यूपी में कौशल विकास योजना का दूसरा फेस शुरू, 1 लाख युवाओं को AI की ट्रेनिंग दिलाएगी योगी सरकार
प्रदेश सरकार ने राज्य कौशल विकास निधि (एसएसडीएफ) के दूसरे चरण में एक लाख से अधिक युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण देने की शुरुआत की है। ...और पढ़ें
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एक लाख युवाओं को एआइ कौशल प्रशिक्षण दिलाएंगी सरकार
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। युवाओं को रोजगारपरक और भविष्य की तकनीकी जरूरतों के अनुरूप तैयार करने के लिए प्रदेश सरकार ने राज्य कौशल विकास निधि (एसएसडीएफ) योजना के दूसरे चरण की शुरुआत कर दी है। इस चरण में 936 प्रशिक्षण प्रदाताओं के माध्यम से एक लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रशिक्षण में पहली बार 'एआई फॉर ऑल' और अन्य फ्यूचरिस्टिक कोर्स अनिवार्य किए गए हैं। सामान्य ज्ञान बढ़ाने के लिए हर सेंटर पर प्रतिदिन एक हिंदी और एक अंग्रेजी अखबार रखना होगा। निगरानी के लिए सभी प्रशिक्षण केंद्रों पर सीसी कैमरे लगवाने के भी निर्देश दिए गए हैं।
योजना के तहत हर बैच में चार घंटे का 'एआइ फॉर ऑल' और सॉफ्ट स्किल मॉड्यूल पढ़ाना अनिवार्य किया गया है। कोर्सेज की अधिकतम अवधि 900 घंटे रखी गई है और आवासीय केंद्रों पर प्रतिदिन कम से कम आठ घंटे की क्लास अनिवार्य होगी। संस्थाएं केवल नेशनल काउंसिल फार वोकेशनल एजुकेशन एंड ट्रेनिंग (एनसीवीईटी)- राष्ट्रीय योग्यता रजिस्टर (एनक्यूआर) पोर्टल पर लिस्टेड जाब रोल ही चुन सकेंगी और जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाई (डीपीएमयू) द्वारा जांच के बाद ही बैच को मंजूरी दी जाएगी।
अधिक उपस्थिति वाले छात्रों को ही मिलेगा रोजगार मेले में अवसर
नए सेंटर्स का उद्घाटन स्थानीय विधायकों के हाथों कराने के भी निर्देश दिए गए हैं। इस बार लक्ष्य आवंटन की प्रक्रिया में ‘कौशल दर्पण’ एआई डैशबोर्ड का उपयोग किया है।
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मिशन निदेशक पुलकित खरे ने बताया कि 831 निजी, राजकीय व स्टार्ट-अप प्रशिक्षण प्रदाताओं को 91,425 युवाओं और 105 औद्योगिक, न्यू-एज प्रशिक्षण प्रदाताओं को 14,650 युवाओं काे प्रशिक्षण देने लक्ष्य दिया गया है। संस्थाओं को हर हाल में एक अगस्त से कक्षाएं शुरू करनी होंगी। इसके लिए 17 चरण की समय सारिणी जारी की गई है, जिसमें सेंटर सिलेक्शन, सत्यापन, जागरूकता कैंप, बैच अप्रूवल से लेकर प्लेसमेंट तक की समय सीमा तय है।
कोर्स में 70 प्रतिशत या अधिक उपस्थिति वाले छात्रों को ही रोजगार मेले में अवसर मिलेगा और परिणाम के 90 दिनों के भीतर प्लेसमेंट कराना होगा। नौकरी मिलने के बाद भी 365 दिनों तक ट्रैकिंग की जाएगी। योजना के पहले चरण में अप्रैल में 957 ट्रेनिंग प्रोवाइडर्स को 99 हजार से अधिक युवाओं के प्रशिक्षण का लक्ष्य आवंटित किया गया था, जिनका प्रशिक्षण वर्तमान में चल रहा है।
क्लास शुरू न होने पर होगी कार्रवाई
व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने बताया कि लक्ष्य मिलने के बाद जब तक प्रशिक्षण प्रदाता, मिशन के साथ लिखित एग्रीमेंट नहीं कर लेते और उसकी पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक डीपीएमयू बैच बनाने की अनुमति नहीं देगी।
आधुनिक उद्योगों की मांग को देखते हुए हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स, एआई, आईटी-आईटीईएस, फूड प्रोसेसिंग, अपैरल और हैंडीक्राफ्ट्स जैसे न्यू एज सेक्टर्स को विशेष प्राथमिकता दी गई है। यदि किसी संस्था ने समय पर क्लास शुरू नहीं की या ग्राउंड से कोई शिकायत मिली, तो उनके खिलाफ कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।