राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 रिपोर्ट: चार में से एक ही बच्चे को जन्म के पहले घंटे में मिल रहा मां का दूध
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं में कई सुधार हुए हैं, जैसे संस्थागत प्रसव और टीकाकरण मे ...और पढ़ें

चार में से एक ही बच्चे को जन्म के पहले घंटे में मिल रहा मां का दूध।

समय कम है?
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राज्य ब्यूरो, लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं पर फोकस कर बच्चों के टीकाकरण समेत कई मानकों में काफी हद तक सुधार किया है, लेकिन कई बिंदुओं पर चिंता भी बढ़ी है। प्रदेश में छह महीने तक के शिशुओं को दी जाने वाली एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग की दर में चिंताजनक गिरावट आई है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 की रिपोर्ट बताती है कि जन्म से एक घंटे के अंदर स्तनपान करने की दर 60 से गिरकर 34.6 प्रतिशत पहुंच गई है। प्रदेश में चार में से एक ही बच्चे को जन्म के पहले घंटे में मां का दूध मिल रहा है।
बच्चों एवं महिलाओं में मोटापा एवं बीएमआई भी बिगड़ा मिला है। हेल्थ बीमा का आंकड़ा 15.8 से बढ़कर 37.2 प्रतिशत तक पहुंच गया, लेकिन राष्ट्रीय मानक 60 प्रतिशत से यह अब भी कम है। माहवारी को लेकर स्वच्छता में कमी आई है।
आयोडीनयुक्त नमक के उपयोग, 9-35 माह के बीच विटामिन ए लेने एवं डायरिया से बचाव में कमी देखी गई है। हालांकि परिवार नियोजन अभियान के तहत प्रजनन दर 2.74 से घटकर 2.2 हुई है।
संस्थागत प्रसव की दर 67.8 प्रतिशत से बढ़कर 85 प्रतिशत तक पहुंच गई है, हालांकि यह अब भी राष्ट्रीय मानक से कम है।
वर्ष 2015-16 और 2023-24 के बीच के आंकड़ों की तुलना बताती है कि स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सशक्तीकरण, परिवार नियोजन, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में अंतर आया है।
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वर्ष 2015-16 में 71 प्रतिशत घरों के सापेक्ष 2023-24 में बिजली 95.8 प्रतिशत घर तक पहुंच गई। स्वास्थ्य बीमा या किसी स्वास्थ्य सुरक्षा योजना से जुड़े परिवारों का प्रतिशत 6.1 से बढ़कर 37.2 प्रतिशत पहुंच गया है।
सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता भी 96.4 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 97.9 प्रतिशत (ग्रामीण) पहुंच गई है। राज्य की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) 2015-16 के 2.74 से घटकर 2023-24 में 2.2 रह गई है। किशोरावस्था में गर्भधारण के मामलों में भी कमी दर्ज की गई है।
संस्थागत प्रसव की दर 67.8 प्रतिशत से बढ़कर 85 प्रतिशत हो गई है, जो मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। वर्ष 2015-16 में 12 से 23 माह आयु वर्ग के केवल 51.1 प्रतिशत बच्चों का पूर्ण टीकाकरण हुआ था।
अब यह आंकड़ा बढ़कर 81.4 प्रतिशत तक पहुंच गया है। बच्चों में बौनापन की समस्या 46.2 से घटकर 31.5 प्रतिशत पर आ गई है। कम वजन वाले बच्चों का प्रतिशत 39.5 से घटकर 34.5 प्रतिशत रह गया है।
15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की 10 वर्ष या उससे अधिक स्कूली शिक्षा प्राप्त महिलाओं का प्रतिशत 32.9 से बढ़कर 42.5 प्रतिशत हो गया है। स्वयं संचालित बैंक खाते रखने वाली महिलाओं का प्रतिशत 27.7 से बढ़कर 83.5 प्रतिशत पहुंच गया है।