गोवर्धन में 470वां मुड़िया महोत्सव: संत निभाएंगे सनातन गोस्वामी की परंपरा, सुबह-शाम कीर्तन और शोभायात्रा
गोवर्धन में 470वां मुड़िया महोत्सव सोमवार से शुरू हो गया है, जिसमें गौड़ीय वैष्णव संत श्रीपाद सनातन गोस्वामी की परंपरा का निर्वहन करते हुए मुंडन करेंग ...और पढ़ें

फाइल फोटो।
HighLights
गोवर्धन में 470वां मुड़िया महोत्सव सोमवार से शुरू।
गौड़ीय संत मुंडन कर सनातन गोस्वामी की परंपरा निभाएंगे।
हरिनाम संकीर्तन और शोभायात्राओं संग गिरिराज परिक्रमा।
संवाद सूत्र, गोवर्धन (मथुरा)। गुरु भक्ति, वैराग्य और सनातन परंपरा का अद्भुत संगम सोमवार से गोवर्धन में एक बार फिर साकार हो गया है। श्रीपाद सनातन गोस्वामी की स्मृति में गौड़ीय वैष्णव संत मुंडन कर 'मुड़िया संत' की परंपरा का निर्वहन करेंगे। चैतन्य महाप्रभु मंदिर में अधिवास महोत्सव के साथ 470वें मुड़िया महोत्सव का शुभारंभ हो गया है। सुबह राधा-श्याम सुंदर मंदिर और सायंकाल महाप्रभु मंदिर से भव्य शोभायात्राएं निकलती है, जिनमें हरिनाम संकीर्तन के बीच संत गिरिराज महाराज की परिक्रमा की जाती है
चैतन्य महाप्रभु मंदिर के महंत गोपाल दास ने बताया कि मुड़िया महोत्सव की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार संत पहले मुंडन कर गुरु के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करेंगे और फिर शोभायात्रा में शामिल होंगे। दोनों यात्राओं में बड़ी संख्या में देश-विदेश से आए गौड़ीय संत और श्रद्धालु भाग लेंगे।
भक्ति से प्रसन्न होकर स्वयं गिरिराज ने दिए दर्शन
ब्रज की प्राचीन पांडुलिपियों में वर्णन मिलता है कि जीवन के अंतिम समय में वृद्धावस्था के कारण जब सनातन गोस्वामी गिरिराज परिक्रमा करने में असमर्थ हो गए, तब उनकी अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें गिरिराज शिला प्रदान की। कहा कि इस शिला की परिक्रमा करने से ही गिरिराज परिक्रमा का पूर्ण पुण्य प्राप्त होगा। यह पावन शिला आज भी वृंदावन के राधा दामोदर मंदिर में श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ विराजमान है।
यहीं से शुरू हुई मुड़िया पूर्णिमा की परंपरा
सन 1556 में सनातन गोस्वामी के गोलोक गमन के बाद उनके शिष्यों और गौड़ीय संतों ने मुंडन कर उनके पार्थिव शरीर के साथ हरिनाम संकीर्तन करते हुए गिरिराज की सप्तकोसीय परिक्रमा की। तभी से गुरु पूर्णिमा पर मुंडन कर परिक्रमा करने की यह परंपरा प्रारंभ हुई और ब्रज में गुरु पूर्णिमा 'मुड़िया पूर्णिमा' के नाम से प्रसिद्ध हो गई। समय के साथ इसका स्वरूप विशाल धार्मिक मेले में बदल गया, जिसमें आज करोड़ों श्रद्धालु आस्था के साथ गिरिराज महाराज की परिक्रमा करते हैं।
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इस वर्ष गौड़ीय संतों द्वारा 470वां मुड़िया महोत्सव पारंपरिक धार्मिक आयोजनों, हरिनाम संकीर्तन और शोभायात्राओं के साथ श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में मनाया जाएगा।
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