कथावाचक और दिल्ली के परिवार के बीच विवाद का मामला गहराया, CWC ने पुलिस भेजा नोटिस
बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) ने वृंदावन पुलिस को कथावाचक मृदुलकांत शास्त्री से जुड़े विवाद में दिल्ली के एक परिवार की महिलाओं और बच्चों को रात भर था ...और पढ़ें

मासूमों को हवालात में रखने पर पुलिस को सीडब्ल्यूसी का नोटिस।

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जागरण संवाददाता, मथुरा। वृंदावन में कथावाचक मृदुलकांत शास्त्री और दिल्ली से आए एक परिवार के बीच हुए विवाद ने अब एक नया कानूनी मोड़ ले लिया है। इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) ने कड़ा रुख अपनाया है।
समिति अध्यक्ष ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए वृंदावन कोतवाली को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मुख्य रूप से यह सवाल पूछा गया है कि छोटे-छोटे मासूम बच्चों को पूरी रात थाने में किस आधार पर और किन परिस्थितियों में रखा गया।
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष राजेश दीक्षित ने कहा कि यह मामला न केवल महिला हितों की अनदेखी का है, बल्कि सीधे तौर पर बाल अधिकारों के हनन का भी है।
शनिवार को वृंदावन के राधानिवास क्षेत्र में गाड़ी की टक्कर को लेकर हुए विवाद के बाद पुलिस ने दिल्ली के कड़कड़डूमा निवासी सुरेंद्र सिंह, उज्ज्वल, संदीप व उनके परिवार की महिलाओं और दो मासूम बच्चों को हिरासत में लिया था।
सीडब्ल्यूसी ने पुलिस को जारी किया नोटिस
पुलिस ने उन पर जानलेवा हमले की धाराएं लगाई थीं, जिसे बाद में कोर्ट ने खारिज कर दिया और इसे एक साधारण मारपीट व एक्सीडेंट का मामला मानकर सभी को जमानत दे दी। इस दौरान दिल्ली से आई महिलाओं ने पुलिस पर उन्हें और उनके छोटे बच्चों को पूरी रात हवालात में भूखा रखने व उचित व्यवहार न करने के आरोप लगाए।
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समिति के अध्यक्ष राजेश दीक्षित ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि यदि महिलाओं का कोई दोष था भी, तो उन्हें नियमानुसार वन स्टाप सेंटर भेजा जाना चाहिए था, न कि हवालात में रखा जाना चाहिए था। बच्चों को रात भर थाने में रखना कानून का स्पष्ट उल्लंघन है।
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इस पूरे प्रकरण की सच्चाई जानने के लिए बाल कल्याण समिति ने वृंदावन पुलिस से उस रात की कोतवाली की सीसीटीवी फुटेज भी मांगी है। समिति यह जांचना चाहती है कि पुलिस ने बच्चों और महिलाओं के साथ उस रात कैसा बर्ताव किया और उन्हें भोजन व अन्य सुविधाएं मुहैया कराई गईं या नहीं।
सोशल मीडिया पर वीडियो हो रहे वायरल
इंटरनेट मीडिया पर इस पूरी घटना के वीडियो तेजी से प्रसारित हो रहे हैं, जिसमें दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। फिलहाल, बाल कल्याण समिति के नोटिस के बाद पुलिस को यह स्पष्ट करना होगा कि कानूनी प्रक्रियाओं को दरकिनार कर मासूमों को रात भर थाने में क्यों रखा गया।