IIT रुड़की समेत 5 इंस्टीट्यूट सवारेंगे युवाओं का भविष्य, यूपी कौशल विकास मिशन ने बनाया नॉलेज पार्टनर
उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन ने युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुसार दक्ष बनाने के लिए आईआईटी रुड़की सहित पांच प्रमुख संस्थानों को नॉलेज पार्टनर बनाय ...और पढ़ें

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UPSDM ने आईआईटी रुड़की सहित पांच संस्थानों को नॉलेज पार्टनर बनाया।
युवाओं को आधुनिक तकनीक, नवाचार और उद्यमिता का व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा।
प्रशिक्षण से रोजगार क्षमता बढ़ेगी और स्वरोजगार के अवसर मजबूत होंगे।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रदेश के युवाओं को केवल प्रमाणपत्र नहीं, बल्कि उद्योगों की जरूरत के अनुरूप दक्ष मानव संसाधन बनाने की दिशा में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (यूपीएसडीएम) ने कदम उठाया है। मिशन ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की, मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) प्रयागराज, भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) प्रयागराज, राष्ट्रीय उद्यमिता एवं लघु व्यवसाय विकास संस्थान (एनआईईएसबीयूडी) और भारतेंदु नाट्य अकादमी, लखनऊ को नालेज पार्टनर बनाया है।
इन संस्थानों की विशेषज्ञता के आधार पर प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है, जिससे युवाओं को नई तकनीकों, नवाचार और उद्यमिता का व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा।
इस व्यवस्था के तहत आईआईटी रुड़की के सहयोग से युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डेटा साइंस, इंजीनियरिंग, अनुसंधान और अत्याधुनिक तकनीकों से परिचित कराया जाएगा। एमएनएनआईटी प्रयागराज इलेक्ट्रॉनिक्स, रोबोटिक्स, आटोमेशन, मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्री 4.0 आधारित तकनीकी कौशल विकसित करने में सहयोग देगा।
वहीं आईआईआईटी प्रयागराज आईटी, साइबर सुरक्षा, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, क्लाउड कंप्यूटिंग, डिजिटल स्किल्स और स्टार्टअप इनोवेशन से जुड़े प्रशिक्षण को मजबूत करेगा। युवाओं को नौकरी के साथ स्वरोजगार के लिए भी तैयार किया जाएगा।
इसके लिए एनआईईएसबीयूडी बिजनेस प्लान तैयार करने, स्टार्टअप स्थापित करने, एमएसएमई प्रबंधन और उद्यमिता विकास का प्रशिक्षण देगा। दूसरी ओर भारतेंदु नाट्य अकादमी व्यक्तित्व विकास, प्रभावी संचार, मंच संचालन, अभिनय और अन्य सॉफ्ट स्किल्स विकसित करेगी, ताकि प्रशिक्षित युवा तकनीकी दक्षता के साथ बेहतर नेतृत्व और संवाद क्षमता भी हासिल कर सकें।
मिशन का मानना है कि केवल तकनीकी ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि उद्योगों की अपेक्षाओं के अनुरूप व्यावहारिक कौशल, नवाचार और समस्या समाधान की क्षमता भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से विशेषज्ञ संस्थानों की भागीदारी से प्रशिक्षकों की क्षमता वृद्धि, प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार और डिजिटल व उभरती तकनीकों पर आधारित पाठ्यक्रम तैयार होंगे।
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प्रशिक्षण मॉड्यूल उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप विकसित होंगे, जिससे प्रशिक्षण के बाद युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ेगी और स्वरोजगार के अवसर भी मजबूत होंगे। कौशल विकास से जुड़े कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी सभी जिलों की राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) से भी प्राप्त की जा सकती है।