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    यूपी कृषि विभाग की पहल: मिश्रित हरी खाद के बीजों पर मिलेगा 50 प्रतिशत का अनुदान, मिट्टी की सुधरेगी सेहत

    Updated: Sun, 19 Apr 2026 10:26 PM (IST)

    उत्तर प्रदेश में यूरिया-डीएपी के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है, जिससे जीवांश कार्बन और मित्र कीट कम हो रहे हैं, फसल उत्पादन प्रभाव ...और पढ़ें

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    राज्य ब्यूरो, जागरण, लखनऊ। प्रदेश में मिट्टी की सेहत बिगड़ रही है। अत्यधिक यूरिया और डीएपी के इस्तेमाल से न केवल जीवांश कार्बन घटकर 0.2 से 0.3 प्रतिशत रह गया है, बल्कि केंचुए और मित्र कीट भी गायब हो रहे हैं, जिसका सीधा असर फसल उत्पादन पर पड़ रहा है।

    ऐसे में अब कृषि विभाग किसानों को हरी खाद का इस्तेमाल बढ़ाने पर जोर देने लगा है। अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी में जीवांश कार्बन का स्तर 0.8 से एक प्रतिशत होना जरूरी है। लेकिन रासायनिक उर्वरकों के अधिक प्रयोग और गर्मी में खेतों की जुताई न करने से मिट्टी की गुणवत्ता लगातार गिर रही है।

    जबकि हरी खाद के तहत ढैंचा, सनई, लोबिया, ग्वार और मक्का जैसी फसलों को 30 से 40 दिन में मिट्टी में पलट दिया जाता है। इन फसलों की जड़ों में मौजूद जीवाणु हवा से नाइट्रोजन लेकर मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं।

    इससे नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश जैसे पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ती है और सूक्ष्म जीव सक्रिय होते हैं। कृषि निदेशक डॉ. पंकज त्रिपाठी ने बताया कि अप्रैल-मई की गर्मी में हरी खाद की फसल उगाने से जमीन बंजर होने से बचती है और अगली फसल के लिए बेहतर तैयार होती है।

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    कृषि विभाग किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए ढैंचा और मिश्रित हरी खाद के बीज 50 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराएगा। किसान विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण कर इसका लाभ ले सकते हैं। हरी खाद के इस्तेमाल से जहां रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी, वहीं खेती की लागत में भी अच्छी बचत होगी।

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