प्रधानों को प्रशासक बनाने पर HC ने यूपी सरकार से मांगा जवाब, ब्लॉक प्रमुखों और पंचायत अध्यक्षों को भी लगा झटका
इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने के यूपी सरकार के फैसले को असंवैधानिक बताने के बाद पंचायती ...और पढ़ें
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पंचायत चुनाव मामले में सरकार मजबूती से रखेगी अपना पक्ष। AI जेनरेटेड फोटो
HighLights
हाई कोर्ट ने प्रधानों को प्रशासक बनाने का फैसला असंवैधानिक बताया।
पंचायती राज विभाग हाई कोर्ट के आदेश का गहन अध्ययन कर रहा है।
सरकार इस मामले में अपना पक्ष मजबूती से रखने की तैयारी में।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त किए जाने के प्रदेश सरकार के फैसले को संविधान के विपरीत बताते हुए हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किए जाने के बाद पंचायती राज विभाग ने हाई कोर्ट के आदेश का अध्ययन कराना शुरू कर दिया है।
हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद जहां प्रशासक बने निवर्तमान ग्राम प्रधानों की मुसीबतें बढ़ती नजर आ रही है, वहीं अगले महीने कार्यकाल समाप्त होने पर प्रशासक बनने का सपना देख रहे ब्लॉक प्रमुखों व जिला पंचायत अध्यक्षों को भी झटका लगा है। कहा तो यह जा रहा है कि सरकार अपने फैसले से पीछे नहीं हटेगी, हर स्तर पर अध्ययन के बाद मजबूती से अपनी बात रखेगी।
हाई कोर्ट के आदेश पर पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा है कि इस मामले में सरकार अपना पक्ष मजबूती के साथ रखेगी। पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव अनिल कुमार ने कहा है कि हाईकोर्ट के आदेश का अध्ययन कराया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि 26 मई को ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही प्रदेश सरकार ने निवर्तमान प्रधानों को ही प्रशासक बनाए जाने का आदेश जारी कर दिया था। जिसके बाद से सभी निवर्तमान प्रधान प्रशासक के रूप में अपनी पंचायत में रूटीन कार्यों को करा रहे हैं।
नए काम कराने के लिए इन्हें संंबंधित जिले के जिलाधिकारी से अनुमति लिए जाने की व्यवस्था दी गई है।प्रधानों की तरह ब्लाक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष भी प्रशासक बनने का ख्वाब देख रहे थे, हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद उनके ख्वाब टूटते नजर आ रहे हैं।
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