UP में स्मार्ट मीटर पर फिर घिरे बिजली विभाग के अफसर, तीन साल बाद भी दूर नहीं हुई खामियां
उत्तर प्रदेश में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों में वही तकनीकी खामियां फिर सामने आई हैं, जो तीन साल पहले लगाए गए मीटरों में थीं। उपभोक्ता परिषद ने बिजली व ...और पढ़ें

HighLights
स्मार्ट मीटरों में पुरानी तकनीकी खामियां फिर दिखीं।
2023 की रिपोर्ट पर बिजली विभाग ने ध्यान नहीं दिया।
मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिए, रिपोर्ट अभी गुप्त।
राज्य ब्यूरो, जागरण, लखनऊ। प्रदेश में लगाए जा रहे बिजली के स्मार्ट मीटरों में जो तकनीकी खामियां अब सामने आ रही हैं वहीं तीन वर्ष पहले लगाए गए 12 लाख स्मार्ट मीटरों में भी सामने आई थीं। केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय की वर्ष 2023 की रिपोर्ट पर पावर कारपोरेशन प्रबंधन ने ध्यान दिया होता तो स्मार्ट मीटर परियोजना से उपभोक्ताओं को परेशानी न होती।
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने बताया कि एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (ईईएसएल) द्वारा वर्ष 2019-2022 के बीच लगाए गए 12 लाख स्मार्ट मीटरों में शिकायतें आने पर ऊर्जा मंत्रालय ने उच्च स्तरीय समिति का गठन कर वर्ष 2023 में जांच कराई थी, जांच में सामने आई खामियों की रिपोर्ट पावर कारपोरेशन प्रबंधन को सौंपी गई थी।
प्रबंधन ने उस रिपोर्ट से सीख ली होती तो स्मार्ट मीटर परियोजना इन दिनों विवादों में नहीं होती। ऊर्जा मंत्रालय की टीम ने विद्युत वितरण कंपनियों के क्षेत्रों का दौरा कर स्मार्ट मीटरिंग प्रणाली, बिलिंग व्यवस्था, उपभोक्ता अनुभव तथा तकनीकी की गहन जांच की थी। इस बार भी स्मार्ट मीटरों में वही खामियां सामने आ रही हैं।
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लंबित बिलिंग सिस्टम का एकीकरण, एसएमएस अलर्ट सेवा का बाधित होना, चेक मीटर की स्थापना में अनियमितता, मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का अभाव, लो बैलेंस अलर्ट फीचर का अभाव तथा नेटवर्क की समस्याएं वर्ष 2023 में भी सामने आई थीं, इस बार भी यही समस्याएं सामने आ रही हैं। वर्मा ने कहा कि प्रबंधन को स्मार्ट मीटर परियोजना के क्रियान्वयन में जल्दबाजी नहीं दिखानी थी।
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गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पावर कारपोरेशन प्रबंधन ने स्मार्ट मीटर की तकनीकी खामियों के लिए चार सदस्यीय टीम गठित कर आइआइटी कानपुर के प्रोफेसर को जांच सौंपी है। सूत्रों के अनुसार टीम ने जांच पूरी कर ली है लेकिन कारपोरेशन प्रबंधन ने अब तक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है। इस बीच स्मार्ट प्रीपेड मीटर की व्यवस्था समाप्त की जा चुकी है।