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    भारत-नेपाल सीमा पर हाई अलर्ट, रोहिंग्या घुसपैठ की आशंका

    By Vishwadeepak TripathiEdited By: Vivek Shukla
    Updated: Thu, 23 Jul 2026 09:26 AM (IST)

    नेपाल में रह रहे रोहिंग्या भारत में घुसपैठ की फिराक में हैं, जिसके चलते भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। प्रवर्तन निदेशालय ने अवैध फंडिंग की ...और पढ़ें

    सोनौली सीमा का मुख्य द्वार। -जागरण

    सोनौली सीमा का मुख्य द्वार। -जागरण

    HighLights

    1. नेपाल से भारत में रोहिंग्या घुसपैठ का खतरा।

    2. सीमावर्ती जिलों में तीन हजार रोहिंग्या होने की आशंका।

    3. ईडी ने अवैध फंडिंग की जांच शुरू की।

    विश्वदीपक त्रिपाठी, महराजगंज। नेपाल में रह रहे रोहिंग्या भारत में घुसपैठ की फिराक में हैं। राजधानी काठमांडू सहित भारतीय सीमा से सटे तराई के जिलों में लगभग तीन हजार रोहिंग्या के रहने की आशंका है। आधिकारिक रूप से लगभग 500 रोहिंग्या काठमांडू में शरणार्थी के रूप में रह रहे हैं, जिनका पंजीकरण भी हुआ है। लेकिन तराई के रुपंदेही, नवलपरासी, कपिलवस्तु सहित अन्य जिलों में इनकी संख्या तीन हजार होने की आशंका जताई गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा भारत में रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों की अवैध फंडिंग करने वाले संगठनों और मदरसों की जांच शुरू करने के बाद सीमावर्ती क्षेत्र में हलचल बढ़ गई है।

    पगडंडी से भारत में घुसपैठ की आशंका को देखते हुए सतर्कता बढ़ा दी गई है। भारत-नेपाल की खुली सीमा रोहिंग्या और बांग्लादेशियों के लिए हमेशा से मुफीद रही है। नेपाल में आसानी से आने के बाद वे पगडंडी से भारत में प्रवेश करते हैं। जून 2022 में एसएसबी ने जांच के दौरान म्यांमार मूल की एक रोहिंग्या महिला रशीदा बेगम को दिल्ली-पोखरा मैत्री बस से गिरफ्तार किया था।

    जांच में उसके पास से मिला आधार कार्ड भी फर्जी निकला था। पता चला था कि उसके पति और पांच बच्चे पहले ही जम्मू-कश्मीर में रह रहे थे। 10 मार्च, 2025 को निचलौल क्षेत्र के मटराधमउर के पास से बांग्लादेश के मायमनसिंह थाना चिनाईकाटी के दुपरिया गांव निवासी सैफल इस्लाम को गिरफ्तार किया गया था।

    22 अप्रैल, 2025 को भी सुरक्षा बलों ने मटरा गांव के पास से एक अन्य बांग्लादेशी को पकड़ा था, जिसने अपना नाम प्रदीप कुमार राय निवासी हिंदू प्रधान पाड़ा थाना व जिला पंचगढ़ बांग्लादेश बताया था। सात साल बाद भी 321 लापता रोहिंग्या का नहीं मिला सुराग : मार्च 2019 से लापता 321 रोहिंग्या का सात वर्ष बाद भी पता नहीं चल पाया है।

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    शरणार्थी बनकर आए रोहिंग्या एक-एक कर अपने कैंप से गायब हो गए थे। इसी तरह पर्यटक वीजा पर नेपाल घूमने आए 722 लोग भी नेपाल से अनाधिकृत रूप से गायब थे। इन लोगों में बांग्लादेश, म्यांमार और श्रीलंका के मूल निवासियों की संख्या अधिक थी।

    अनधिकृत रूप से कोई भी व्यक्ति भारतीय सीमा में प्रवेश न करे, इसके लिए विशेष चौकसी के निर्देश दिए गए हैं। रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों को लेकर भी सतर्कता बरती जा रही है। पगडंडी पर भी निगरानी बढ़ाई गई है। लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।

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    -शक्ति सिंह ठाकुर, कमांडेंट, 22वीं वाहिनी, एसएसबी।