मथुरा चावल कालाबाजारी केस: खुद फंसा तो कंपनी प्रबंधन बोला- मक्का की जगह गलती से लादा चावल
मथुरा की एलियांज डिस्टलरी से अनुदानित चावल की कालाबाजारी के मामले में जांच टीम को कंपनी प्रबंधन ने अजीबोगरीब जवाब दिया है। प्रबंधन ने कहा कि मक्का की ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, मथुरा। छाता स्थित एलियांज डिस्टलरी से अनुदानित चावल की कालाबाजारी के मामले में चल रही जांच में रोज नई बात सामने आ रही है। इस गंभीर मामले में खुद को फंसता देख कंपनी के अधिकारियों ने जांच टीम को एक बेहद हास्यास्पद और अजीबोगरीब जवाब दिया है।
डिस्टलरी प्रबंधन का कहना है कि वह ट्रकों में मक्का लादकर भेजना चाह रहे थे, लेकिन गलती से मक्का की जगह चावल लद गया।
हैरत की बात तो यह है कि यह गलती एक ट्रक के साथ नहीं हुई, बल्कि दोनों ट्रकों में चावल लाद दिया गया। हालांकि, जांच टीम ने जब पूछा कि यह मक्का कहां से आई थी और इसे कहां भेजा जाना था, तो डिस्टलरी प्रबंधन कोई साक्ष्य नहीं दिखा सका।
जांच टीम ने साफ किया है कि डिस्टलरी प्रबंधन जांच में किसी भी तरह का सहयोग नहीं कर रहा है। मामले की तह तक जाने के लिए जब कंपनी के महाप्रबंधक जितेंद्र मलिक को तलब किया गया, तो वह जांच टीम के सामने पेश होने के बजाय अचानक छुट्टी पर चले गए।
दूसरी ओर सहायक महाप्रबंधक अनिल मिश्रा ने मक्का की जगह चावल भेजने का बचकाना बयान तो दे दिया, लेकिन वह इससे जुड़े दावों को साबित करने में नाकाम रहे।
छह सदस्यीय जांच टीम ने डीएम को सौंपी अपनी रिपोर्ट में चावल की कालाबाजारी के लिए कंपनी के प्रबंध निदेशक, महाप्रबंधक व सहायक महाप्रबंधक सहित अन्य संबंधित कर्मचारियों को दोषी माना है। जांच टीम ने इस प्रकरण में डिस्टलरी सहायक आबकारी आयुक्त की भूमिका को संदिग्ध मानते हुए उनकी विभागीय जांच के लिए कहा है।
खबरें और भी
30 जून की रात को पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने एलियांज डिस्टलरी से कालाबाजारी के लिए ले जाए जा रहे दो ट्रकों को पकड़ा था। इन ट्रकों में 540 कुंतल सरकारी अनुदानित चावल भरा हुआ था, जिसे हरियाणा के जींद स्थित एक आढ़ती के पास भेजा जा रहा था। डीएम सीपी सिंह ने बताया कि प्रकरण की जांच पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट उन्हें प्राप्त हो गई है।