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    Explainer: यूपी का नया OBC आयोग पंचायत चुनाव के लिए जरूरी फैसला क्यों? 2027 के इलेक्शन से भी कनेक्शन

    Updated: Tue, 19 May 2026 02:40 PM (GMT+05:30)

    उत्तर प्रदेश सरकार ने पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण तय करने के लिए 'समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग' के गठन को मंजूरी दी है। यह आयोग सुप्र ...और पढ़ें

    जागरण ग्राफिक्स

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    HighLights

    1. यूपी सरकार ने पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी दी।

    2. आयोग पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण का निर्धारण करेगा।

    3. सुप्रीम कोर्ट के 'ट्रिपल टेस्ट' का पालन किया जाएगा।

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली/लखनऊ। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराने की दिशा में योगी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य कैबिनेट ने सोमवार, 18 मई को 'उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग' (UP State Dedicated Backward Classes Commission) के गठन को मंजूरी दे दी है। यह आयोग पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण को तय करने का काम करेगा।

    यह फैसला सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाई कोर्ट के उन निर्देशों के बाद आया है, जिनमें स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण लागू करने की बात कही गई थी।

    दरअसल, इसी साल मार्च में एक याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आयोग के गठन में हो रही देरी पर सख्त रुख अपनाया था। कोर्ट ने पूछा था कि क्या मौजूदा पंचायतों का 5 साल का कार्यकाल 26 मई को खत्म होने से पहले यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी?

    क्यों जरूरी है इस आयोग का गठन?

    अदालतों ने साफ कर दिया है कि राज्य सरकारें स्थानीय चुनावों में ओबीसी को सीधे राजनीतिक आरक्षण नहीं दे सकतीं। इसके लिए उन्हें एक कड़े "ट्रिपल टेस्ट" (Triple Test) से गुजरना होगा, जिसमें शामिल हैं:

    • एक समर्पित आयोग का गठन करना।
    • पिछड़ेपन की स्थिति जानने के लिए व्यावहारिक (एम्पायरिक) जांच करना।
    • संवैधानिक सीमाओं के भीतर आरक्षण का अनुपात तय करना।

    इस नए आयोग के गठन के साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार ने कानूनी तौर पर चुनाव कराने का पहला कदम उठा लिया है।

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    अब ओबीसी आयोग ही यूपी पंचायत चुनाव में आरक्षण की सीमा को तय करेगा। यूपी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव ओबीसी आयोग सभी 75 जिलों में बैठक, जातिवार और आर्थिक आंकड़ों की समीक्षा के बाद ही आरक्षण संबंधी अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के आधार पर पंचायत चुनाव आरक्षण की जो सिफारिशें आएंगी, उसके आधार पर आगे की चीजों को तय करेगा।

    कैबिनेट में पास हुए प्रस्तावों की जानकारी देते हुए वित्त एवं संसदीय कार्यमंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि इस आयोग का उद्देश्य ग्रामीण निकायों में पिछड़े वर्गों की वास्तविक स्थिति का समकालीन एवं अनुभवजन्य अध्ययन कर पंचायतवार आनुपातिक आरक्षण सुनिश्चित करना है।

    यह आयोग क्या करेगा?

    1. यह आयोग गांवों में जाकर पिछड़े वर्ग की सामाजिक स्थिति और उनकी आबादी का गहराई से अध्ययन करेगा।
    2. आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय होगा कि किस पंचायत में ओबीसी के लिए कितनी सीटें आरक्षित होंगी।
    3. सरकार चाहती है कि आरक्षण का आधार इतना मजबूत और सटीक हो कि उसे कोर्ट में चुनौती न दी जा सके (इसे 'ट्रिपल टेस्ट' की प्रक्रिया कहा जाता है)।

    ट्रिपल टेस्ट क्या होता है?

    'ट्रिपल टेस्ट' (Triple Test) सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित एक त्रि-स्तरीय मानक है। इसे यह सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है कि स्थानीय निकायों (नगर निगम या पंचायत) में ओबीसी (OBC) आरक्षण संवैधानिक रूप से वैध हो और किसी अन्य वर्ग के हक का उल्लंघन न करे।

    Triple Test

    अतीत में कई बार आरक्षण के फैसलों को कोर्ट में चुनौती दी गई क्योंकि सरकारें बिना किसी ठोस डेटा के आरक्षण लागू कर देती थीं। 'ट्रिपल टेस्ट' का पालन करने से आरक्षण को एक मजबूत कानूनी आधार मिलता है, जिससे चुनाव के बाद या चुनाव के दौरान कोर्ट द्वारा रोक लगने की संभावना कम हो जाती है।

    क्या है इसका बड़ा राजनीतिक महत्व?

    उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव बेहद बड़े स्तर पर होते हैं। इसमें पंचायत के अलग-अलग स्तरों पर 8 लाख से ज्यादा पद शामिल हैं। उदाहरण के लिए, पिछले 2021 के चुनावों में 58,189 ग्राम पंचायतों के 7.32 लाख वार्डों में चुनाव हुए थे। 826 क्षेत्र पंचायतों के 75,855 वार्डों के लिए वोट डाले गए थे। 75 जिला पंचायतों के 3,051 सदस्यों का चुनाव हुआ था।

    भले ही राज्य में ये स्थानीय चुनाव पार्टियों के आधिकारिक प्रतीकों (सिंबल) पर नहीं लड़े जाते, लेकिन 2022 के विधानसभा चुनावों में इन जमीनी प्रतिनिधियों की भूमिका बहुत बड़ी थी। यही वजह है कि 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले, राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियां इन पंचायत चुनावों को अपनी ताकत दिखाने और जमीन मजबूत करने का एक बड़ा जरिया मान रही हैं।

    कैसा होगा आरक्षण का गणित?

    संविधान के अनुच्छेद 243D और राज्य के कानूनों के तहत पंचायत निकायों में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण की व्यवस्था है।

    • SC और ST वर्ग को उनकी आबादी के अनुपात में आरक्षण मिलता रहेगा।
    • OBC वर्ग के लिए पंचायतों में आरक्षण कुल सीटों के 27% पर सीमित (कैप) रहेगा।
    • प्रविधानों के अनुसार, पिछड़े वर्गों की सटीक जनसंख्या के आंकड़े उपलब्ध नहीं होने पर प्रदेश सरकार सर्वेक्षण के माध्यम से उनकी जनसंख्या निर्धारित करा सकती है।

    कौन-कौन होगा आयोग में शामिल?

    इस आयोग में कुल 5 सदस्य होंगे, जिन्हें पिछड़ा वर्ग के मुद्दों की गहरी समझ और विशेषज्ञता होगी। इनकी नियुक्ति राज्य सरकार करेगी। आयोग के अध्यक्ष हाई कोर्ट के एक रिटायर्ड जज होंगे। अधिकारियों के मुताबिक, अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल सामान्य तौर पर 6 महीने का होगा।

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