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योगी कैबिनेट की बैठक आज, होमगार्डों को कैशलेस इलाज सहित 24 से ज्यादा प्रस्तावों पर लग सकती है मुहर

Published: Mon, 06 Jul 2026 07:53 AM (IST)

उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने नई स्टार्टअप नीति-2026 को मंजूरी दी है, जिसका लक्ष्य राज्य को शीर्ष स्टार्टअप इकोसिस्टम में स्थापित करना और युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित करना है।

योगी कैबिनेट की बैठक आज। (तस्वीर- फाइल)

योगी कैबिनेट की बैठक आज। (तस्वीर- फाइल)

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राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रदेश सरकार राज्य में नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देने के लिए उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 को स्वीकृति देने जा रही है।

अगले पांच वर्षों तक प्रभावी रहने वाली इस नीति का उद्देश्य प्रदेश को देश के शीर्ष स्टार्टअप ईकोसिस्टम वाले राज्यों में स्थापित करना, युवाओं को उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित करना और निवेश व रोजगार के नए अवसर सृजित करना है।

नई नीति में हाईटेक और डीप-टेक क्षेत्रों पर विशेष फोकस रखते हुए स्टार्टअप को शुरुआती चरण से लेकर विस्तार तक व्यापक वित्तीय और संस्थागत सहयोग देने का प्रविधान किया गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को सुबह 10 बजे उनके आवास पर कैबिनेट की बैठक होगी। इसमें करीब दो दर्जन से अधिक प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा। नई स्टार्ट अप नीति के तहत सरकार शैक्षणिक संस्थानों, उद्योगों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ साझेदारी बढ़ाकर नवाचार आधारित उद्यमिता को प्रोत्साहित करेगी।

इसके अंतर्गत प्रदेश में डीप-टेक हब, नए सेंटर आफ एक्सीलेंस, इन्क्यूबेटर और एक्सीलेरेटर नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा।

स्टार्टअप को उद्योगों से जोड़ने के लिए ओडीओपी, एनआरआइ नेटवर्क, स्टार्टअप एक्सप्रेस, हैकाथान, स्टार्टअप वीक, ग्रैंड चैलेंज और नवाचार मेलों का आयोजन भी किया जाएगा। कालेजों और विश्वविद्यालयों में ई-सेल तथा फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रमों के जरिये उद्यमिता संस्कृति को मजबूत किया जाएगा।

स्टार्टअप को दो वर्षों तक 20 हजार रुपये प्रति माह भरण-पोषण भत्ता दिया जाएगा। प्रोटोटाइप विकसित करने के लिए 50 लाख रुपये तक का अनुदान, जबकि मिनिमम वायबल प्रोडक्ट तैयार करने के लिए 15 लाख रुपये तक सीड कैपिटल मिलेगी।

विशेष परिस्थितियों में यह सहायता 50 लाख रुपये तक दी जा सकेगी। उत्तर प्रदेश राज्य में स्टार्टअप, इन्क्यूबेशन, स्टार्टअप ईकोसिस्टम व संबंधित पहलों के प्रोत्साहन के लिए सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के अंतर्गत ‘उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन’ की स्थापना को भी मंजूरी मिल सकती है।

नगर निगम गोरखपुर व मुरादाबाद को म्यूनिसिपल बांड जारी करने तथा अवस्थापना विकास निधि के लिए धनराशि उपलब्ध कराए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति मिल सकती है।

गोरखपुर 80 करोड़ रुपये व मुरादाबाद 50 करोड़ रुपये की धनराशि म्यूनिसिपल बांड से जुटाएगा। शाहजहांपुर की नगर पालिका परिषद जलालाबाद क्षेत्र के तहत आने वाले कस्बे ''जलालाबाद'' का नाम परिवर्तित कर ''परशुरामपुरी'' किए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति मिल सकती है।

उच्च शिक्षा विभाग की ओर से निजी क्षेत्र के तीन विश्वविद्यालयों महर्षि महेश योगी इंटरनेशनल एग्रीकल्चर विश्वविद्यालय, बिल्हौर कानपुर, अजय कुमार गर्ग विश्वविद्यालय, गाजियाबाद, व ठाकुर युगराज सिंह विश्वविद्यालय, फतेहपुर की स्थापना के प्रस्ताव भी स्वीकृत हो सकते हैं।

उत्तर प्रदेश अधीनस्थ (सहकारी समितियां और पंचायत) लेखा-परीक्षा सेवा (प्रथम संशोधन) नियमावली को भी मंजूरी मिल सकती है। इसके अलावा पंचायती राज, महिला कल्याण, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास, अल्पसंख्यक कल्याण, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग, कार्मिक, खेल व सिंचाई एवं जल संसाधन विभागों के भी प्रस्ताव आने की संभावना है।

होमगार्ड स्वयं सेवकों को भी मिलेगी कैशलेस इलाज की सुविधा

कैबिनेट की बैठक में करीब 1.60 लाख होमगार्ड स्वयं सेवकों व उनके आश्रितों को सरकार की तरफ से कैशलेस इलाज की सुविधा प्रदान करने संबंधी प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी जा सकती है।

इस संबंध में सोमवार को प्रस्तावित कैबिनेट की बैठक में प्रस्ताव पेश करने की तैयारी पूरी की जा चुकी है। राज्य में वर्तमान में 1.18 लाख होमगार्ड स्वयं सेवक हैं और 41 हजार से अधिक होमगार्ड की भर्ती की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।

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