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    महराजगंज में रामग्राम स्तूप की खोज, कन्हैया बाबा स्थल पर ASI उत्खनन को मिली हरी झंडी

    Updated: Fri, 10 Jul 2026 11:29 AM (IST)

    भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) ने महराजगंज के सोहगीबरवा स्थित कन्हैया बाबा स्थल पर दूसरे चरण के उत्खनन को मंजूरी दे दी है। यह स्थल कुषाणकालीन कलाकृ ...और पढ़ें

    उत्खनन के दौरान मिली कलात्मक दीवार। फाइल फोटो

    उत्खनन के दौरान मिली कलात्मक दीवार। फाइल फोटो

    HighLights

    1. एएसआइ ने कन्हैया बाबा स्थल के उत्खनन को मंजूरी दी।

    2. पहले उत्खनन में कुषाणकालीन दीवारें, कलात्मक ईंटें मिली थीं।

    3. यह स्थल बुद्धकालीन रामग्राम स्तूप होने की प्रबल संभावना।

    जागरण संवाददाता, महराजगंज। सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग के अंतर्गत चौक जंगल में स्थित कन्हैया बाबा स्थल के पुन: उत्खनन का रास्ता साफ हो गया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) ने बीते आठ जुलाई को इस स्थल के उत्खनन के लिए अधीक्षण पुरातत्वविद, एएसआइ लखनऊ मंडल को स्वीकृति प्रदान कर दी है।

    इसके पूर्व 2025 में भी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा यहां दो माह तक उत्खनन कराया गया था। 10 मीटर की परिधि में हुए उत्खनन के दौरान कुषाणकालीन कलात्मक दीवार, ईंटे व मिट्टी के बर्तन आदि मिले थे। उत्खनन में प्राप्त सामग्री को विस्तृत अध्ययन के लिए पुरातत्वविद अपने साथ ले गए थे। पुरातत्वविद इस स्थल के बुद्धकालीन रामग्राम स्तूप होने की संभावना जता रहे हैं। लेकिन पूर्ण उत्खनन के बाद ही अंतिम निर्णय पर पहुंचा जा सकता है। रामग्राम स्तूप बुद्ध के अस्थिअवशेष पर बना है।

    कई विशेषज्ञों के अनुसार चौक जंगल का यह प्राचीन टीला बौद्धकालीन कोलीय गणराज्य की राजधानी रामग्राम स्तूप हो सकता है। बौद्ध ग्रंथों के अनुसार भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद उनके अस्थि अवशेष आठ भागों में विभाजित किए गए थे, जिनमें से एक भाग कोलीय गणराज्य को मिला था। उसी पर रामग्राम स्तूप का निर्माण कराया गया।

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    इतिहासकारों के अनुसार, सम्राट अशोक अन्य स्तूपों की तरह यहां भी अस्थि अवशेष लेने पहुंचे थे, लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध के कारण वे उन्हें ले नहीं सके। इसी आधार पर पुरातत्वविदों का मानना है, कि बुद्ध के मूल अस्थि अवशेष आज भी इस स्तूप के भीतर सुरक्षित हो सकते हैं।

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    जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल ने बताया कि उत्खनन के बाद यह स्थल रामग्राम स्तूप के रूप में प्रमाणित होता है तो महराजगंज को विश्व बौद्ध पर्यटन मानचित्र पर महत्वपूर्ण स्थान मिलेगा। इससे जिले के पर्यटन, सांस्कृतिक महत्व और आर्थिक विकास को भी नई दिशा प्राप्त होगी।

    रामग्राम स्तूप हमारी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर है। इसके वैज्ञानिक सर्वेक्षण और उत्खनन का विषय मैंने लगातार संसद, संस्कृति मंत्रालय तथा संबंधित अधिकारियों के समक्ष उठाया। सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने अब वृहद उत्खनन के लिए सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान की है। उत्खनन पूरा होने के बाद कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य सामने आएंगे, जिससे पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी।

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    -पंकज चौधरी, केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष