मथुरा स्वास्थ्य विभाग में लाखों का घोटाला: दो हजार का बॉयलर, 17,700 रुपये का भुगतान
मथुरा के स्वास्थ्य विभाग में राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन के तहत उपकरण खरीद में बड़ा घोटाला सामने आया है, जहां 2,000 रुपये के बॉयलर 17,700 रुपये में ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
HighLights
स्वास्थ्य विभाग में उपकरण खरीद में लाखों का घोटाला।
2000 रुपये का बॉयलर 17700 में खरीदा गया।
8 लाख के उपकरण का भुगतान पर आपूर्ति नहीं।
वेद प्रकाश गौतम, मथुरा। जिले के स्वास्थ्य विभाग में राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन (एनयूएचएम) के तहत सरकारी धन का बंदरबांट हो रहा है। उपकरण खरीद में जमकर खेल किया गया है। जिस बॉयलर की कीमत दो बाजार में दो हजार रुपये है, उसे 17,700 रुपये में खरीदा गया है।
दस स्वास्थ्य केंद्रों के लिए यह बॉयलर खरीदे गए हैं। एक खेल और हुआ, ठेकेदार को भुगतान तो पूरा हो गया, लेकिन तीन माह बाद भी आठ लाख के उपकरण तक नहीं आए। इस खेल का पर्दाफाश खुद एनयूएचएम के नोडल अधिकारी डा. सत्य प्रकाश राठौर ने खुद किया है।
दरअसल, वित्तीय वर्ष 2024-25 में जिले के 10 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए अनटाइड फंड से करीब 22 लाख रुपये के सामान की खरीदा जाना था।
बजट आने पर भुगतान की कही बात
सामान की आपूर्ति का ठेका तत्कालीन एनयूएचएम नोडल अधिकारी डॉ. पीयूष सोनी द्वारा मेसर्स गोविंद गिर्राज कांट्रेक्टर्स, एसएस कांट्रेक्टर्स एंड सप्लायर्स, देवांश इंटरप्राइजेज और गार्गी इंटरप्राइजेज को दिया गया। तय हुआ कि जैसे ही बजट आएगा, इन कंपनियों को भुगतान कर दिया जाएगा और कंपनियां स्वास्थ्य केंद्रों को सामान की आपूर्ति दे देंगी। बजट जारी होने के बाद विभागीय स्तर पर जल्दबाजी दिखाते हुए 30 मार्च 2026 को ही सभी बिलों का पूरा भुगतान भी कर दिया गया।
स्वास्थ्य विभाग में उपकरण खरीद में लाखों का खेल, दस केंद्रों पर बॉयलर की खरीद
घोटालें की परतें तब खुलीं, जब वर्तमान नोडल अधिकारी डॉ. सत्य प्रकाश राठौर ने जमीनी स्तर पर जांच की। भुगतान होने के बावजूद जून 2026 तक लगभग आठ लाख रुपये का सामान स्वास्थ्य केंद्रों को मिला ही नहीं। सबसे बड़ा खेल बॉयलर की खरीद में हुआ।
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डॉ. सत्य प्रकाश के मुताबिक, केंद्रों को जो बॉयलर भेजे गए, वह बेहद छोटे हैं, जिनकी बाजार में कीमत मात्र दो हजार रुपये है, लेकिन कागजों में इनके लिए 17,700 रुपये प्रति बॉयलर की दर से भुगतान किया गया।
भुगतान के बाद भी स्वास्थ्य केंद्रों को नहीं मिला आठ लाख रुपये का सामान
इस भ्रष्टाचार की पुष्टि संबंधित स्वास्थ्य केंद्रों के फार्मासिस्ट, अर्बन हेल्थ कोऑर्डिनेटर व वर्तमान नोडल अधिकारी द्वारा संयुक्त रूप से प्रमाणित रिपोर्ट में की गई है। चहेते ठेकेदारों की मिलीभगत से जनता की गाढ़ी कमाई की इस खुली लूट के सामने आ जाने से अब स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गई है। नोडल अधिकारी ने सीएमओ से इस मामले में तत्काल जवाबदेही तय करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की है।
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सीएमओ बोले, नहीं मिली शिकायत
विभाग में इतना बड़ा खेल हो गया और सीएमओ डॉ. राधावल्लभ का कहना है कि उन्हें जानकारी नहीं है। 18 जून को तैयार नोडल अधिकारी द्वारा पत्र सीएमओ को भेजा गया। लेकिन पांच दिन बाद भी सीएमओ का कहना है कि उन्हें कोई पत्र ही नहीं मिला। सीएमओ ने बताया कि वह कार्यालय में इसे लेकर पता करेंगे। पत्र देखने के बाद ही इस प्रकरण में कुछ कहा जा सकता है।