मथुरा मोटरबोट हादसा: ढोलक की थाप के साथ थम गई युवराज की सांसें, लुधियाना से भजन-कीर्तन के लिए आए थे
मथुरा में यमुना नदी में लापता 23 वर्षीय युवराज उर्फ यश भल्ला का शव देवराहा बाबा मंदिर घाट से बरामद हुआ। पिता राकेश भल्ला ने बेटे की ढोलक के साथ उसे अं ...और पढ़ें

यश की फाइल फोटो। यमुना में डूबे युवराज उर्फ यश पिता राकेश भल्ला को ढ़ोलक सौंपते सीओ गोवर्धन अनिल कुमार (बाएं)। फोटो जागरण

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, मथुरा। यमुना किनारे सोमवार सुबह वह पल हर आंख को नम कर गया, जब लापता चल रहे 23 वर्षीय युवराज उर्फ यश भल्ला का शव देवराहा बाबा मंदिर के समीप घाट से बरामद किया गया।
युवराज श्रद्धालुओं के जत्थे के साथ भजन-कीर्तन के लिए आए थे। वह अपने साथ ढोलक भी लाए थे। इसकी थाप पर श्रद्धालु भक्ति में डूबे हुए थे। किसी ने नहीं सोचा था कि उनकी ढोकल की यह थाप अब हमेशा के लिए खामोशी में बदल जाएगी।
भजन-कीर्तन को श्रद्धालुओं के जत्थे के साथ लुधियाना से आया था
शुक्रवार को वृंदावन के केशीघाट पर मोटरबोट पलटने की जानकारी मिलते ही पंजाब के लुधियाना जालंधर बाइपास निवासी राकेश भल्ला अपने बेटे युवराज उर्फ यश की तलाश में शनिवार तड़के घटनास्थल पर पहुंच गए। यमुना किनारे बैठकर वह लगातार राहत और बचाव अभियान पर नजर लगाए रहे। हर गुजरते घंटे के साथ उनकी बेचैनी बढ़ती गई। उन्होंने बस इतना कहा अपने बेटे को जिंदा देखना चाहता हैं। कम से कम एक बार उसकी आवाज सुन लें। पिता की यह दर्दभरी पुकार सुन वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं।
शव के साथ अंतिम विदाई देने के लिए ढोलक को साथ ले गए पिता
प्रशासनिक अधिकारी और आसपास खड़े लोग भी खुद को संभाल नहीं सके। जिलाधिकारी सीपी सिंह ने उन्हें ढांढस बंधाया, लेकिन एक पिता के भीतर उठ रहे तूफान को शांत कर पाना किसी के लिए संभव नहीं था।
यश पढ़ाई में बेहद होनहार था
राकेश भल्ला ने बताया कि उनका बेटा यश पढ़ाई में बेहद होनहार था और इस बार 12वीं कक्षा में पहुंचा था। संगीत से उसे गहरा लगाव था। कम उम्र में ही वह अपने सपनों को सुर देने लगा था। परिवार को उम्मीद थी कि उसका हुनर एक दिन नई पहचान बनाएगा, लेकिन नियति ने उसके सपनों को यमुना की लहरों में समेट लिया।
खबरें और भी
रविवार को 14 किलोमीटर दूर मिली थी ढोलक
रविवार को पुलिस ने घटनास्थल से करीब 14 किलोमीटर दूर गोकुल बैराज के पास उनकी ढोलक बरामद की थी। वह ढोलक अब बेटे की अंतिम निशानी बन गई। सोमवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे युवराज का शव मिलने के बाद पिता उसे उसी ढोलक के साथ अंतिम विदाई देने के लिए अपने साथ ले गए। यमुना तट पर पसरे सन्नाटे के बीच एक पिता की आंखों में बस यही सवाल तैरता रहा कि आखिर उसका चहकता बेटा इतनी जल्दी कैसे खामोश हो गया।