अरोड़ा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन किया गया था। पूर्व आईएएस अधिकारी अमित मोहन प्रसाद और पूर्व डीजीपी एके जैन को आयोग का सदस्य बनाया गया था।

    आयोग ने हिंसा की विस्तृत जांच के बाद पिछले दिनों राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। जांच रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि हिंसा से पहले भीड़ जुटाकर माहौल बनाया गया था। रिपोर्ट के अनुसार सर्वेक्षण की कार्रवाई को रोकने के लिए बड़ी संख्या में लोगों को मौके पर बुलाकर उन्हें भड़काया गया, जिससे स्थिति और अधिक गंभीर हो गई।

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    साथ ही भड़काऊ भाषण और नारेबाजी ने भी माहौल को हिंसक बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। भड़काऊ भाषण व नारेबाजी से भीड़ का आक्रोश बढ़ा और हालात नियंत्रण से बाहर हो गए। जांच आयोग के मुताबिक, हिंसा के दौरान मौके पर पहुंची भीड़ सिर्फ विरोध प्रदर्शन के लिए नहीं आई थी, बल्कि भीड़ में शामिल लोग हथियारों और पत्थरों को साथ लेकर आए थे।

    भीड़ ने पुलिस और प्रशासन पर पथराव किया और गोलीबारी और आगजनी की घटनाएं भी हुईं, जिससे पूरे इलाके में तनाव फैल गया।

    पुलिस की गोली से नहीं हुई थी लोगों की मौत

    रिपोर्ट के अनुसार संभल हिंसा में मारे गए चार लोगों को लगी गोलियां पुलिस की नहीं थीं। रिपोर्ट में पुलिस बल को हुए नुकसान का भी उल्लेख किया गया है। इस हिंसा में 28 पुलिसकर्मी घायल हुए थे, जिनमें सात पुलिसकर्मियों को गोली लगी थी।

    रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि उपद्रवियों ने पुलिस के हथियार और अन्य सरकारी सामान लूटने की कोशिश की थी। आयोग ने इसे कानून-व्यवस्था को गंभीर चुनौती का मामला बताया है। आयोग के अनुसार स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण थी, इसके बाद भी जिला और पुलिस प्रशासन ने संयम बनाए रखा और हालात को नियंत्रित किया।

    कानून व्यवस्था को और मजबूत बनाने की सिफारिश

    आयोग ने जांच रिपोर्ट में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने की सिफारिश की है। साथ ही कहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रशासनिक व्यवस्था को और प्रभावी बनाना होगा।

    आयोग ने सामाजिक सौहार्द बनाए रखने और विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास कायम रखने पर भी जोर दिया है। आयोग ने कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की है।

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