यूपी में अब फार्मर आईडी के आधार पर ही मिलेगी खाद, ID न होने पर देना होगा जोत संबंधी रिकॉर्ड
उत्तर प्रदेश में अब किसानों को उनकी फार्मर आईडी या जोत संबंधी अभिलेखों के आधार पर ही उर्वरक मिलेगा। यह कदम कालाबाजारी रोकने और प्रति हेक्टेयर अधिकतम प ...और पढ़ें

अब फार्मर आईडी के आधार पर ही मिलेगी खाद।
HighLights
उर्वरक वितरण अब फार्मर आईडी पर आधारित।
प्रति हेक्टेयर 5 बोरी डीएपी, 7 बोरी यूरिया।
कालाबाजारी रोकने हेतु उठाया गया कदम।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रदेश में किसानों को उर्वरक का वितरण अब उनकी जमीन के हिसाब से किया जाएगा। इसमें प्रति हेक्टेयर प्रति हेक्टेयर अधिकतम पांच बोरी डीएपी और सात बोरी यूरिया का वितरण हाेगा।
कृषि विभाग ने किसानों की फार्मर आईडी के साथ उनके जोत संबंधी अभिलेखों के आधार पर ही उर्वरक बिक्री के निर्देश दिए हैं। विभाग का दावा कि प्रदेश में प्रर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध है और यह कदम कालाबाजारी रोकने के लिए उठाया गया है।
कृषि विभाग के अनुसार वर्तमान में प्रदेश में 13.28 लाख टन यूरिया, 5.23 लाख टन डीएपी, 4.81 लाख टन एनपीके, 3.69 लाख टन एसएसपी और 93 हजार टन एमओपी उपलब्ध है, जो कि गत वर्ष की तुलना में अधिक है।
खरीफ के लिहाज से भारत सरकार द्वारा लगातार आवंटन कर उर्वरकों की आपूर्ति की जा रही है। अनुदानित उर्वरक का दुरुपयोग रोकने के लिए निर्णय लिया गया है कि खाद का विक्रय किसान पहचान पत्र (फार्मर आईडी) उपलब्ध कराने वाले कृषकों को उनकी जोत संबंधी अभिलेखों के आधार पर ही किया जाएगा।
किसानों से अपील की गई है कि आसानी से उर्वरक खरीदने के लिए फार्मर आईडी के साथ विक्रय केंद्रों पर पहुंचे। हालांकि जिन किसानों की फार्मर आईडी नहीं है, उनकी जोत संबंधी अभिलेखों के आधार पर खाद दी जाएगी।
किसान, कृषि वैज्ञानिकों द्वारा संस्तुत उर्वरकों की मात्रा के अनुसार संतुलित मात्रा में प्रयोग करें। दुरुपयोग रोकने के लिए जिलों में समितियों का गठन कर बिक्री पर निगरानी रखी जा रही है।
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